निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । जीवन में कभी अभाव का दुःख, कभी स्वभाव का और कभी दुर्भाव का और इससे भी ऊपर सदैव तनाव का दुःख घेरे रहता है । इन्हीं दुःखों के वशीभूत हम टकराव की ज़िंदगी जीते हुए बिखराव का दुःख भोगते हैं । दुःखों से सभी डरते हैं, क्योंकि दुःख अप्रिय हैं । दुःखों से दूर रहने और सुख पाने की चाह में हम नए-नए पापों में प्रवेश करने लगते हैं । यही हमारी सबसे बड़ी भूल होती है । पाप का फल सुख रोकता है । सुख चाहिए तो पापों से मुक्त होने की चाह जागृत करनी होगी । दुःखों से छुटकारा और सुख प्राप्ति का एकमात्र मार्ग है धर्म को आत्मसात करना । जहाँ धर्म है, वहाँ पाप नहीं है और जब पाप नहीं तो वहाँ दुःख नहीं । जहाँ दुःख नहीं वहाँ सुख को अनंत होने का पूरा अवसर प्राप्त होता है । दुःख हमारी भूल और हमारे मानवीय स्तर से गिरकर घिनौने कर्मों का फल है । समूह से भिन्न शब्द है :
समूह से भिन्न शब्द "पापी" है। इस प्रश्न में दिए गए विकल्पों में से "पापी" शब्द अन्य शब्दों से भिन्न है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं: 1. धर्म: गद्यांश में धर्म को दुःखों से छुटकारा और सुख प्राप्ति का मार्ग बताया गया है। यह एक सकारात्मक और नैतिक अवधारणा है। 2. सुख: सुख वह स्थिति है जिसे प्राप्त करने की इच्छा हर व्यक्ति करता है। गद्यांश में सुख को…Read More
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