निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही। सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। तरह-तरह के बदलाव हुए मशीनों के आने से। हमारी पीढ़ी ने तो मशीनों को इंसान से कंप्यूटर के हवाले होते देखा है। परिवर्तन सृष्टि का नियम है। आग की खोज ने जिंदगी बदली तो पहिये के आविष्कार ने सभ्यताओं को जन्म दिया। अभी चैट जी.पी.टी. और बॉर्ड जैसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता/आर्टिफिशल इंटेलिजेंस या ए.आई. आधारित प्लैटफॉर्म आए हैं तो हाहाकार मच रहा है। समझना इतना है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और ह्यूमन इंटेलिजेंस के बीच का सबसे बड़ा फर्क मानवता का है। ए.आई. आने वाले वक्त में जो भी करने वाला है, वह आज के इंसान की सोच का प्रतिबिंब ही होगा। ऐसी आशंकाएँ कि वाइट कॉलर जॉब यानी इंजीनियर, आई.एस., डॉक्टर, वकील, डिज़ाइनर और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स की दुनिया सिमटने वाली है। स्कूल, कॉलेज, एग्जाम, पर्चे, कोचिंग, अस्पताल, लैब और तकनीक से जुड़े हर तबके पर असर पड़ने वाला है। दुनिया भर में करीब तीस करोड़ लोगों की जॉब इससे प्रभावित होने वाली है। चैट जी.पी.टी. और इस जैसे दूसरे ए.आई. प्लेटफॉर्म की खासियत यह है कि आपके हर सवाल का जवाब ये सेकंड्स में दे सकते हैं। युवा विद्यार्थियों ने पढ़ाई में ए.आई. की मदद लेनी शुरू कर दी है। भविष्य की चिंताओं से जुड़े सबसे बड़े सवाल यहीं से पैदा होते नज़र आ रहे हैं। आखिर मैधा और मेधावियों का तय करने वाले इंस्टीट्यूशन अब कैसे होंगे? क्या शिक्षकों का ज्ञान ए.आई. का मुकाबला कर पाएगा? कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण _ प्रभाव पड़ता है :
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण "मेधा" पर प्रभाव पड़ता है, और इसे सही उत्तर के रूप में चुना गया है। आइए इसे विस्तार से समझें: 1. मेधा (Option 1): गद्यांश में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) के आगमन से भविष्य की चिंताओं से जुड़े सबसे बड़े सवाल उत्पन्न हो रहे हैं, जैसे कि मेधा और मेधावियों का निर्धारण करने वाले संस्थान अब कैसे होंगे।…Read More
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