निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए :
साकार, दिव्य गौरव विराट !
पौरुष के पुंजीभूत ज्वाल !
मेरी जननी के हिमकिरीट !
मेरे भारत के दिव्य भाल !
मेरे नगपति ! मेरे विशाल !
युग-युग अजेय, निर्बंध, मुक्त,
युग-युग गर्वोन्नत नित महान,
निस्सीम व्योम में तान रहे,
युग से किस महिमा का वितान ?
कैसी अखंड यह चिर समाधि ?
यतिवर ! कैसा यह अमर ध्यान ?
तू महाशून्य में खोज रहा
किस जटिल समस्या का निदान ?
उलझन का कैसा विषम-जाल
मेरे नगपति ! मेरे विशाल !
किस पंक्ति में कहा गया है कि हिमालय शक्ति की ज्वालाओं का ढेर है ?
काव्यांश में "पौरुष के पुंजीभूत ज्वाल" पंक्ति का अर्थ है कि हिमालय शक्ति और ऊर्जा का केंद्र है। "पौरुष" का अर्थ है पुरुषार्थ या शक्ति, और "पुंजीभूत ज्वाल" का अर्थ है ज्वालाओं का ढेर या संचित ऊर्जा। इस प्रकार, यह पंक्ति हिमालय को शक्ति की ज्वालाओं का ढेर बताती है, जो इसे एक शक्तिशाली और ऊर्जावान प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करती है। इसलिए, विकल्प 3 सही उत्तर है। अब…Read More
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