Question
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कश्चिद् बालकः कस्मिन्नपि शीर्षके विचारोत्तेजने सत्यपि स्वयमेव कमपि परिच्छेदं लेखितुं न समर्थः । परन्तु स कस्यापि प्रौढजनस्य, सहपाठिनः वा परामर्शेन एतल्लिखितुं समर्थो भवति। एषः परामर्शः कथ्यते _।

1
सोपाननिर्माणम् (Scaffolding)
2
सहपाठि – अध्यापनम् (Peer-teaching)
3
सहपाठि – परामर्शः (Peer-Counselling)
4
समूहे (Team) अध्यापनम्
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: CTET
Level/Paper: CTET_P1
Chapter: Pedagogy of Sanskrit
Topic: Approaches & Evaluation in Sanskrit Teaching
Correct Answer
Option A
Explanation

सोपाननिर्माणम् (Scaffolding) का अर्थ है कि जब कोई बालक किसी विषय में स्वयं विचार करने में सक्षम नहीं होता, तब उसे किसी प्रौढ़जन या सहपाठी के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया में, मार्गदर्शक बालक को आवश्यक सहायता प्रदान करता है ताकि वह धीरे-धीरे अपने दम पर विषय को समझ सके और उस पर विचार कर सके। यह प्रक्रिया बालक के सीखने की क्षमता को बढ़ाती है और उसे…Read More

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