Question
Easy
"कैसे कहूँ कि मनुष्यता एकदम समाप्त हो गई ! कैसे कहूँ कि लोगों में दया-माया रह ही नहीं गई। जीवन में जाने कितनी ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिन्हें मैं भूल नहीं सकता।" उक्त कथन किस रचनाकार का है ?
1
हजारी प्रसाद द्विवेदी
2
रामदरश मिश्र
3
हरिशंकर परसाई
4
शिवप्रसाद सिंह
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 2
Chapter: रचना कौशल
Topic: जीवन दृष्टि
Correct Answer
Option A
Explanation
उक्त कथन "कैसे कहूँ कि मनुष्यता एकदम समाप्त हो गई ! कैसे कहूँ कि लोगों में दया-माया रह ही नहीं गई। जीवन में जाने कितनी ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिन्हें मैं भूल नहीं सकता।" हजारी प्रसाद द्विवेदी का है। 1. हजारी प्रसाद द्विवेदी (Option 1): हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के एक प्रमुख लेखक और विचारक थे। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं और समाज के प्रति गहरी समझ देखने को…Read More
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