निर्देश : अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा तदाधारितप्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चिनुत । शान्तितुल्यं तपो नास्ति न सन्तोषात्परं सुखम् । न तृष्णायाः परो व्याधिर्न च धर्मो दयापरः ॥ 1 ॥ दृष्टिपूतं न्यसेत्पादं वस्त्रपूतं जलं पिबेत् । शास्त्रपूतं वदेद् वाक्यं मनःपूतं समाचरेत् ॥ 2 ॥ तावद् भयाद्धि भेतव्यं यावद् भयमनागतम् । आगतं तु भयं दृष्ट्वा नरः कुर्याद् यथोचितम् ॥ 3 ॥ माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः । न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा ॥ 4 ॥ रूपयौवनसम्पन्ना विशालकुलसम्भवाः । विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः ॥ 5 ॥ कीदृशं जलं पिबेत् ?
श्लोक में जल के पान के संदर्भ में बताया गया है कि "वस्त्रपूतं जलं पिबेत्", जिसका अर्थ है कि हमें ऐसा जल पीना चाहिए जो वस्त्रों की तरह शुद्ध और साफ हो। यह श्लोक शुद्धता और पवित्रता पर जोर देता है, और यह दर्शाता है कि जल का सेवन करते समय उसकी स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है। विकल्प 4 (वस्त्रपूतम्) सही उत्तर है क्योंकि यह जल की शुद्धता को…Read More
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