Question
Easy

पठनस्य का अवस्था छात्राणां पूर्वज्ञानेन सह नवीनाधिगृहीतस्य ज्ञानस्य तथा च कक्षायाः बहिः जगतः सम्बन्धस्थापने सहायतां करोति ।

1
पूर्वपठनम् (Pre-reading)
2
मध्येपठनम् (While reading)
3
पठनात् पूर्वम् (Before-reading)
4
पारेपठनम् (Post-reading)
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: CTET
Level/Paper: Paper 2
Chapter: Pedagogy of Sanskrit
Topic: Approaches & Evaluation in Sanskrit Teaching
Correct Answer
Option D
Explanation

पठनस्य पारेपठनम् (Post-reading) अवस्था छात्राणां ज्ञानस्य विकासे अत्यन्त महत्वपूर्ण होती है। इस अवस्था में छात्र पाठ के बाद उस ज्ञान को पुनः समीक्षा करते हैं, जिससे वे अपने पूर्वज्ञान को नवीन जानकारी के साथ जोड़ सकते हैं। यह प्रक्रिया उन्हें पाठ के विषय में गहराई से समझने और बाह्य जगत से संबंध स्थापित करने में सहायता करती है। पारेपठन के दौरान, छात्र अपने द्वारा पढ़े गए विषय पर विचार करते…Read More