Question
Easy

“बीसलदेव रासो में शृंगार की ही प्रधानता है, वीर रस का किंचित आभास मात्र है।” उक्त कथन किस आलोचक का है ?

1
रामस्वरूप चतुर्वेदी
2
डॉ० रामचंद्र वर्मा
3
डॉ० बच्चन सिंह
4
आ० रामचंद्र शुक्ल
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 2
Chapter: आचार्य आचार्य रामचंद्र शुक्ल
Topic: हिंदी साहित्य का इतिहास
Correct Answer
Option D
Explanation

सही उत्तर विकल्प 4 है: The correct option is 4: यह प्रसिद्ध कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल का है। उन्होंने अपने कालजयी ग्रंथ हिन्दी साहित्य का इतिहास (1929) में आदिकालीन वीरगाथा काल का विवेचन करते हुए बीसलदेव रासो की प्रकृति को स्पष्ट किया है। शुक्ल जी के अनुसार, यद्यपि इस ग्रंथ का नाम रासो है, किंतु इसमें युद्धों और शौर्य का वह वर्णन नहीं है जो पृथ्वीराज रासो में मिलता है।…Read More

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