Question
Easy

“जिससे मनुष्य का अज्ञान, कुसंस्कार और अविवेक दूर नहीं होता, जिससे मनुष्य शोषण और अत्याचार के विरुद्ध सिर उठाकर खड़ा नहीं हो जाता, जिससे वह छीना-झपटी, स्वार्थपरता और हिंसा के दलदल से उबर नहीं पाता, वह पुस्तक किसी काम की नहीं।” उक्त उद्धरण किस प्रसिद्ध आलोचक का है ?

1
आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी
2
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
3
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
4
डॉ० नगेन्द्र
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 2
Chapter: आचार्य नंददुलारे वाजपेयी
Topic: आचार्य रामचंद्र शुक्ल
Correct Answer
Option C
Explanation

उक्त उद्धरण आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के एक प्रमुख आलोचक और लेखक थे, जिन्होंने साहित्य के माध्यम से समाज में जागरूकता और परिवर्तन लाने का प्रयास किया। उनके विचारों में साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। इस उद्धरण में उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि साहित्य का असली मूल्य तभी है जब…Read More

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