Question
Easy

छात्रेण एतद् अवबुध्यते प्रयुज्यते च यत् भाषा तन्त्ररूपेण प्रवर्तते।

1
प्रविधिमूलक-सामर्थ्यम् (Strategic competence)
2
सम्प्रेषणात्मक-सामर्थ्यम् (Communicative competence)
3
तन्त्रपरक-सामर्थ्यम् (Systemic competence)
4
सामाजिक-भाषावैज्ञानिकसामर्थ्यम्
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: CTET
Level/Paper: Paper 2
Chapter: Pedagogy of Sanskrit
Topic: Approaches & Evaluation in Sanskrit Teaching
Correct Answer
Option C
Explanation

सही उत्तर विकल्प 3, अर्थात् "तन्त्रपरक-सामर्थ्यम्" है। तन्त्रपरक-सामर्थ्यम् का अर्थ है भाषा के तंत्र और संरचना को समझना और उसका उपयोग करना। जब छात्र यह समझता है कि भाषा एक तंत्र के रूप में कैसे कार्य करती है, तो वह उसके व्याकरण, शब्दावली, और अन्य भाषाई तत्वों का सही उपयोग कर सकता है। यह ज्ञान उसे भाषा के नियमों और संरचनाओं को समझने में मदद करता है, जिससे वह भाषा…Read More

Similar Questions from CTET Exam - Paper 2 - Year 2024
Question 1
Easy

Source :

CTET 2024
अयमेकः पाठः । इमं पठित्वा अन्वेषयत यत् अयं पाठः केन भाषा-पर्युक्तिना (Language Register) सम्बद्धः अस्ति - सहसा क्रान्तेः पश्चात्, एवंविधः परिवर्तनः सम्भावी प्रतीता। यूरोप-एशिया महादेशसहितं…
Chapter :
Pedagogy of Sanskrit
Topic :
Approaches & Evaluation in Sanskrit Teaching
Question 2
Easy

Source :

CTET 2024
सुभाष, अष्टमकक्षायाः एकः अध्यापकः खेदं प्रकटयति यत् "भाषा-आकलने सामान्यतः, ग्रहण-कौशलानि (Receptive Skills) आपेक्षित माहात्म्यं न दीयते" ग्रहणकौशलेन तस्य कोऽभिप्राय ?
Chapter :
Pedagogy of Sanskrit
Topic :
Approaches & Evaluation in Sanskrit Teaching
Question 3
Easy

Source :

CTET 2024
कोझिकोडक्षेत्रे एकेन विशिष्टसमुदायेन प्रयुक्ता मलयालमभाषा, तस्मिन्नैव स्थाने अन्यैः जनैः प्रयुक्तायाः मलयालमभाषायाः किंचित् भिन्ना वर्तते। विशिष्टसमुदायेन प्रयुक्ता मलयालम किं कथ्यते ?
Chapter :
Pedagogy of Sanskrit
Topic :
Approaches & Evaluation in Sanskrit Teaching
Question 4
Easy

Source :

CTET 2024
छात्रेभ्यः विभिन्नसमूहेषु अधोलिखितं अधिगम कार्यं दत्तम्। अयं शब्दावलिगतिविधिः कथ्यते : अधोलिखितैः शब्दैः सम्बद्धाः शब्दाः सूक्तयः च ज्ञायन्ताम् परिवारः सम्बन्धः भावना
Chapter :
Pedagogy of Sanskrit
Topic :
Approaches & Evaluation in Sanskrit Teaching