निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चिह्नित कीजिए : हमारे व्यवहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते हैं। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीज़ें हमारी ओर आकर्षित होती है। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मधुर व रंगीन अर्थात् सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा – दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराईयों में स्वयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रूप-स्वरूप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते हैं तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएँगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजे लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम, शिवम्, और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। लेखक द्वारा 'आकर्षण का नियम' किसे कहा गया है ?
लेखक द्वारा 'आकर्षण का नियम' को अच्छे-बुरे स्वभाव के संदर्भ में समझाया गया है, जो कि विकल्प 3 को सही ठहराता है। इस नियम के अनुसार, व्यक्ति का स्वभाव और व्यक्तित्व वैसे ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह एक मनोवैज्ञानिक सिद्धांत है जो बताता है कि लोग समान विचारधारा और स्वभाव वाले व्यक्तियों के साथ अधिक सहज महसूस करते हैं और उनके प्रति आकर्षित होते हैं। अब…Read More
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