निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और शरीर का उचित तालमेल करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्य-पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गम्भीर चिंतन न दे। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ ? सहृदय, सच्चा परंतु अनपढ़ मजदूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है जो निर्दय और चरित्रहीन है। संसार के सभी वैभव और सुख-साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो। हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्य भी हैं। शिक्षित व्यक्ति को कर्तव्यों का उतना ही ध्यान रखना चाहिए जितना कि अधिकारों का। मनुष्य तभी सुखी कहा जा सकता है, जब
मनुष्य तभी सुखी कहा जा सकता है, जब उसे आत्मिक ज्ञान हो। आत्मिक ज्ञान का अर्थ है आत्मा की गहराइयों को समझना और जीवन के वास्तविक अर्थ को जानना। यह ज्ञान व्यक्ति को आंतरिक शांति और संतोष प्रदान करता है, जो बाहरी सुख-सुविधाओं से परे होता है। आत्मिक ज्ञान से व्यक्ति को यह समझ आती है कि सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और संतुलन में…Read More
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