निर्देश : प्रश्न संख्या के उत्तर दिए गए गद्यांश के आधार पर दीजिए : भारत के नैतिक और बौद्धिक विकास के कार्य में अँगरेज़ी को आवश्यकता से अधिक महत्त्व देना व्यर्थ है। उसका ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा करना भी अनावश्यक है। भारतीयों की शिक्षा के क्रम में अँगरेज़ी केवल विषय और विचार की संवाहिका मात्र हो सकती है, वह हमारी सांस्कृतिक शिक्षा का समुचित माध्यम नहीं बन सकती है। जिस भाषा के माध्यम से जनता को शिक्षित किया जा सकता है, वह भाषा जनता की मातृभाषा ही हो सकती है। अँगरेज़ी नहीं। संस्कृत को मैं उस महान् भांडार के रूप में देखता हूँ, जिससे आधुनिक भाषाएँ शक्ति और सौंदर्य ग्रहण कर पुष्पित-पल्लवित हो रही हैं। गद्यांश में प्रयुक्त शब्दों की व्याकरणिक विवेचना के संदर्भ में असंगत कथन चुनिए :
गद्यांश में दिए गए विकल्पों में से असंगत कथन को चुनने के लिए हमें प्रत्येक विकल्प का व्याकरणिक विश्लेषण करना होगा। 1. नैतिक, बौद्धिक - गुणवाचक विशेषण: यह कथन सही है क्योंकि 'नैतिक' और 'बौद्धिक' दोनों ही शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। ये शब्द किसी व्यक्ति या वस्तु की विशेषता को दर्शाते हैं, जैसे नैतिक व्यक्ति या बौद्धिक क्षमता। 2. आवश्यकता - 'आ' उपसर्ग एवं 'ता' प्रत्यय से निर्मित शब्द: यह…Read More
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