सुमेलित कीजिए : (क) श्रुतिकटुत्व दोष – (i) प्रेम शक्ति से चिर निरस्त्र दोष हो जावेगी पाशवता। (ख) क्लिष्टत्व दोष – (ii) कवि के कठिनतर कर्म की दोष संस्कृति दोष करते नहीं हम धृष्टता। पर क्या न विषयोत्कृष्टता करती विचारोत्कृष्टता।। (ग) च्युत दोष – (iii) लचकती कैसी सुघर, मन हर रही यह कमर। (घ) ग्राम्यत्व दोष – (iv) अहि-रिपु-पति-तिय सदन है मुख तेरो रमनीय।। कूट :
सही उत्तर विकल्प 1 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं: 1. श्रुतिकटुत्व दोष (क) – (ii): श्रुतिकटुत्व दोष का अर्थ है वह दोष जो सुनने में कटु या अप्रिय लगता है। विकल्प (ii) "कवि के कठिनतर कर्म की दोष संस्कृति दोष करते नहीं हम धृष्टता। पर क्या न विषयोत्कृष्टता करती विचारोत्कृष्टता।" में शब्दों का संयोजन ऐसा है जो सुनने में कटु प्रतीत होता है, इसलिए यह श्रुतिकटुत्व दोष के…Read More
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