निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए : आज जब भी कोई गाँव का नाम लेता है तो एक अलग ही छवि उभरती है। वह छवि कहती है कि वहाँ गरीबी है। वहाँ अशिक्षा और अज्ञान है। वहाँ अंध-विश्वास है। गंदगी है। बीमारी है। हमें विचार करना है कि सच क्या है? क्या हमारे गाँव ऐसे ही थे जैसे आज हैं? आज जो गाँवों की दुर्दशा हुई है उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की पड़ताल करते हुए हमें नई समझ बनानी है तथा गाँवों के सही स्वरूप की पहचान करनी है। वैसे यह खुदा का शुक्र है कि गाँवों पर कई तरह के आक्रमण दुष्प्रभावों के बावजूद उनका मूल स्वरूप नहीं बदला है। जो दूरस्थ गाँव है – शहर के प्रदेश से दूर उनकी निजता तो खासी बची हुई है। ऐसी स्थिति में हमारा दायित्व, एक शिक्षित समाज का दायित्व क्या बनता है? हमें विचार करना है। मगर ऐसा कोई भी विचार गाँवों को आँखों से देखे बिना, स्वयं देख कर समझें बिना नहीं किया जा सकता। तो हमें अपनी फर्स्ट हैंड समझ बनाने के लिए गाँव चलना है। अपने मूल स्वरूप में गाँव एक वेधशाला है। एक विद्याशाला है। गाँव वेधशाला या प्रयोगशाला इसलिए है कि ज्ञान को रोज़ वहाँ कर्म की कसौटी पर कसा जाता है। आज़माया जाता है। जो ज्ञान कर्म की कसौटी पर खरा न उतरे तो उसे खारिज कर दिया जाता है। हर ज्ञान के होने की शर्त यह है वह सृजन और उत्पादन की शान पर तराशा जाए। अनुच्छेद के आधार पर कहा जा सकता है कि
अनुच्छेद के आधार पर, सही उत्तर विकल्प 1 है: "गाँव में नकारात्मक परिवर्तन भी हुए हैं।" 1. विकल्प 1 की व्याख्या: अनुच्छेद में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब भी कोई गाँव का नाम लेता है, तो एक छवि उभरती है जिसमें गरीबी, अशिक्षा, अंध-विश्वास, गंदगी और बीमारी का उल्लेख है। यह दर्शाता है कि गाँवों में कुछ नकारात्मक परिवर्तन हुए हैं। इसके अलावा, लेखक ने गाँवों…Read More
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