नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : शिक्षा एक सृजनात्मक सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्य है। वह एक तरफ़ मौखिक एवं लिखित सांस्कृतिक परंपरा की वाहक होती है। किंतु दूसरी ओर वह संस्कृति की निर्मात्री भी है। क्योंकि वह प्रचलित संस्कृति में कुछ नया जोड़ती है तथा कुछ पुरानी चीजों को घटाती है या उनका स्वरूप बदलती है। चूँकि कोई भी संस्कृति किसी देशकाल के सापेक्ष होती है, इसलिए शिक्षा सबसे पहले नए युग के लिए नयी संस्कृति विकसित करने का काम करती है। वह समाज में प्रचलित परंपराओं, रीति-रिवाजों को ज़ारी रखने के पहले उनके औचित्य के बारे में सोचने की प्रेरणा भी देती है। सांस्कृतिक कर्म के रूप में शिक्षा को देखने से यह बात स्वतः स्पष्ट हो जाती है कि संस्कृति न तो एकाकी होती है, न उसे बाहरी प्रभाव से रोका जा सकता है और न उसका प्रभाव दूसरे समाज पर पड़ने से बचाया जा सकता है। संस्कृति अपने स्वभाव में आदान-प्रदान की प्रक्रिया है, यह हमेशा प्रगतिशील और ग्रहणशील है। प्रचलित परंपराओं के औचित्य के बारे में सोचने की प्रेरणा कौन देता है ?
प्रश्न: प्रचलित परंपराओं के औचित्य के बारे में सोचने की प्रेरणा कौन देता है? सही उत्तर: विकल्प 2 (शिक्षा) विस्तृत व्याख्या: 1. विकल्प 2: शिक्षा - शिक्षा का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को सोचने, समझने और विश्लेषण करने की क्षमता प्रदान करना है। शिक्षा व्यक्ति को विभिन्न दृष्टिकोणों से चीजों को देखने और उनके औचित्य पर विचार करने की प्रेरणा देती है। यह व्यक्ति को प्रचलित परंपराओं और मान्यताओं पर सवाल…Read More
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