Question
Easy

निम्नलिखित में असंगत कथन है :

1
हिंदी के रीतिशास्त्र का आधार संस्कृत काव्यशास्त्र है।
2
हिंदी कवियों में अलंकार, रस और ध्वनि के ही लक्षण और उदाहरण देने का सामान्यतः प्रयत्न देखने को मिलता है।
3
केशव का काव्य प्रवृत्ति की दृष्टि से तो रीतिकाल में आता है किंतु कालक्रम की दृष्टि से नहीं।
4
देव रीतिकाल के प्रमुख अलंकारवादी आचार्य हैं।
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 3
Chapter: काव्यशास्त्र
Topic: काव्य के तत्व
Correct Answer
Option D
Explanation

Option 4 सही है क्योंकि देव, रीतिकाल के प्रमुख अलंकारवादी आचार्य नहीं हैं। देवदत्त (देव) रीतिकाल के महत्वपूर्ण कवियों में से एक हैं, लेकिन उन्हें मुख्य रूप से रसवादी आचार्य माना जाता है। उन्होंने भाव-विलास, रस-विलास, सुजान-विनोद जैसे ग्रंथों की रचना की, जिनमें रस, भाव और श्रृंगार का विस्तृत वर्णन है। अलंकार उनके काव्य में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनकी पहचान एक अलंकारवादी आचार्य के रूप में स्थापित नहीं है, बल्कि…Read More