निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। "भारत 15 अगस्त, 1947 को आजाद हुआ। इस आज़ादी के लिए पूरे देश की जनता ने एक लंबा और मुश्किल संघर्ष चलाया था। इस संघर्ष में समाज के बहुत सारे तबकों की हिस्सेदारी थी। तरह-तरह की पृष्टभूमि के लोगों ने इसमें भाग लिया। वे स्वतंत्रता, समानता तथा निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदारी के विचारों से प्रेरित से प्रेरित थे। औपनिवेशिक शासन के तहत लोग ब्रिटिश सरकार से भयभीत रहते थे। वे सरकार के बहुत सारे फैसलों से असहमत थे। लेकिन अगर वे इन फैसलों की आलोचना करते तो उन्हें भारी खतरों का सामना करना पड़ता था। स्वतंत्रता आंदोलन ने यह स्थिति बदल डाली। राष्ट्रवादी खुलेआम ब्रिटिश सरकार की आलोचना करने लगे और अपनी माँगें पेश करने लगे। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मांग की कि विधायिका में निर्वाचित सदस्य होने चाहिए और उन्हें बजट पर चर्चा करने एवं प्रश्न पूछने का अधिकार मिलना चाहिए। 1909 में बने गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट ने कुछ हद तक निर्वाचित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को मंजूरी दे दी। हालाँकि ब्रिटिश सरकार के अंतर्गत बनाई गई ये शुरुआती विधायिकाएँ राष्ट्रवादियों के बढ़ते जा रहे दबाव के कारण ही बनी थी, लेकिन इनमें भी सभी व्यस्कों को न तो वोट डालने का अधिकार दिया गया था और न ही आम लोग निर्णय प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते थे।" निम्नलिखित में से लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल्य कौन-सा है?
लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल्य समझने के लिए हमें यह देखना होगा कि लोकतंत्र के मूल सिद्धांत क्या हैं। लोकतंत्र एक ऐसी प्रणाली है जिसमें जनता की भागीदारी, स्वतंत्रता, समानता और विचारों की अभिव्यक्ति का विशेष महत्व होता है। आइए अब प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करते हैं: 1. समानता: लोकतंत्र में समानता का अर्थ है कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर प्राप्त होते हैं। यह एक महत्वपूर्ण मूल्य है…Read More
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