निर्देश : प्रश्न संख्या के उत्तर दिए गए गद्यांश के आधार पर दीजिए : भारत के नैतिक और बौद्धिक विकास के कार्य में अँगरेज़ी को आवश्यकता से अधिक महत्त्व देना व्यर्थ है। उसका ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा करना भी अनावश्यक है। भारतीयों की शिक्षा के क्रम में अँगरेज़ी केवल विषय और विचार की संवाहिका मात्र हो सकती है, वह हमारी सांस्कृतिक शिक्षा का समुचित माध्यम नहीं बन सकती है। जिस भाषा के माध्यम से जनता को शिक्षित किया जा सकता है, वह भाषा जनता की मातृभाषा ही हो सकती है। अँगरेज़ी नहीं। संस्कृत को मैं उस महान् भांडार के रूप में देखता हूँ, जिससे आधुनिक भाषाएँ शक्ति और सौंदर्य ग्रहण कर पुष्पित-पल्लवित हो रही हैं। उपर्युक्त गद्यांश का समुचित शीर्षक चुनिए :
उपरोक्त गद्यांश का समुचित शीर्षक "मातृभाषा का वैशिष्ट्य" (Option 2) है। इस विकल्प को सही ठहराने के लिए निम्नलिखित कारण प्रस्तुत किए जा सकते हैं: 1. गद्यांश का मुख्य विचार: गद्यांश में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारतीयों की शिक्षा के लिए मातृभाषा ही उपयुक्त माध्यम हो सकती है। यह विचार गद्यांश के केंद्र में है और इसे ही "मातृभाषा का वैशिष्ट्य" कहा जा सकता है। गद्यांश…Read More
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