निम्नलिखितानि पद्यानि पठित्वा प्रश्नानानाम् उत्तराणि यथोचितं विकल्पं चित्वा देयानि - खलः सर्षपमात्राणि परच्छितद्राणि पश्यति । आत्मनो बिल्वमात्राणि पश्यन्नपि न पश्यति ॥ 1 ॥ सर्पदुर्जनयोर्मध्ये वरं सर्पो न दुर्जनः । सर्पो दशति कालेन दुर्जनस्तु पदे पदे ॥ 2 ॥ चन्दनं शीतलं लोके चन्दनादपि चन्द्रमाः । चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसङ्गतिः ॥ 3 ॥ वृथा वृष्टिः समुद्रेषु वृथा तृप्तस्य भोजनम् । वृथा दानं समर्थस्य वृथा दीपो दिवापि च ॥ 4 ॥ शारदि न वर्षति गर्जति, वर्षति वर्षासु निःस्वनो मेघः । नीचो वदति न कुरुते, न वदति सुजनः करोत्येव ॥ 5 ॥ सर्पदुर्जनयोर्मध्ये किम् वरम् ?
प्रश्न में पूछा गया है कि "सर्पदुर्जनयोर्मध्ये किम् वरम्?" और सही उत्तर विकल्प 2, "सर्पः" है। इस उत्तर को सही ठहराने के लिए निम्नलिखित कारण दिए जा सकते हैं: 1. सर्प और दुर्जन की तुलना: पद्य में कहा गया है कि सर्प और दुर्जन के बीच सर्प बेहतर है क्योंकि सर्प केवल समय-समय पर ही डसता है, जबकि दुर्जन हर कदम पर हानि पहुँचाता है। इसका अर्थ यह है कि…Read More
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