निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए । इस संसार में सब कुछ अस्थायी है । पाप और पुण्य दोनों इस संसार से संबंधित हैं, इसलिए पाप और पुण्य भी अस्थायी हैं । पुण्य सुख देकर और पाप दुःख देकर अंत को प्राप्त होता है । लेकिन पाप और पुण्य में थोड़ा अंतर यह है कि पुण्य का फल यदि हम नहीं चाहते तो उस फल को अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र हैं । पाप लोहे की जंजीर है तो पुण्य सोने की । बंधन दोनों में है । लोहे की जंजीर से छूटने का आदमी का मन भी करता है लेकिन सोने की जंजीर से जो बंधा हुआ हो उसको वह बंधन प्यारा लगने लगता है । उसमें उसको धन नज़र आता है उससे छूटने का मन नहीं करता । इस संसार में कुछ भी _ नहीं है ।
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प 3 "स्थायी" है। गद्यांश में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि "इस संसार में सब कुछ अस्थायी है।" इसका अर्थ है कि इस संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है। इसलिए, जब प्रश्न पूछा जाता है कि "इस संसार में कुछ भी _ नहीं है," तो सही उत्तर "स्थायी" होगा, क्योंकि गद्यांश के अनुसार, संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है। अब…Read More
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