Question
Easy

निर्देश : प्रश्न संख्या के उत्तर दिए गए गद्यांश के आधार पर दीजिए : भारत के नैतिक और बौद्धिक विकास के कार्य में अँगरेज़ी को आवश्यकता से अधिक महत्त्व देना व्यर्थ है। उसका ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा करना भी अनावश्यक है। भारतीयों की शिक्षा के क्रम में अँगरेज़ी केवल विषय और विचार की संवाहिका मात्र हो सकती है, वह हमारी सांस्कृतिक शिक्षा का समुचित माध्यम नहीं बन सकती है। जिस भाषा के माध्यम से जनता को शिक्षित किया जा सकता है, वह भाषा जनता की मातृभाषा ही हो सकती है। अँगरेज़ी नहीं। संस्कृत को मैं उस महान् भांडार के रूप में देखता हूँ, जिससे आधुनिक भाषाएँ शक्ति और सौंदर्य ग्रहण कर पुष्पित-पल्लवित हो रही हैं। किस भाषा से आधुनिक भाषाएँ शक्ति एवं सौंदर्य को ग्रहण करती हैं ?

1
अँगरेज़ी से
2
हिंदी भाषा से
3
संस्कृत भाषा से
4
मातृभाषा से
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 1
Chapter: रचना कौशल
Topic: अपठित गद्यांश (गद्यांश तथा व्याकरण आधारित)
Correct Answer
Option C
Explanation

गद्यांश के अनुसार, आधुनिक भाषाएँ शक्ति और सौंदर्य को संस्कृत भाषा से ग्रहण करती हैं। यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संस्कृत को एक महान् भांडार के रूप में देखा जाता है, जिससे आधुनिक भाषाएँ शक्ति और सौंदर्य ग्रहण कर पुष्पित-पल्लवित हो रही हैं। इस आधार पर, विकल्प 3 सही उत्तर है। अब हम अन्य विकल्पों को गलत साबित करते हैं: 1. अँगरेज़ी से: गद्यांश में यह स्पष्ट…Read More

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