निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तरवाले विकल्प को चिह्नित कीजिए: सुप्रसिद्ध गीतकार गोपालदास 'नीरज' ने अपनी एक रचना में कहा है : जैसा हो आघात रे वैसा बजे सितार तेरी ही आवाज़ की प्रतिध्वनि है संसार । हम वाद्ययंत्रों पर जैसा आघात करते हैं वैसी ही ध्वनि उनसे निकलती है । यदि कठोरता से आघात करते हैं तो कठोर ध्वनि उत्पन्न होती है, लेकिन यदि कोमलता से आघात करते हैं तो कर्णप्रिय कोमल ध्वनि उत्पन्न होती है । यदि हम किसी वाद्ययंत्र को नियमपूर्वक ठीक से बजाते हैं तो सही राग उत्पन्न होता है, अन्यथा सही राग उत्पन्न होने का प्रश्न ही नहीं उठता । सही राग उत्पन्न न होने की स्थिति में गुणीजन हमारे गायन अथवा वादन की ओर आकर्षित ही नहीं होंगे । हमारे जीवन रूपी सितार की भी यही स्थिति होती है । यदि हम अनुशासन में रहते हुए प्रत्येक कार्य नियमानुसार करते हैं तो जीवन रूपी सितार से उत्पन्न होने वाला प्रत्येक राग रूपी कार्य हमें सार्थकता और आनंद ही प्रदान करेगा । इस संसार में हम जो कुछ सोचते, कहते अथवा करते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है । न कम, न अधिक । जब हम किसी खंडहर अथवा वाटी में कोई अच्छा शब्द या वाक्य बोलते हैं तो कुछ देर बाद वही अच्छा शब्द या वाक्य गूँजता हुआ हमें सुनाई पड़ता है और यदि हम कोई बुरा, अपमानजनक अथवा घृणास्पद शब्द या वाक्य बोलते हैं तो कुछ देर बाद वही बुरा, अपमानजनक अथवा घृणास्पद शब्द या वाक्य हमें सुनाई पड़ता है । यदि हम सुरीली आवाज़ निकालते हैं तो वैसी ही सुरीली आवाज़ लौटकर हमारे पास आती है, लेकिन यदि हम डरावनी आवाज़ निकालते हैं तो वैसी ही डरावनी आवाज़ लौटकर आती है । हम जैसा एक बार बोलते हैं वैसा ही कई बार सुनने को अभिशप्त होते हैं । पर यह बात अनुभव करते हुए भी इसका आशय हम समझते नहीं । एक ही वाद्ययंत्र से कोमल और कठोर ध्वनि निकलना किस पर निर्भर होता है ?
गद्यांश में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि वाद्ययंत्र से कोमल और कठोर ध्वनि निकलना इस बात पर निर्भर करता है कि हम उस पर हलके या तेज आघात करते हैं। जब हम वाद्ययंत्र पर हलके आघात करते हैं, तो कोमल और कर्णप्रिय ध्वनि उत्पन्न होती है, जबकि तेज आघात करने पर कठोर ध्वनि उत्पन्न होती है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि ध्वनि की कोमलता या कठोरता मुख्य…Read More
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