HTET Exam - Level 1 Prt - Samas Evam Muhavare
HTET exam Level 1 Prt preparation with Clear Cutoff
by Clear Cutoff
Showing 20 of 20 questions
Question 1
इनमें से कौन-सा समास-विग्रह सही है ?
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Answer & Explanation
Question 2
ऊसर में बीज बोना' मुहावरे का सही अर्थ है
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Answer & Explanation
Question 3
तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें ।' त्रिलोक सिंह के इस कथन को लेखक ने क्या कहा है ?
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Answer & Explanation
'जबान का चाबुक' त्रिलोक सिंह के कथन को लेखक द्वारा कहे जाने का सबसे उपयुक्त कारण यह है कि यह कथन कठोर और व्यंग्यात्मक है। "तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें" यह वाक्य सीधे तौर पर बच्चे की बुद्धि को कम आंक रहा है और उसे ताना मार रहा है। 'जबान का चाबुक' एक ऐसा मुहावरा है जो कठोर और चुभने वाली बातों को दर्शाता है, जो किसी को मानसिक रूप से आहत कर सकती हैं। त्रिलोक सिंह का कथन ठीक इसी प्रकार का है, इसलिए लेखक ने इसे 'जबान का चाबुक' कहा।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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सर्जन की चमक: 'सर्जन की चमक' का अर्थ है किसी कार्य को कुशलतापूर्वक और निपुणता से करना। त्रिलोक सिंह के कथन में ऐसी कोई कुशलता या निपुणता नहीं है; यह केवल एक कठोर टिप्पणी है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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जबान की धार: 'जबान की धार' का अर्थ है बोलने में तेज होना या वाक्पटु होना। त्रिलोक सिंह का कथन तेज तो है, लेकिन इसका उद्देश्य वाक्पटुता दिखाना नहीं, बल्कि बच्चे को नीचा दिखाना है। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
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जबान की तलवार: 'जबान की तलवार' का अर्थ है ऐसी बातें जो बहुत तीखी और हानिकारक हों। जबकि त्रिलोक सिंह का कथन हानिकारक तो है, 'जबान का चाबुक' अधिक सटीक रूप से उस कठोरता और व्यंग्य को दर्शाता है जो इस कथन में निहित है। 'तलवार' की तुलना में 'चाबुक' अधिक व्यक्तिगत और सीधा प्रहार करता है, जो इस कथन के भाव को बेहतर ढंग से व्यक्त करता है। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
अतः, 'जबान का चाबुक' ही त्रिलोक सिंह के कथन के लिए सबसे उपयुक्त वर्णन है।
Question 4
कहाँ चले तुम राम नाम का 'पीतांबर' तन पर डाले - वाक्य में रेखांकित पद में कौन-सा समास है ?
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Answer & Explanation
'पीतांबर' शब्द में कर्मधारय समास है, क्योंकि:
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कर्मधारय समास की परिभाषा: कर्मधारय समास में एक पद विशेषण होता है और दूसरा पद विशेष्य। विशेषण विशेष्य की विशेषता बताता है।
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'पीतांबर' शब्द का विग्रह: 'पीतांबर' का विग्रह है 'पीत है जो अंबर' अर्थात 'पीला वस्त्र'। यहाँ 'पीत' (पीला) विशेषण है और 'अंबर' (वस्त्र) विशेष्य है। 'पीत' शब्द 'अंबर' की विशेषता बता रहा है कि अंबर कैसा है - पीला है। इसलिए यह कर्मधारय समास का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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बहुव्रीहि समास: बहुव्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि पूरा पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करता है। 'पीतांबर' शब्द किसी तीसरे पद की ओर संकेत नहीं कर रहा है, बल्कि पीले वस्त्र का सामान्य अर्थ दे रहा है। इसलिए यह बहुव्रीहि समास नहीं है।
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द्वन्द्व समास: द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और 'और' या 'तथा' जैसे शब्दों से जुड़े होते हैं। 'पीतांबर' में ऐसा कुछ नहीं है। इसलिए यह द्वन्द्व समास नहीं है।
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तत्पुरुष समास: तत्पुरुष समास में उत्तर पद प्रधान होता है और पूर्व पद किसी कारक चिह्न से जुड़ा होता है। 'पीतांबर' में ऐसा कोई कारक चिह्न नहीं है और न ही उत्तर पद प्रधान है। इसलिए यह तत्पुरुष समास नहीं है।
अतः, 'पीतांबर' शब्द में कर्मधारय समास ही सही उत्तर है क्योंकि यह विशेषण-विशेष्य संबंध को दर्शाता है।
Question 5
निम्नलिखित लेखक मण्डल में किसकी भाषा चुटीली और मुहावरेदार है ?
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इंशाअल्ला खाँ की भाषा चुटीली और मुहावरेदार है, इसका कारण यह है कि उन्होंने अपनी रचनाओं में बोलचाल की भाषा का भरपूर प्रयोग किया। उनकी प्रसिद्ध रचना "रानी केतकी की कहानी" में हास्य और व्यंग्य का पुट है, जो उनकी भाषा को विशेष रूप से चुटीला बनाता है। उन्होंने मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग करके भाषा को जीवंत और आकर्षक बनाया। उनकी भाषा में एक खास तरह की चुलबुलाहट और मस्ती है, जो पाठकों को बांधे रखती है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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सदासुखलाल: सदासुखलाल की भाषा में गंभीरता और पंडिताऊपन अधिक है। उनकी भाषा में तत्सम शब्दों का प्रयोग अधिक होता है, जिसके कारण वह इंशाअल्ला खाँ की तुलना में कम चुटीली और मुहावरेदार है।
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लल्लूलाल: लल्लूलाल की भाषा सरल और सुबोध है, लेकिन उसमें इंशाअल्ला खाँ जैसी चुटीलापन और मुहावरेदारी का अभाव है। उन्होंने "प्रेम सागर" जैसी रचनाओं में सरल भाषा का प्रयोग किया, लेकिन उनकी भाषा में वह व्यंग्य और हास्य नहीं है जो इंशाअल्ला खाँ की भाषा में मिलता है।
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सदल मिश्र: सदल मिश्र की भाषा में पूर्वी बोली का प्रभाव है। उनकी भाषा में सरलता और स्पष्टता है, लेकिन उसमें इंशाअल्ला खाँ जैसी चुटीलापन और मुहावरेदारी नहीं है। उनकी भाषा में स्थानीय शब्दों का प्रयोग अधिक होता है, लेकिन वह इंशाअल्ला खाँ की तरह मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग करके भाषा को विशेष रूप से आकर्षक नहीं बनाते।
इसलिए, इंशाअल्ला खाँ ही वह लेखक हैं जिनकी भाषा चुटीली और मुहावरेदार है।
Question 6
समास-विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प को चुनिए :
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समास-विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प मरणोपरांत - मरने तक है, क्योंकि:
- मरणोपरांत का सही समास-विग्रह मरण के उपरांत (मृत्यु के बाद) होता है। "मरने तक" इसका सही विग्रह नहीं है। "मरने तक" का भाव "आमरण" या "जीवनपर्यंत" जैसे शब्दों में आता है। इसलिए, यह विकल्प असंगत है।
अन्य विकल्प क्यों असंगत नहीं हैं:
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दरहक़ीक़त - हक़ीक़त में: यह समास-विग्रह सही है। "दरहक़ीक़त" का अर्थ "वास्तव में" या "हक़ीक़त में" होता है।
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सानुज - अनुज के साथ: यह समास-विग्रह भी सही है। "सानुज" का अर्थ "अनुज (छोटे भाई) के साथ" होता है।
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अनुरूप - जैसा रूप है वैसा: यह समास-विग्रह भी सही है। "अनुरूप" का अर्थ "रूप के अनुसार" या "जैसा रूप है वैसा" होता है।
इसलिए, केवल मरणोपरांत - मरने तक ही गलत समास-विग्रह है, जो इसे असंगत विकल्प बनाता है।
Question 7
समास की दृष्टि से असंगत को चुनिए :
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रणविमुख - करण तत्पुरुष, समास की दृष्टि से असंगत है क्योंकि 'रणविमुख' का समास विग्रह 'रण से विमुख' होता है। 'से' अपादान कारक का विभक्ति चिह्न है, जो अलग होने या दूर होने का भाव दर्शाता है। इसलिए, यह अपादान तत्पुरुष समास का उदाहरण है, न कि करण तत्पुरुष का। करण तत्पुरुष में 'से' या 'के द्वारा' विभक्ति चिह्न का प्रयोग साधन या माध्यम के अर्थ में होता है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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जातिगत - कर्म तत्पुरुष: 'जातिगत' का समास विग्रह 'जाति को गत' हो सकता है, जहाँ 'को' कर्म कारक का विभक्ति चिह्न है। इसलिए यह कर्म तत्पुरुष समास है।
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वनमानुष - लुप्तपद तत्पुरुष: 'वनमानुष' का समास विग्रह 'वन में रहने वाला मानुष' हो सकता है, जहाँ बीच का पद लुप्त है। इसलिए यह लुप्तपद तत्पुरुष समास है।
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ख़ुशनसीब - कर्मधारय: 'ख़ुशनसीब' का समास विग्रह 'खुश है जो नसीब' हो सकता है, जहाँ विशेषण-विशेष्य संबंध है। इसलिए यह कर्मधारय समास है।
अतः, केवल 'रणविमुख' का समास विग्रह और तत्पुरुष भेद गलत दिया गया है, इसलिए यही असंगत है।
Question 8
तथागति' शब्द में समास है :
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'तथागति' शब्द में अव्ययीभाव समास है, क्योंकि:
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अव्ययीभाव समास की परिभाषा: अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है और वह प्रधान होता है। समस्त पद भी अव्यय की तरह काम करता है।
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'तथागति' का विश्लेषण: 'तथागति' शब्द 'तथा' (अव्यय) और 'गति' के मेल से बना है। यहाँ 'तथा' अव्यय है और इसका अर्थ 'उस प्रकार' या 'वैसी' है। 'तथा' अव्यय 'गति' शब्द के साथ मिलकर पूरे पद को अव्यय बना रहा है, जिसका अर्थ है 'वैसी गति' या 'उसी प्रकार की गति'।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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तत्पुरुष समास: तत्पुरुष समास में दूसरा पद प्रधान होता है और कारक चिह्नों का लोप होता है। 'तथागति' में ऐसा कुछ नहीं है। कारक चिह्नों का लोप नहीं हो रहा है और न ही दूसरा पद प्रधान है।
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द्विगु समास: द्विगु समास में पहला पद संख्यावाची होता है और समूह का बोध कराता है। 'तथागति' में कोई संख्यावाची शब्द नहीं है।
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बहुव्रीहि समास: बहुव्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि समस्त पद किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करता है। 'तथागति' किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत नहीं करता, बल्कि एक विशेष प्रकार की गति को दर्शाता है।
इसलिए, 'तथागति' शब्द में अव्ययीभाव समास ही सही उत्तर है, क्योंकि यह अव्ययीभाव समास की परिभाषा और विशेषताओं को पूरी तरह से संतुष्ट करता है।
Question 9
इनमें से किस लोकोक्ति/मुहावरे का अर्थ उपयुक्त नहीं है ?
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Option 1 सही है क्योंकि लोकोक्ति ‘एक हाथ से ताली नहीं बजती’ का अर्थ ‘असंभव कार्य कर देना’ नहीं होता। इसका सही अर्थ है कि झगड़ा या विवाद कभी भी एक तरफ से नहीं होता, बल्कि दोनों पक्षों की गलती होती है। असंभव कार्य कर देना के लिए उपयुक्त मुहावरा "आसमान से तारे तोड़ना" हो सकता है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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Option 2: ‘नेकी कर दरिया में डाल’ - भला करके भूल जाना चाहिए: यह बिल्कुल सही अर्थ है। इसका मतलब है कि किसी की मदद करने के बाद उसके बारे में सोचना नहीं चाहिए, फल की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
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Option 3: ‘उड़ती चिड़िया पहचानना’ - इशारे से ही गूढ़ बात जान लेना: यह भी सही अर्थ है। इसका मतलब है कि बहुत चतुर और अनुभवी होना, जो छिपी हुई बातों को भी आसानी से समझ ले।
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Option 4: ‘पांव में शनिचर होना’ - एक स्थान पर स्थिर न रहना: यह भी सही अर्थ है। इसका मतलब है कि व्यक्ति का स्वभाव घुमक्कड़ है और वह एक जगह पर टिक कर नहीं रह सकता।
इसलिए, केवल Option 1 में दिया गया अर्थ गलत है, जो इसे सही उत्तर बनाता है।
Question 10
इनमें से किस सामासिक पद में द्वंद्व समास नहीं है ?
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Option 2 सही उत्तर है क्योंकि 'धीरे-धीरे' एक अव्ययीभाव समास है। द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और 'और' या 'तथा' जैसे योजक शब्दों का लोप होता है। 'भाई-बहन', 'पाप-पुण्य', और 'दाल-रोटी' सभी द्वंद्व समास के उदाहरण हैं क्योंकि इनमें दोनों पद प्रधान हैं और उन्हें 'और' से जोड़ा जा सकता है (जैसे, भाई और बहन, पाप और पुण्य, दाल और रोटी)।
'धीरे-धीरे' में, 'धीरे' शब्द की पुनरावृत्ति हो रही है और यह एक क्रियाविशेषण के रूप में कार्य कर रहा है, जो अव्ययीभाव समास की विशेषता है। अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है और समस्त पद भी अव्यय की तरह कार्य करता है। इसलिए, 'धीरे-धीरे' द्वंद्व समास नहीं है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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भाई-बहन: यह द्वंद्व समास है क्योंकि इसमें 'भाई' और 'बहन' दोनों पद प्रधान हैं और 'और' से जुड़े हैं (भाई और बहन)।
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पाप-पुण्य: यह भी द्वंद्व समास है क्योंकि 'पाप' और 'पुण्य' दोनों पद प्रधान हैं और 'और' से जुड़े हैं (पाप और पुण्य)।
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दाल-रोटी: यह द्वंद्व समास है क्योंकि 'दाल' और 'रोटी' दोनों पद प्रधान हैं और 'और' से जुड़े हैं (दाल और रोटी)।
Question 11
किस सामासिक पद का विग्रह सही नहीं है ?
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शोकाकुल = शोक में आकुल - यह विग्रह सही नहीं है क्योंकि 'शोकाकुल' का सही विग्रह 'शोक से आकुल' होना चाहिए। 'में' विभक्ति अधिकरण कारक को दर्शाती है, जो स्थान या समय का बोध कराती है। जबकि 'से' विभक्ति करण कारक को दर्शाती है, जो साधन या माध्यम का बोध कराती है। शोकाकुल होने में शोक एक साधन है, इसलिए 'से' विभक्ति का प्रयोग उचित है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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यथामति = मति के अनुसार - यह विग्रह सही है। 'यथामति' अव्ययीभाव समास का उदाहरण है, जिसका अर्थ है 'मति के अनुसार'।
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देहलता = देह रूपी लता - यह विग्रह सही है। 'देहलता' कर्मधारय समास का उदाहरण है, जिसमें देह को लता के समान बताया गया है।
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प्रयोगशाला = प्रयोग के लिए शाला - यह विग्रह सही है। 'प्रयोगशाला' तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जिसमें 'प्रयोग के लिए शाला' का अर्थ है 'प्रयोग करने के लिए स्थान'।
Question 12
मियाँ की जूती मियाँ के सिर' – लोकोक्ति का उपयुक्त भावार्थ होगा :
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Answer & Explanation
'मियाँ की जूती मियाँ के सिर' लोकोक्ति का उपयुक्त भावार्थ "किसी को उसी की चाल से हराना" है, क्योंकि:
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Option 1 सही क्यों है: यह लोकोक्ति उस स्थिति को दर्शाती है जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ उसी रणनीति या तरीके का उपयोग करता है जो दूसरा व्यक्ति पहले इस्तेमाल कर रहा था, और परिणामस्वरूप उसे हरा देता है। "मियाँ की जूती मियाँ के सिर" का शाब्दिक अर्थ है कि मियाँ की जूती (जो मियाँ की ही है) मियाँ के सिर पर मारना, यानी मियाँ को उसी के सामान से चोट पहुँचाना। यह सीधे तौर पर "किसी को उसी की चाल से हराना" के भाव को व्यक्त करता है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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Option 2 (सीधेपन से काम नहीं चलता): यह लोकोक्ति सीधेपन या चालाकी के बारे में नहीं है, बल्कि यह उस स्थिति के बारे में है जहाँ किसी की अपनी रणनीति उसके खिलाफ इस्तेमाल की जाती है।
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Option 3 (उचित न्याय करना): यह लोकोक्ति न्याय या निष्पक्षता के बारे में नहीं है। यह किसी को हराने या मात देने के बारे में है।
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Option 4 (आश्रयदाता पर ही रोब जमाना): यह लोकोक्ति आश्रयदाता पर रोब जमाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह किसी को उसी के तरीके से हराने के बारे में है। आश्रयदाता और आश्रित का संबंध यहाँ प्रासंगिक नहीं है।
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Question 13
निम्न में से कौन-सा सामासिक-युग्म सुमेलित नहीं है ?
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Option 2 सही है क्योंकि "सहस्राब्दी" शब्द का समास विग्रह "एक हजार वर्षों का समूह" होता है। यह एक संख्यावाची शब्द है और समूह का बोध कराता है, इसलिए यह द्विगु समास का उदाहरण है, न कि कर्मधारय समास का। कर्मधारय समास में विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का संबंध होता है, जो कि "सहस्राब्दी" में नहीं है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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हृषीकेश - बहुव्रीहि समास: "हृषीकेश" का अर्थ है "इंद्रियों के स्वामी" (विष्णु)। यह एक ऐसा शब्द है जो एक विशेष अर्थ रखता है और किसी तीसरे व्यक्ति (विष्णु) की ओर संकेत करता है। बहुव्रीहि समास में, समस्त पद अपने घटकों के अर्थ से भिन्न एक विशेष अर्थ देता है। इसलिए यह विकल्प सही है।
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भाषाधिकार - तत्पुरुष समास: "भाषाधिकार" का समास विग्रह "भाषा का अधिकार" होता है। इसमें 'का' संबंध कारक का लोप हुआ है, जो कि तत्पुरुष समास की विशेषता है। इसलिए यह विकल्प सही है।
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अनुगुण - अव्ययीभाव समास: "अनुगुण" का अर्थ है "गुणों के अनुसार"। इसमें 'अनु' उपसर्ग लगा है, जो कि अव्ययीभाव समास की पहचान है। अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है और समस्त पद भी अव्यय की तरह कार्य करता है। इसलिए यह विकल्प सही है।
इसलिए, केवल Option 2, "सहस्राब्दी - कर्मधारय समास" गलत है, क्योंकि "सहस्राब्दी" द्विगु समास का उदाहरण है।
Question 14
मन चंगा तो कठौती में गंगा' उक्त लोकोक्ति का उचित भावार्थ चुनिए :
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'मन चंगा तो कठौती में गंगा' उक्त लोकोक्ति का उचित भावार्थ मन की शांति एवं पवित्रता ही सर्वानन्द है है, क्योंकि:
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Option 2 सही क्यों है: यह लोकोक्ति इस बात पर जोर देती है कि यदि आपका मन शुद्ध और पवित्र है, तो आपको तीर्थ यात्रा करने या गंगा नदी में स्नान करने की आवश्यकता नहीं है। आपकी आंतरिक शांति और पवित्रता ही सबसे महत्वपूर्ण है और वही आपको आनंद प्रदान करती है। 'कठौती' एक छोटा सा बर्तन होता है, और इस लोकोक्ति में इसका उपयोग यह दर्शाने के लिए किया गया है कि यदि आपका मन शुद्ध है, तो आपको गंगा जैसी पवित्र नदी का अनुभव एक छोटे से बर्तन में भी हो सकता है। यह बाहरी कर्मकांडों की तुलना में आंतरिक शुद्धता के महत्व को दर्शाता है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- Option 1 (सामर्थ्य से अधिक बात करना): यह लोकोक्ति किसी की क्षमता से बढ़कर बोलने के बारे में नहीं है। यह आंतरिक शुद्धता और शांति के महत्व पर केंद्रित है।
- Option 3 (मन निरन्तर अस्थिर रहना): यह लोकोक्ति मन की अस्थिरता के बारे में नहीं है, बल्कि मन की स्थिरता और पवित्रता के बारे में है।
- Option 4 (मजबूर होकर काम करना): यह लोकोक्ति किसी काम को मजबूरी में करने के बारे में नहीं है। यह आंतरिक शांति और पवित्रता के महत्व पर केंद्रित है।
इसलिए, 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' लोकोक्ति का सबसे उपयुक्त भावार्थ मन की शांति एवं पवित्रता ही सर्वानन्द है है।
Question 15
डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना' उक्त मुहावरा किस अर्थ को प्रकट करता है ?
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'डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना' मुहावरे का अर्थ 'बहुमत से अलग रहना' है, क्योंकि:
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Option 1 सही क्यों है: यह मुहावरा उस व्यक्ति या समूह को दर्शाता है जो अपने विचारों, कार्यों या तौर-तरीकों में दूसरों से अलग चलता है। 'डेढ़ चावल की खिचड़ी' का तात्पर्य है कि वह व्यक्ति या समूह एक अलग और संभवतः अपूर्ण या असामान्य तरीके से काम कर रहा है, जो सामान्य बहुमत से भिन्न है। यह अलगाव और असहमति को दर्शाता है।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- Option 2 (किसी का शासन होना): यह मुहावरा किसी के शासन या प्रभुत्व को नहीं दर्शाता है। इसका संबंध व्यक्तिगत या सामूहिक भिन्नता से है, न कि शासन व्यवस्था से।
- Option 3 (आय के अनुसार व्यय): यह मुहावरा वित्तीय प्रबंधन या मितव्ययिता से संबंधित नहीं है। इसका संबंध विचारों और कार्यों में अलगाव से है।
- Option 4 (किसी के वश में होना): यह मुहावरा किसी के नियंत्रण या अधीनता को नहीं दर्शाता है। यह स्वतंत्रता और अलगाव को दर्शाता है, भले ही वह अलगाव असामान्य हो।
इसलिए, 'डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना' मुहावरे का सबसे सटीक अर्थ 'बहुमत से अलग रहना' ही है।
Question 16
समास-विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प का चयन कीजिए :
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समास-विग्रह की दृष्टि से असंगत विकल्प जितेन्द्रिय - जीत को प्राप्त करना है, क्योंकि:
- जितेन्द्रिय का सही समास-विग्रह होगा - इन्द्रियों को जीतने वाला। यहाँ 'जीत को प्राप्त करना' गलत है क्योंकि यह समास के अर्थ को सही ढंग से व्यक्त नहीं करता। जितेन्द्रिय का अर्थ है जिसने अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर ली हो, न कि जिसने किसी 'जीत' को प्राप्त किया हो। इसलिए, यह विकल्प असंगत है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- ध्यानातीत - ध्यान को अतीत करके: यह समास-विग्रह सही है। 'ध्यानातीत' का अर्थ है ध्यान से परे या ध्यान से ऊपर। 'ध्यान को अतीत करके' इस अर्थ को दर्शाता है।
- गृहागत - गृह को आगत: यह समास-विग्रह भी सही है। 'गृहागत' का अर्थ है घर को आया हुआ। 'गृह को आगत' इस अर्थ को दर्शाता है।
- जेबकतरा - जेब को कतरने/काटने वाला: यह समास-विग्रह भी सही है। 'जेबकतरा' का अर्थ है जेब को काटने वाला। 'जेब को कतरने/काटने वाला' इस अर्थ को दर्शाता है।
इसलिए, केवल जितेन्द्रिय - जीत को प्राप्त करना ही गलत समास-विग्रह है, जो इसे असंगत विकल्प बनाता है।
Question 17
सामासिक पदों की दृष्टि से कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
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The correct option is 2:
मंदाग्नि का विग्रह मंद है जो अग्नि होता है। इस शब्द में मंद विशेषण है जो अग्नि की विशेषता बता रहा है। व्याकरण के नियमों के अनुसार जहाँ पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है वहाँ कर्मधारय समास होता है। चूँकि विकल्प में इसे तत्पुरुष समास के साथ जोड़ा गया है जो कि मुख्य रूप से कारक चिन्हों के लोप पर आधारित होता है इसलिए यह युग्म गलत है और प्रश्न के अनुसार सही उत्तर है।
The incorrect option is 1:
हृषीकेश शब्द का निर्माण हृषीक और ईश के मेल से हुआ है जिसका शाब्दिक अर्थ इंद्रियों का स्वामी होता है। यहाँ दोनों पद मिलकर किसी तीसरे विशेष अर्थ अर्थात भगवान विष्णु की ओर संकेत कर रहे हैं। बहुव्रीहि समास की यही पहचान है कि इसमें कोई भी पद प्रधान नहीं होता बल्कि पूरा पद किसी अन्य संज्ञा का विशेषण बन जाता है। यहाँ हृषीकेश भगवान विष्णु का रूढ़ नाम है इसलिए यह बहुव्रीहि समास का सटीक उदाहरण है। यह विकल्प व्याकरणिक दृष्टि से सुमेलित है अतः यह उत्तर नहीं हो सकता।
The incorrect option is 3:
उचितानुचित शब्द उचित और अनुचित दो विपरीतार्थक शब्दों के मेल से बना है। जब इसका विग्रह किया जाता है तो उचित या अनुचित शब्द प्राप्त होता है जो वैकल्पिक द्वन्द्व समास की श्रेणी में आता है। द्वन्द्व समास में पूर्व और उत्तर दोनों ही पद प्रधान होते हैं और प्रायः एक-दूसरे के विलोम होते हैं। यहाँ दोनों शब्दों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व और महत्व है जो इसे द्वन्द्व समास का उत्तम उदाहरण बनाता है। यह सही सुमेलित विकल्प है इसलिए इसे प्रश्न का उत्तर नहीं माना जाएगा।
The incorrect option is 4:
अनुरूप शब्द में अनु एक अव्यय या उपसर्ग है जो रूप शब्द के साथ जुड़ा हुआ है। अव्ययीभाव समास की प्रमुख विशेषता यह है कि इसका पहला पद अव्यय होता है और वही प्रधान होता है। अनुरूप का समास विग्रह रूप के योग्य होता है जहाँ अनु शब्द क्रिया विशेषण की भाँति कार्य करता है। यह शब्द रूप की योग्यता के भाव को प्रकट करता है जो अव्ययीभाव की परिभाषा पर पूर्णतः खरा उतरता है। व्याकरण के अनुसार यह जोड़ा सही है इसलिए प्रश्न की माँग के अनुसार यह उत्तर नहीं है।
Question 18
किस विकल्प में मुहावरे का अर्थ सही नहीं है ?
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दिए गए प्रश्न के अनुसार, सही विकल्प का चयन करना है जिसमें मुहावरे का अर्थ सही नहीं दिया गया है।
सही उत्तर: विकल्प 3
विकल्प 3 की विस्तृत व्याख्या (यह सही क्यों है):
मुहावरा है "डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना"।
इस मुहावरे का सही अर्थ होता है: "अपनी अलग राय रखना", "बहुमत से अलग होकर काम करना", या "अपनी मनमानी करना"। यह किसी के नियंत्रण में न होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने या सोचने का भाव व्यक्त करता है।
विकल्प में दिया गया अर्थ है: "किसी के वश में होना"।
यह अर्थ मुहावरे के वास्तविक अर्थ के बिल्कुल विपरीत है। "किसी के वश में होना" का अर्थ है किसी के नियंत्रण में रहना, जबकि "डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना" का अर्थ है स्वतंत्र रूप से कार्य करना या अपनी अलग राय रखना।
चूँकि दिया गया अर्थ मुहावरे के वास्तविक अर्थ से मेल नहीं खाता, इसलिए यह विकल्प सही है क्योंकि इसमें मुहावरे का अर्थ गलत दिया गया है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या (ये गलत क्यों हैं):
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विकल्प 1: कान खड़े होना – सतर्क होना
- "कान खड़े होना" मुहावरे का अर्थ वास्तव में "सतर्क होना" या "सावधान होना" ही होता है। जब कोई व्यक्ति किसी खतरे या असामान्य स्थिति को भांप लेता है, तो उसके कान खड़े हो जाते हैं।
- चूँकि यहाँ मुहावरे का अर्थ सही दिया गया है, इसलिए यह विकल्प प्रश्न के अनुसार गलत है (क्योंकि प्रश्न गलत अर्थ वाले विकल्प को पूछ रहा है)।
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विकल्प 2: अंधे के हाथ बटेर लगना – बिना प्रयास के कोई चीज पा लेना
- "अंधे के हाथ बटेर लगना" मुहावरे का अर्थ होता है "अचानक या भाग्यवश कोई मूल्यवान वस्तु मिल जाना", या "बिना किसी योग्यता या प्रयास के कोई बड़ी सफलता मिल जाना"।
- विकल्प में दिया गया अर्थ "बिना प्रयास के कोई चीज पा लेना" इस मुहावरे के अर्थ के बिल्कुल अनुरूप है।
- चूँकि यहाँ मुहावरे का अर्थ सही दिया गया है, इसलिए यह विकल्प प्रश्न के अनुसार गलत है।
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विकल्प 4: आठवीं अनुसूची में नवीन भाषाओं को शामिल करने से
- यह कोई मुहावरा नहीं है, बल्कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची से संबंधित एक तथ्यात्मक वाक्यांश है। इसका मुहावरे और उसके अर्थ से कोई संबंध नहीं है।
- इसलिए, यह विकल्प प्रश्न के संदर्भ में अप्रासंगिक है।
अतः, दिए गए विकल्पों में से केवल विकल्प 3 में मुहावरे का अर्थ सही नहीं दिया गया है।
Question 19
समास की दृष्टि से संगत कथन नहीं है, उसे छाँटिए
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Question 20
‘वनवासी’ शब्द में समास है
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Answer & Explanation
The correct option is 3:
'वनवासी' शब्द का समास विग्रह करने पर इसका अर्थ होता है 'वन में वास करने वाला', जिसका शाब्दिक अर्थ है 'जंगल में रहने वाला'। व्याकरणिक रूप से, यदि हम इस विग्रह को 'वन में वास' (अधिकरण तत्पुरुष) के रूप में लेते हैं, तो 'तत्पुरुष' समास होना चाहिए।
हालांकि, 'वनवासी' शब्द का प्रयोग अक्सर किसी विशेष व्यक्ति जैसे तपस्वी, साधु, या राम (वन में वास करने वाले) के लिए एक रूढ़ अर्थ (conventional meaning) में किया जाता है, जो इसका तीसरा अर्थ है। जब किसी सामासिक पद में आए हुए दोनों पद प्रधान न होकर कोई तीसरा पद प्रधान होता है और वह समस्त पद किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करता है, तब वहाँ बहुव्रीहि समास होता है। 'वनवासी' शब्द इस विशिष्ट अर्थ की ओर संकेत करता है, इसलिए परीक्षा के संदर्भ में, यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण माना जाता है।
The incorrect option is 1 (द्विग):
द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक होता है और वह किसी समूह या समाहार का बोध कराता है। उदाहरण के लिए 'चौराहा' (चार राहों का समूह)। 'वनवासी' में पहला पद 'वन' है, जो संख्यावाचक नहीं है, बल्कि एक स्थान को दर्शाता है। इसलिए यह द्विगु समास नहीं है।
The incorrect option is 2 (तत्पुरुष):
तत्पुरुष समास में उत्तर पद (दूसरा पद) प्रधान होता है, और इसमें कारक चिह्नों (जैसे को, से, के लिए, में, पर) का लोप होता है। यदि हम केवल 'वन में वास' (वनवास) के अर्थ पर विचार करें, तो अधिकरण तत्पुरुष समास हो सकता है। किंतु, जब कोई शब्द किसी रूढ़ अर्थ (तीसरे अर्थ) के लिए प्रसिद्ध हो जाता है, तो तत्पुरुष से अधिक प्राथमिकता बहुव्रीहि समास को दी जाती है। 'वनवासी' का प्रचलित अर्थ 'वन में रहने वाला व्यक्ति' किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करता है, इसलिए बहुव्रीहि अधिक सटीक उत्तर है।
The incorrect option is 4 (कर्मधारय):
कर्मधारय समास में पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है, या एक उपमान और दूसरा उपमेय होता है। यह विशेषण-विशेष्य संबंध को दर्शाता है। उदाहरण के लिए 'नीलकमल' (नीला है जो कमल)। 'वनवासी' में विशेषण-विशेष्य का संबंध नहीं है; यह 'वन' और 'वासी' के संबंध को दर्शाता है। इसलिए यह कर्मधारय समास नहीं है।