The correct option is 2:
The correct option is 2: प्रेरणा से तर्क की ओर
शिक्षण-सूत्र (Teaching Maxims) वे सिद्धांत हैं जो शिक्षकों को प्रभावी ढंग से शिक्षण करने में मार्गदर्शन करते हैं। ये सूत्र सीखने की प्रक्रिया को सरल, सहज और मनोवैज्ञानिक बनाते हैं। "प्रेरणा से तर्क की ओर" कोई स्थापित या मानक शिक्षण-सूत्र नहीं है। शिक्षण में प्रेरणा एक प्रारंभिक चरण या तत्व हो सकती है, और तर्क एक उच्च संज्ञानात्मक कौशल है जिसे विकसित किया जाता है, लेकिन यह स्वयं में 'शिक्षण-सूत्र' के रूप में स्वीकार्य नहीं है। शिक्षण-सूत्रों का निर्माण ज्ञान की प्रकृति और छात्र के मनोवैज्ञानिक विकास को ध्यान में रखकर किया जाता है, जैसे मूर्त से अमूर्त की ओर या ज्ञात से अज्ञात की ओर। प्रेरणा शिक्षण की एक आवश्यक शर्त है, न कि ज्ञान प्रस्तुति का एक सूत्र।
The incorrect option is 1: पूर्ण से अंश की ओर
यह एक स्थापित शिक्षण-सूत्र है जिसका अर्थ है कि छात्रों को पहले विषय वस्तु का समग्र ज्ञान (पूर्ण) दिया जाना चाहिए, और फिर उसके विभिन्न भागों (अंश) का विस्तार से अध्ययन कराया जाना चाहिए। यह गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के सिद्धांत पर आधारित है और विशेष रूप से व्याकरण या संरचनात्मक विषयों को पढ़ाने के लिए उपयोगी है।
The incorrect option is 3: स्थूल से सूक्ष्म की ओर
यह भी एक प्रमुख शिक्षण-सूत्र है जिसे 'मूर्त से अमूर्त की ओर' भी कहा जाता है। इसका अर्थ है कि छात्रों को पहले उन वस्तुओं या विचारों के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए जिन्हें वे छू सकते हैं या देख सकते हैं (स्थूल/मूर्त), और फिर उन्हें उन विचारों या अवधारणाओं (सूक्ष्म/अमूर्त) की ओर ले जाना चाहिए जिन्हें केवल महसूस या समझा जा सकता है। यह बच्चों की प्राथमिक समझ के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
The incorrect option is 4: उपर्युक्त सभी
चूंकि विकल्प 1 और 3 दोनों ही मान्य शिक्षण-सूत्र हैं, इसलिए "उपर्युक्त सभी" गलत हो जाता है, क्योंकि हमें उस विकल्प की पहचान करनी थी जो शिक्षण-सूत्र नहीं है।