Question
Easy

जैन आचार्यों ने 'आर्षी' अथवा 'आदिभाषा' किसे माना है ?

1
शौरसेनी
2
मागधी
3
अर्ध-मागधी
4
महाराष्ट्री
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 3
Chapter: आचार्य आचार्य रामचंद्र शुक्ल
Topic: हिंदी साहित्य का इतिहास
Correct Answer
Option C
Explanation

जैन आचार्यों ने 'आर्षी' अथवा 'आदिभाषा' अर्ध-मागधी को माना है, इसके समर्थन में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं: * अर्ध-मागधी का महत्व: अर्ध-मागधी जैन धर्म के आगम साहित्य (canonical texts) की भाषा है। जैन धर्म के अधिकांश महत्वपूर्ण ग्रंथ, जैसे कि आगम सूत्र, अर्ध-मागधी में ही लिखे गए हैं। इस भाषा में तीर्थंकरों के उपदेशों को संकलित किया गया है, इसलिए इसे 'आर्षी' (ऋषियों की भाषा) या 'आदिभाषा' (मूल…Read More

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