निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए : देशवासियों सुनो देश को नमन करो देश ही आधार है, प्यार देश से करो । लड़ रहे हो आज क्यों छोटी-छोटी बात पर, देश हित को भूलकर प्रांत, भाषा, जात पर, मिटा के भेदभाव को, देश को सुदृढ़ करो । भ्रष्टाचार की लहर उठ रही नगर-नगर, घोर अंधकार में सूझती नहीं डगर, ज्योति नीति-धर्म की आज तुम प्रखर करो । देश आज रो रहा, देश का रुदन सुनो, बाँट दर्द देश का, मित्र देश के बनो प्रेम के पीयूष से, द्वेष का शमन करो । 'भ्रष्टाचार' का संधि-विच्छेद है –
'भ्रष्टाचार' शब्द का संधि-विच्छेद 'भ्रष्ट + आचार' है। इस संधि-विच्छेद को समझने के लिए हमें 'भ्रष्टाचार' शब्द के अर्थ और संरचना पर ध्यान देना होगा। 1. भ्रष्ट + आचार: 'भ्रष्ट' का अर्थ होता है 'दूषित' या 'खराब', और 'आचार' का अर्थ होता है 'व्यवहार' या 'आचरण'। जब इन दोनों शब्दों को मिलाया जाता है, तो 'भ्रष्टाचार' का अर्थ होता है 'दूषित आचरण' या 'खराब व्यवहार', जो कि भ्रष्टाचार के वास्तविक…Read More
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