निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर सबसे उचित विकल्प चुनकर दीजिए : बुद्धिजीवी वह है, जो विचार के माध्यम से सत्य का अन्वेषण करता है। सत्य की अवधारणा सुन्दर है, किन्तु बहुत अमूर्त और द्वेधात्मक भी है ... शायद समस्त सार्वभौमिक अवधारणाओं की तरह वह थोड़ा अस्पष्ट होती है। बुद्धिजीवी यदि अन्य दार्शनिकों और तत्त्ववेत्ताओं से थोड़ा अलग होता है, तो मेरे विचार में इसलिए कि वह सार्वभौमिक और विशिष्ट के बीच नाजुक और मूल्यवान सन्तुलन बनाने का प्रयास करता है...... समाज की हर विशिष्ट समस्या पर विचार करते समय उसके सामने कुछ ऐसे 'मूल्य' होते हैं, जो 'परम और शाश्वत' होते हैं ...... जरूरी नहीं, वह उन्हें परिभाषित करे - किन्तु उनके आलोक में वह अच्छे और बुरे, नैतिक और अनैतिक, सही और गलत का विवेक अर्जित करता है। वह जो है, उसके यथार्थ का तटस्थ ढंग से यथावत् विश्लेषण करता है...... पूर्ण रूप से वस्तुपरक होना उसकी प्राथमिक शर्त है ...... किन्तु यह ही काफी नहीं है। वस्तुपरक तो वैज्ञानिक, समाजशास्त्री, गणितज्ञ भी होते हैं......... यदि बुद्धिजीवी उनसे अलग है, तो इसलिए कि वह जो है, उसका अवलोकन करते समय, जो 'होना चाहिए' उसके बारे में विचार करता है ........और इस तरह एक नैतिक आयाम स्वतः ही उसके बौद्धिक कार्य-कलाप के साथ जुड़ जाता है। बुद्धि के माध्यम से वह आलोचनात्मक चेतना का संवाहक बन जाता है। चेतना का यह तत्व ही है, जो भारतीय परम्परा में बुद्धिजीवी को एक मनीषी का गौरव प्रदान करता है। एक ऐसा व्यक्ति ही मनीषी की मर्यादा को प्राप्त करता है - जिसका विचार तन्त्र मनुष्य का समूचा अस्तित्व हो ..... और यह तभी सम्भव हो सकता है, जब वह अपनी बुद्धि को प्रज्ञा में परिलक्षित कर सकने के योग्य हो - प्रज्ञा वह समझदारी है, जहाँ मनुष्य अपने आत्म में रहकर भी समूची सृष्टि से ...... जिसमें चराचर सब शामिल है, एकात्म स्थापित कर लेता है। 'चराचर' का आशय है
गद्यांश में 'चराचर' शब्द का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है 'सजीव और निर्जीव'। यह शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है और इसका व्यापक अर्थ है कि यह सभी प्रकार के जीवित और निर्जीव वस्तुओं को सम्मिलित करता है। 1. Option 3: सजीव और निर्जीव - यह सही उत्तर है क्योंकि 'चराचर' का पारंपरिक अर्थ सजीव (चर) और निर्जीव (अचर) वस्तुओं का समावेश है। इस संदर्भ में, यह…Read More
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