निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए । इस संसार में सब कुछ अस्थायी है । पाप और पुण्य दोनों इस संसार से संबंधित हैं, इसलिए पाप और पुण्य भी अस्थायी हैं । पुण्य सुख देकर और पाप दुःख देकर अंत को प्राप्त होता है । लेकिन पाप और पुण्य में थोड़ा अंतर यह है कि पुण्य का फल यदि हम नहीं चाहते तो उस फल को अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र हैं । पाप लोहे की जंजीर है तो पुण्य सोने की । बंधन दोनों में है । लोहे की जंजीर से छूटने का आदमी का मन भी करता है लेकिन सोने की जंजीर से जो बंधा हुआ हो उसको वह बंधन प्यारा लगने लगता है । उसमें उसको धन नज़र आता है उससे छूटने का मन नहीं करता । पाप और पुण्य दोनों की तुलना क्रमशः _ और _ की जंजीर से की गई है।
गद्यांश में पाप और पुण्य की तुलना क्रमशः लोहे और सोने की जंजीर से की गई है। यह तुलना इस प्रकार की गई है कि पाप को लोहे की जंजीर के रूप में देखा गया है, जो कठोर और भारी होती है, और जिससे व्यक्ति जल्दी से मुक्त होना चाहता है। वहीं, पुण्य को सोने की जंजीर के रूप में देखा गया है, जो आकर्षक और मूल्यवान होती है, और…Read More
Source :
Source :
Source :
Source :