निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिये गये प्रश्नों के सबसे उचित विकल्प चुनिए : महाभारत में कृष्ण से संबद्ध आख्यान भी हैं और प्रसिद्ध काव्य भगवद्गीता भी। गीता के दर्शन के अलावा, इस ग्रंथ में शासन कला और सामान्य रूप से जीवन के नैतिक और आचार संबंधी सिद्धांतों पर जोर दिया गया है। धर्म की इस बुनियाद के बिना न सच्चा सुख मिल सकता है और न समाज में एका रह सकता है। इसका लक्ष्य है लोकमंगल, किसी विशेष वर्ग का नहीं बल्कि पूरे विश्व का। लेकिन धर्म स्वयं सापेक्ष है और सत्य-निष्ठा, अहिंसा आदि जैसे कुछ बुनियादी सिद्धांतों को छोड़कर खुद समय और मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ये सिद्धांत टिकाऊ हैं और अपरिवर्तनशील भी, परंतु इसके अलावा धर्म, जो कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का सम्मिश्रण है, समय के साथ बदलता है। अहिंसा पर यहाँ और दूसरी जगहों पर भी जो बल दिया गया है, वह दिलचस्प है क्योंकि अहिंसा और किसी अच्छे मकसद के लिए संघर्ष करने में प्रत्यक्ष रूप से कोई विरोध नहीं दिखाई पड़ता। पूरे महाकाव्य का केंद्र एक विराट् युद्ध है। धर्म किस प्रकार सापेक्ष है ?
महाभारत के गद्यांश में यह स्पष्ट किया गया है कि धर्म स्वयं सापेक्ष है और सत्य-निष्ठा, अहिंसा आदि जैसे कुछ बुनियादी सिद्धांतों को छोड़कर यह समय और मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसका अर्थ यह है कि धर्म का स्वरूप समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है। इसलिए, विकल्प 3 "यह समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है" सही उत्तर है। अब अन्य विकल्पों की गलतियों को…Read More
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