Question
Easy

“इस प्रकार कवि की मर्मभेदी दृष्टि ने इस भाषाहीन प्राणी की करुण दृष्टि के भीतर उस विशाल मानव सत्य को देखा है, जो मनुष्य, मनुष्य के अंदर भी नहीं देख पाता।” आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का यह कथन किस कवि के प्रति है ?

1
सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’
2
महादेवी वर्मा
3
माखनलाल चतुर्वेदी
4
रवीन्द्रनाथ टैगोर
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 2
Chapter: आचार्य आचार्य रामचंद्र शुक्ल
Topic: हिंदी साहित्य का इतिहास
Correct Answer
Option D
Explanation

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का कथन "इस प्रकार कवि की मर्मभेदी दृष्टि ने इस भाषाहीन प्राणी की करुण दृष्टि के भीतर उस विशाल मानव सत्य को देखा है, जो मनुष्य, मनुष्य के अंदर भी नहीं देख पाता।" रवीन्द्रनाथ टैगोर के प्रति है। रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविताएँ और साहित्यिक कृतियाँ मानवता, करुणा और गहन मानवीय संवेदनाओं को व्यक्त करती हैं। टैगोर की रचनाओं में प्रकृति और मानवता के बीच गहरा संबंध…Read More

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