निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए : हम श्वास द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करते और कार्बन डाई-ऑक्साइड छोड़ते हैं। ऐसा ही अधिकतर जानवरों, चिड़ियों, रेंगनेवाले जंतुओं, कीड़े-मकोड़ों के द्वारा भी किया जाता है। दूसरी ओर सभी प्रकार की वनस्पतियाँ कार्बन डाई-ऑक्साइड ग्रहण करती और ऑक्सीजन छोड़ती हैं। यदि हवा में लंबे समय तक ऑक्सीजन और कार्बन डाई-ऑक्साइड का अनुपात एक जैसा रहे तब उसका अर्थ होगा कि पेड़ों और प्राणियों का जीवन एक दूसरे के अस्तित्व के मामले में समान स्तर पर आ जायेगा। लेकिन यदि हम कार्बन डाई-ऑक्साइड का अनुपात वातावरण में बढ़ा दें तब प्रकृति के द्वारा लाखों सालों से बनाकर रखा गया संतुलन बदल जायेगा। वातावरण और वनस्पतियाँ कार्बन डाई-ऑक्साइड का लगातार विनिमय करती रहती हैं। वातावरण से वह वनस्पतियों में जाती है। जब वनस्पतियाँ सड़ने लगती हैं तब उनमें से कार्बन डाई-ऑक्साइड निकलकर पुनः वातावरण में समा जाती है। वनस्पतियाँ इस प्रकार कार्बन डाई-ऑक्साइड वसंत और ग्रीष्म ऋतु में ग्रहण करती हैं और जब वे सर्दियों में नष्ट होने लगती हैं तब उसे छोड़ती हैं। इस प्रकार वातावरण में मौजूद कार्बन डाई-ऑक्साइड की मात्रा में मौसम दर मौसम फर्क होता है। ऑक्सीजन ग्रहण करने में अधिकांश जीवधारियों का स्वभाव
ऑक्सीजन ग्रहण करने में अधिकांश जीवधारियों का स्वभाव मानव की तरह है। इसका कारण यह है कि अधिकांश जीवधारी, जिनमें मानव भी शामिल है, ऑक्सीजन का उपयोग अपने शरीर की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करते हैं। यह प्रक्रिया श्वसन के माध्यम से होती है, जिसमें ऑक्सीजन को ग्रहण किया जाता है और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकाला जाता है। 1. मानव से भिन्न है: यह विकल्प गलत…Read More
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