Question
Easy
“स्वप्नेऽपि भारतं वर्षं विजयश्रीर्न मुञ्चति। भर्तारं कृच्छ्रकालेऽपि यथा काचित्पतिव्रता।। श्लोकेऽस्मिन् कोऽलंकारः ?
1
उपमा
2
अर्थान्तरन्यास
3
रूपकम्
4
श्लेषः
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 2
Chapter: अलङ्काराः
Topic: अर्थान्तरन्यासः
Correct Answer
Option A
Explanation
निश्चित रूप से, यहाँ दिए गए संस्कृत श्लोक और उसके विकल्पों का विस्तृत हिंदी स्पष्टीकरण प्रस्तुत है: प्रश्न का अर्थ: दिए गए श्लोक "स्वप्नेऽपि भारतं वर्षं विजयश्रीर्न मुञ्चति। भर्तारं कृच्छ्रकालेऽपि यथा काचित्पतिव्रता।।" का अर्थ है: "स्वप्न में भी भारतवर्ष विजयश्री (विजय की देवी) को नहीं छोड़ता है, जैसे कोई पतिव्रता स्त्री कठिन समय में भी अपने पति को नहीं छोड़ती है।" प्रश्न पूछा गया है कि "श्लोकेऽस्मिन् कोऽलंकारः ?" अर्थात्…Read More
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