अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा प्रश्नानानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्य उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत - स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः। स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु।। यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः।। श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।। ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।। स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा। कर्तुंनेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत्।। ईश्वरः कुत्र वर्तते ?
ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। इस श्लोक के अनुसार, ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में निवास करते हैं। इसका अर्थ है कि ईश्वर का स्थान सभी जीवों के हृदय में है, न कि केवल देवताओं या मनुष्यों के हृदय में। इसलिए, विकल्प 1 "सर्वभूतानां हृद्देशे" सही उत्तर है। अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं: 2. सर्वदेवानामेव हृद्देशे: यह विकल्प गलत है क्योंकि यह केवल देवताओं के हृदय में ईश्वर के…Read More
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