निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : कलम, आज उनकी जय बोल। जला आस्थियां बारी-बारी छिटकाई जिनने चिनगारी, जो चढ़ गए पुण्य वेदी पर लिए बिना गरदन का मोल। कलम, आज उनकी जय बोल। जो अगणित लघु दीप हमारे, तूफानों में एक किनारे, जल-जलकर बुझ गए किसी दिन माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल। कलम, आज उनकी जय बोल। पीकर जिनकी लाल शिखाएँ उगाल रहीं लू-लपट दिशाएँ जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी तक डोल। कलम, आज उनकी जय बोल। पद्यांश में 'सिंहनाद' शब्द से आशय है –
पद्यांश में 'सिंहनाद' शब्द का अर्थ 'ललकार' से है। इस शब्द का प्रयोग यहाँ उन वीरों के साहसिक और चुनौतीपूर्ण आह्वान के संदर्भ में किया गया है जिन्होंने अपने अदम्य साहस और वीरता से धरती को हिला दिया। 'ललकार' का अर्थ है चुनौती देना या किसी को साहसिक कार्य के लिए प्रेरित करना, जो इस संदर्भ में उन वीरों की वीरता और साहस को दर्शाता है। अब हम अन्य विकल्पों…Read More
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