निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए : देशवासियों सुनो देश को नमन करो देश ही आधार है, प्यार देश से करो । लड़ रहे हो आज क्यों छोटी-छोटी बात पर, देश हित को भूलकर प्रांत, भाषा, जात पर, मिटा के भेदभाव को, देश को सुदृढ़ करो । भ्रष्टाचार की लहर उठ रही नगर-नगर, घोर अंधकार में सूझती नहीं डगर, ज्योति नीति-धर्म की आज तुम प्रखर करो । देश आज रो रहा, देश का रुदन सुनो, बाँट दर्द देश का, मित्र देश के बनो प्रेम के पीयूष से, द्वेष का शमन करो । कविता में नीति-धर्म की ज्योति प्रखर करने के लिए कहा गया है, ताकि
कविता में नीति-धर्म की ज्योति प्रखर करने के लिए कहा गया है ताकि भ्रष्टाचार को दूर किया जा सके। यह उत्तर सही है क्योंकि कविता में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि "भ्रष्टाचार की लहर उठ रही नगर-नगर, घोर अंधकार में सूझती नहीं डगर," जो यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार एक प्रमुख समस्या है जिसे नीति-धर्म की ज्योति प्रखर करके हल किया जा सकता है। अब हम अन्य…Read More
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