अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा प्रश्नानानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्य उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत - स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः। स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु।। यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः।। श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।। ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।। स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा। कर्तुंनेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत्।। नरः केन प्रकारेण संसिद्धिं प्राप्नोति ?
प्रश्न में पूछा गया है कि "नरः केन प्रकारेण संसिद्धिं प्राप्नोति?" और सही उत्तर विकल्प 3 है: "स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः"। अब हम इस उत्तर को सही ठहराने के लिए विस्तृत व्याख्या करेंगे और अन्य विकल्पों को गलत साबित करेंगे। ### विकल्प 3: स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः यह विकल्प सही है क्योंकि श्लोक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि व्यक्ति अपने-अपने कर्म में रत होकर ही संसिद्धि प्राप्त करता है।…Read More
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