निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :
"जीवन में वही व्यक्ति सफल होता है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में अपनी बुद्धि से काम लेता है और परिश्रम, ईमानदारी तथा विवेक से काम करता है। वह सभी का सम्मान करता है और बड़ों के प्रति अप्रिय शब्द नहीं बोलता। सभी से नम्रता और उदारता का व्यवहार करता है। यही सुमति के गुण हैं। जहाँ सुमति नहीं रहती वहाँ दंभ, अहंकार, क्रोध और अधीरता के दुर्गुणों का साम्राज्य रहता है। सुमति के न रहने से ही तो कुमति आती है। सुमतिहीन लोगों से संपत्ति भी सदैव दूर रहती है और उनका कोई आदर और सम्मान भी नहीं करता। इसी कारण ऐसे लोग विपत्तियों तथा कष्टों से घिरे रहते हैं। इसलिए गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के सुंदरकाण्ड में कहा है - जहाँ सुमति तहँ संपति नाना। जहाँ कुमति तहँ विपति निदाना।।"
उच्चारण स्थान के आधार पर (प, फ, ब, भ, म, उ, ऊ) स्वरयुक्त व्यंजन कहलाते हैं –
उच्चारण स्थान के आधार पर (प, फ, ब, भ, म, उ, ऊ) स्वरयुक्त व्यंजन ओष्ठ्य कहलाते हैं। ओष्ठ्य व्यंजन वे होते हैं जिनका उच्चारण करते समय होंठों का प्रमुख रूप से प्रयोग होता है। 1. ओष्ठ्य (Option 2): - ओष्ठ्य व्यंजनों का उच्चारण करते समय होंठों का उपयोग होता है। 'प', 'फ', 'ब', 'भ', और 'म' ये सभी व्यंजन ओष्ठ्य श्रेणी में आते हैं क्योंकि इनका उच्चारण करते समय होंठों…Read More
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