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CTET EVS की तैयारी: सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले NCERT टॉपिक्स
अगर आप सही NCERT टॉपिक्स पर ध्यान दें, तो EVS, CTET पेपर 1 के सबसे ज्यादा स्कोर दिलाने वाले सेक्शन में से एक है। यहां जानिए क्या पढ़ना जरूरी है और सवाल किस तरह पूछे जाते हैं।

EVS इतना स्कोरिंग सेक्शन क्यों है
CTET पेपर 1 में एनवायरनमेंटल स्टडीज (EVS) लगभग पूरी तरह कक्षा 1 से 5 की NCERT EVS किताबों ("Looking Around" सीरीज) से आता है, साथ में कुछ आसान पेडागॉजी (शिक्षण विधि) के कॉन्सेप्ट भी होते हैं। मैथ्स या CDP के मुकाबले यहां बहुत कम कन्फ्यूजन रहता है। सिलेबस छोटा है, स्टडी मटीरियल सिर्फ चंद NCERT किताबों तक सीमित है, और सवाल पूछने का तरीका हर साल लगभग एक जैसा रहता है। यही वजह है कि यह सेक्शन सबसे कम मेहनत में सबसे ज्यादा सही जवाब दिलाने वाला बन जाता है।
छह मुख्य विषय क्षेत्र
CTET EVS सिलेबस इन छह बड़े थीम्स के इर्द-गिर्द बना है, जो सब NCERT से लिए गए हैं:
- परिवार और दोस्त (Family and Friends): रिश्ते, पेड़-पौधे और जानवर, काम और खेल, सुनना-बोलना
- भोजन (Food): भोजन के स्रोत, अलग-अलग इलाकों की खान-पान आदतें, साफ-सफाई, खाना बनाने के तरीके
- आवास (Shelter): घरों के प्रकार, बनाने की सामग्री, जानवरों के रहने की जगहें
- पानी (Water): स्रोत, पानी की अवस्थाएं, पानी बचाने के तरीके, पानी से जुड़े पेशे
- यात्रा (Travel): आने-जाने के साधन, संचार के तरीके
- हम जो बनाते और करते हैं (Things We Make and Do): आसान साइंस और क्राफ्ट के कॉन्सेप्ट, प्राकृतिक घटनाएं, पेशे
हर थीम में बेसिक साइंस (पेड़-पौधे, जानवर, प्राकृतिक संसाधन) और बेसिक सोशल साइंस (समुदाय, पेशे, विविधता) दोनों मिले होते हैं। यह जानबूझकर किया गया है, क्योंकि प्राइमरी लेवल पर EVS को अलग-अलग "साइंस" और "सोशल स्टडीज" न मानकर, एक जुड़ा हुआ विषय माना जाता है।
सवाल असल में कैसे दिखते हैं
CTET में EVS के सवाल आमतौर पर तीन तरह के होते हैं:
1. सीधा कंटेंट याद रखना
NCERT चैप्टर की जानकारी पर आधारित सीधे सादे सवाल, जैसे आवास के प्रकार, पानी के स्रोत, भोजन की श्रेणियां। अगर आपने NCERT किताबें पढ़ी हैं, तो ये पूरे एग्जाम के सबसे आसान नंबर हैं।
2. कॉन्सेप्ट को लागू करना
ऐसे सवाल जिनमें आपको किसी EVS कॉन्सेप्ट को असल जिंदगी या पर्यावरण से जोड़ना होता है, जैसे यह पहचानना कि कौन सी आदत पानी बचाने में सबसे मददगार है, या किसी जानवर को उसके सही आवास से मिलाना।
3. EVS की शिक्षण विधि (पेडागॉजी)
इसमें पूछा जाता है कि EVS को पढ़ाया कैसे जाना चाहिए, और यहीं यह सेक्शन CDP से ओवरलैप करता है। कुछ आम विषय:
- एक्टिविटी और अनुभव आधारित सीखना: CTET उन शिक्षण तरीकों को ज्यादा पसंद करता है जिनमें बच्चे खुद देखें और करें (प्रकृति की सैर, आसान प्रयोग, चर्चा), सिर्फ किताबी पढ़ाई की बजाय।
- बच्चे के आस-पास के माहौल से जोड़ना: अच्छी EVS शिक्षा वह है जो पाठ को बच्चे के अपने घर, समुदाय, आस-पास के पेड़-पौधों और जानवरों से जोड़े।
- सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE): सिर्फ लिखित परीक्षा नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट, चर्चा और अवलोकन के जरिए भी मूल्यांकन करना।
उम्मीदवार अक्सर ये गलतियां करते हैं
- असली NCERT किताब छोड़कर सिर्फ गाइडबुक के सारांश पर भरोसा करना। कई सीधे सवाल ठीक उसी भाषा में पूछे जाते हैं जैसे NCERT में लिखा है, इसलिए मूल किताब पढ़ना जरूरी है।
- EVS की पेडागॉजी को कम महत्व देना: EVS के काफी नंबर पेडागॉजी वाले सवालों से आते हैं, सिर्फ कंटेंट वाले सवालों से नहीं।
- साइंस और सोशल स्टडीज से जुड़ाव को नजरअंदाज करना: चूंकि EVS दोनों को मिलाता है, कुछ सवाल ऐसी सामान्य जानकारी टेस्ट करते हैं जो पेपर 2 के उम्मीदवार अलग से साइंस/सोशल स्टडीज में पढ़ते हैं।
पढ़ाई का एक फोकस्ड तरीका
- कक्षा 3 से 5 तक की NCERT EVS किताबें शुरू से आखिर तक पढ़ें। ये छोटी हैं और यही अच्छे कंटेंट स्कोर पाने का सबसे तेज तरीका है।
- हर थीम के लिए 2-3 पेडागॉजी सिद्धांत (एक्टिविटी आधारित सीखना, माहौल से जुड़ाव, CCE) नोट करें जो उस पर लागू हो सकते हैं। ये अलग-अलग टॉपिक्स में बार-बार दोहराए जाते हैं।
- पिछले सालों के EVS सवाल खासतौर पर हल करें। सवालों का तरीका साल दर साल लगभग नहीं बदलता, इसलिए हाल के पेपर एक भरोसेमंद संकेत हैं कि सवाल कैसे आएंगे।
अगर सही तरीके से तैयारी करें, तो EVS वह सेक्शन बन सकता है जहां आप सबसे कम पढ़ाई में लगभग पूरे नंबर पाने का लक्ष्य रख सकते हैं, बाकी विषयों के मुकाबले।


