निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए :
“हिमालय के आँगन में, उसे प्रथम किरणों का दे उपहार । उषा ने हँस अभिनन्दन किया और पहनाया हारक हार । जागो हम, लगे जगाने, विश्वलोक में फैला फिर आलोक । व्योम-तम-पुंज हुआ तब नष्ट, अखिल संसृति हो उठी अशोक । विमल वाणी ने वीणा ली, कमल–कोमल कर में सप्रीत । सप्तस्वर सप्तसिन्धु में उठे, छिड़ा तब मधुर साम संगीत । बचाकर बीज–रूप से सृष्टि, नाव पर झेल प्रलय का शीत ।”
'उषा ने हँस अभिनन्दन किया ।' पंक्ति से अभिप्राय है –
पद्यांश में 'उषा ने हँस अभिनन्दन किया' पंक्ति का अर्थ है कि उषा, जो कि सुबह का समय है, ने अपने सौन्दर्य और प्रकाश से हिमालय का स्वागत किया। इस पंक्ति में उषा के सौन्दर्य और उसके द्वारा फैलाए गए प्रकाश का वर्णन किया गया है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि यह पंक्ति प्रकृति के उषाकालीन रूप सौन्दर्य से संबंधित है। अब हम अन्य विकल्पों को देखते हैं: 1. **धरती…Read More
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