Question
Easy

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तरवाले विकल्प चुनिए:
हमारा जीवन जिन मानवीय सिद्धांतों, अनुभवों और सांस्कृतिक संस्कारों के संबल से समस्त सृष्टि के लिए महत्त्वपूर्ण बना है, परोपकार की भावना उन्हीं में एक है । मानव को दूसरे मानव के प्रति वैसा ही संवेदनात्मक उत्तरदायित्व निभाना चाहिए, जैसे वह स्वयं के प्रति निभाता है । जीवन को केवल परोपकार, पर सेवा और निःस्वार्थ प्रेम के लिए ही वास्तविक समझना चाहिए क्योंकि नश्वर शरीर जब नष्ट हो जाएगा तो उसके बाद हमारा कुछ भी इस दुनिया के जीवों की स्मृति में नहीं रहेगा । हम जग जीवों की स्मृति में सदा-सदा के लिए तभी बने रह सकते हैं, जब हम अपने नश्वर शरीर को वैचारिक, बौद्धिक और आत्मिक चेतना से पूर्ण कर निःस्वार्थ भाव से स्वयं को जीव सेवा में समर्पित करेंगे ।
हमें स्थिरता से और शांतिपूर्वक यह विचार करते रहना चाहिए कि हमारे जीवन का सर्वश्रेष्ठ उद्देश्य और एकमात्र लक्ष्य हमारे द्वारा किया जाने वाला त्याग है । त्याग योग्य व्यक्तित्व प्राप्त करने के लिए गहन तप की आवश्यकता है । त्याग का भाव किसी मनुष्य में साधारण होते हुए नहीं जन्म लेता । इसके लिए मनुष्य को जीवन-जगत और इसके जीवों के संबंध में असाधारण वैचारिक रचनात्मकता अपनाकर निरंतर योग, ध्यान, तप व साधना करनी होगी । उसे इस स्थिति से विचरते हुए विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभवों से लैस होना होगा । आवश्यकता होने पर उसे जीवों की वास्तविक सेवा करनी होगी । जब ऐसी विशेष मानवीय परिस्थितियाँ उत्पन्न होंगी, तब ही मानव में त्याग भाव आकार ग्रहण करेगा ।

लोग हमें तभी याद रखेंगे जब हम -

1
नश्वर शरीर को त्याग देंगे ।
2
वास्तविक ज्ञान अर्जित करेंगे ।
3
निःस्वार्थ भाव से सेवा करेंगे ।
4
वैचारिक उन्नति करेंगे ।
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: CTET
Level/Paper: Paper 1
Chapter: रचना कौशल
Topic: अपठित गद्यांश (गद्यांश तथा व्याकरण आधारित)
Correct Answer
Option C
Explanation

लोग हमें तभी याद रखेंगे जब हम निःस्वार्थ भाव से सेवा करेंगे। इस उत्तर को सही ठहराने के लिए गद्यांश में दिए गए विचारों का विश्लेषण करना आवश्यक है। गद्यांश में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जीवन का वास्तविक अर्थ परोपकार, सेवा और निःस्वार्थ प्रेम में निहित है। जब हम अपने नश्वर शरीर को वैचारिक, बौद्धिक और आत्मिक चेतना से पूर्ण कर निःस्वार्थ भाव से जीव सेवा…Read More

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