Question
Easy
व्यभिचारी भाव' के संबंध में असंगत कथन है :
1
ये संचरणशील मनोविकार हैं।
2
ये स्थायी भाव के उपकारक होकर, उन्हें रस दशा तक पहुँचाते हैं।
3
स्थायी भाव से इनका संबंध सागर तथा लहर की भाँति होता है।
4
ये रस की सिद्धि तक स्थिर रहते हैं।
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 2
Chapter: काव्यशास्त्र
Topic: रस
Correct Answer
Option D
Explanation
व्यभिचारी भाव के संबंध में असंगत कथन को समझने के लिए हमें व्यभिचारी भाव की प्रकृति और उनके कार्य को समझना होगा। 1. Option 1: ये संचरणशील मनोविकार हैं। यह कथन सही है क्योंकि व्यभिचारी भाव वास्तव में संचरणशील होते हैं। वे स्थायी भाव के साथ मिलकर उसे रस की स्थिति तक पहुँचाने में सहायक होते हैं। इनका स्वभाव अस्थायी होता है और ये समय-समय पर बदलते रहते हैं। 2.…Read More
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