Question
Easy
त्वयि दृष्टे कुरङ्गाक्ष्याः स्रंसते मदनव्यथा। दृष्टानुदयभाजीन्दौ ग्लानिः कुमुदसंहतेः।। श्लोकेऽस्मिन् कोऽलंकारः ?
1
निदर्शना
2
व्यतिरेकः
3
समासोक्तिः
4
दृष्टान्तः
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 2
Chapter:
Topic:
Correct Answer
Option D
Explanation
यह रहा दिए गए संस्कृत बहुविकल्पीय प्रश्न का विस्तृत हिंदी स्पष्टीकरण: प्रश्न का अर्थ: दिए गए श्लोक का अर्थ है: "त्वयि दृष्टे कुरङ्गाक्ष्याः स्रंसते मदनव्यथा।" - तुम्हें देखने पर मृगनयनी (हिरण जैसी आँखों वाली स्त्री) की कामपीड़ा (प्रेम-जनित व्यथा) दूर हो जाती है। "दृष्टानुदयभाजीन्दौ ग्लानिः कुमुदसंहतेः।।" - उदय न हुए चंद्रमा को देखने पर कुमुदिनियों के समूह को ग्लानि (मुरझाना, दुःख) होती है। प्रश्न पूछ रहा है कि इस श्लोक…Read More
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