अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा प्रश्नानानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्य उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत - स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः। स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु।। यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः।। श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।। ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।। स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा। कर्तुंनेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत्।। कौन्तेय स्वभावजं कर्म केन कारणेन कर्तुं नेच्छति ?
कौन्तेय स्वभावजं कर्म केन कारणेन कर्तुं नेच्छति ? इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प 2, "मोहात्" है। विस्तृत व्याख्या: 1. मोहात् (Option 2): श्लोक में कहा गया है कि व्यक्ति अपने स्वभावजन्य कर्म को मोह के कारण नहीं करना चाहता। "मोह" का अर्थ है भ्रम या अज्ञानता, जो व्यक्ति को उसके कर्तव्य से विमुख कर देता है। जब व्यक्ति मोह में होता है, तो वह अपने वास्तविक कर्तव्यों और स्वभाव…Read More
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