HTET परीक्षा - Level 1 PRT - वाक्य रचना
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 1 PRT की तैयारी
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 21
इनमें से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 2 सही नहीं है, क्योंकि अधीनस्थ कार्यालयों को आदेशों/अनुदेशों की सूचना विज्ञप्ति द्वारा नहीं दी जाती है। विज्ञप्ति (Press Release) का उपयोग आमतौर पर सरकार या किसी संगठन द्वारा जनता को सूचना देने के लिए किया जाता है, न कि आंतरिक संचार के लिए। अधीनस्थ कार्यालयों को आदेश और अनुदेश आमतौर पर कार्यालय आदेशों, परिपत्रों (circulars), या ज्ञापनों (memorandums) के माध्यम से दिए जाते हैं। विज्ञप्ति का उद्देश्य मीडिया और जनता को जानकारी देना होता है, जबकि आंतरिक संचार का उद्देश्य संगठन के भीतर सूचना का प्रसार करना होता है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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अधिसूचना को राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है। यह कथन सही है। सरकारी अधिसूचनाएं आधिकारिक तौर पर राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित की जाती हैं ताकि उन्हें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जा सके और कानूनी मान्यता दी जा सके।
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पूर्व-प्रेषित पत्र के संबंध में ध्यान आकर्षित करने वाला पत्र अनुस्मारक कहलाता है। यह कथन भी सही है। अनुस्मारक (Reminder) एक ऐसा पत्र होता है जो पहले भेजे गए पत्र पर ध्यान आकर्षित करने के लिए भेजा जाता है, खासकर जब उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली हो।
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अर्द्ध सरकारी पत्र में उत्तम पुरुष एकवचन का प्रयोग किया जाता है। यह कथन भी सही है। अर्द्ध सरकारी पत्र (Demi-Official letter) अनौपचारिक प्रकृति के होते हैं और आमतौर पर "मैं" (उत्तम पुरुष एकवचन) का प्रयोग करते हैं, क्योंकि ये व्यक्तिगत स्तर पर अधिकारियों के बीच संवाद के लिए होते हैं।
इसलिए, केवल Option 2 गलत है, क्योंकि अधीनस्थ कार्यालयों को आदेशों/अनुदेशों की सूचना विज्ञप्ति द्वारा नहीं दी जाती है।
प्रश्न 22
इनमें से कौन-सा वाक्य शुद्ध है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 2, "मुझे आपसे व्याकरण सीखना है," शुद्ध वाक्य है क्योंकि यह व्याकरणिक रूप से सही है और इसका अर्थ स्पष्ट है। इसमें कर्ता (मुझे), कर्म (व्याकरण), क्रिया (सीखना) और संबंध कारक (आपसे) का सही प्रयोग हुआ है। वाक्य सरल और समझने में आसान है।
अब, अन्य विकल्पों की अशुद्धता का कारण:
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Option 1: प्रत्येक बच्चे को चार-चार पुस्तकें दे दो। इस वाक्य में "चार-चार" का प्रयोग अनावश्यक है। "प्रत्येक बच्चे को चार पुस्तकें दे दो" अधिक सटीक और स्वाभाविक होगा। "चार-चार" का दोहराव वाक्य को अटपटा बना रहा है।
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Option 3: महात्मा गाँधी का देश सदा कृतज्ञ रहेगा। इस वाक्य में "का देश" का प्रयोग उचित नहीं है। सही वाक्य होगा "देश महात्मा गाँधी का सदा कृतज्ञ रहेगा" या "महात्मा गाँधी के प्रति देश सदा कृतज्ञ रहेगा"। वाक्य में शब्द क्रम दोषपूर्ण है।
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Option 4: अभी आठ बजने को बीस मिनट हैं। यह वाक्य व्याकरणिक रूप से गलत है। सही वाक्य होगा "अभी आठ बजने में बीस मिनट हैं"। "को" के स्थान पर "में" का प्रयोग उचित है।
प्रश्न 23
निम्नलिखित में 'विशेषण उपवाक्य' है -
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 3, "जिसे आप ढूँढ रहे हैं, वह मैं नहीं हूँ," is the correct answer because it contains a 'विशेषण उपवाक्य' (visheshan upvakya - adjective clause).
Here's why:
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What is a 'विशेषण उपवाक्य' (Adjective Clause)? An adjective clause is a dependent clause that modifies a noun or pronoun. It functions like an adjective, providing more information about the noun or pronoun it modifies. It typically begins with a relative pronoun (like जो, जिसे, जिसका, जिसने) or a relative adverb (like जब, जहाँ, जैसे).
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Why Option 3 is Correct: In the sentence "जिसे आप ढूँढ रहे हैं, वह मैं नहीं हूँ," the clause "जिसे आप ढूँढ रहे हैं" modifies the pronoun "वह" (he/she/that). It tells us which "वह" is being referred to. Therefore, it functions as an adjective clause, describing the pronoun "वह."
Now, let's explain why the other options are incorrect:
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Option 1: ज्योंही पढ़ने बैठा, कोई आ गया। This sentence contains an adverb clause of time (कालवाचक क्रियाविशेषण उपवाक्य). The clause "ज्योंही पढ़ने बैठा" describes when someone came. It modifies the verb "आ गया" (came), not a noun or pronoun.
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Option 2: जहाँ लहलहाते खेत थे, वहाँ बहुमंजिला भवन बन गए हैं। This sentence contains an adverb clause of place (स्थानवाचक क्रियाविशेषण उपवाक्य). The clause "जहाँ लहलहाते खेत थे" describes where the multi-story buildings were built. It modifies the verb "बन गए हैं" (have been built), not a noun or pronoun.
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Option 4: गुरुजी ने कहा कि वे आज नहीं आएँगे। This sentence contains a noun clause (संज्ञा उपवाक्य). The clause "कि वे आज नहीं आएँगे" functions as the object of the verb "कहा" (said). It acts as a noun, not an adjective. It tells us what the teacher said.
In conclusion, only Option 3 contains a clause that modifies a noun or pronoun, thus functioning as an adjective clause ('विशेषण उपवाक्य'). Therefore, Option 3 is the correct answer.
प्रश्न 24
निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 3, "बालक खाना खाकर और दूध पीकर सो गया," शुद्ध वाक्य है क्योंकि यह व्याकरणिक रूप से सही है और इसका अर्थ स्पष्ट है। क्रियाओं का क्रम सही है - खाना खाना, फिर दूध पीना, और अंत में सोना। वाक्य में कोई अनावश्यक शब्द या दोहराव नहीं है।
अब अन्य विकल्पों की अशुद्धता का कारण:
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हमें सदैव ही सत्य बोलना चाहिए। इस वाक्य में "सदैव" और "ही" दोनों का प्रयोग अनावश्यक है। "सदैव" का अर्थ ही हमेशा होता है, इसलिए "ही" का प्रयोग दोहराव है। शुद्ध वाक्य होगा: "हमें सदैव सत्य बोलना चाहिए" या "हमें सत्य ही बोलना चाहिए।"
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तुम्हारी बात सुनते-सुनते मैं उकता गया हूँ। इस वाक्य में "उकता गया हूँ" की जगह "ऊब गया हूँ" अधिक उपयुक्त होगा। "उकता गया हूँ" गलत नहीं है, लेकिन "ऊब गया हूँ" अधिक सामान्य और स्वाभाविक लगता है। हालांकि, यह अशुद्धि इतनी गंभीर नहीं है कि वाक्य को पूरी तरह से गलत ठहराया जा सके, लेकिन Option 3 की तुलना में यह कम शुद्ध है।
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हमें समस्त प्राणिमात्र का हित सोचना चाहिए। इस वाक्य में "समस्त" और "प्राणिमात्र" दोनों का अर्थ लगभग एक ही है। "प्राणिमात्र" का अर्थ ही सभी प्राणी होता है, इसलिए "समस्त" का प्रयोग अनावश्यक है। शुद्ध वाक्य होगा: "हमें प्राणिमात्र का हित सोचना चाहिए" या "हमें समस्त प्राणियों का हित सोचना चाहिए।"
इसलिए, Option 3 सबसे शुद्ध वाक्य है क्योंकि इसमें कोई व्याकरणिक त्रुटि या अनावश्यक शब्द नहीं हैं।
प्रश्न 25
वाक्य-रचना से संबंधित कौन-सा विवरण सही नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वाक्य-रचना से संबंधित विवरणों में से विकल्प 2 सही नहीं है, क्योंकि द्विकर्मक क्रियाओं वाले वाक्यों में मुख्य कर्म पहले और गौण कर्म बाद में आता है, यह हमेशा सत्य नहीं है। अक्सर गौण कर्म (जिसे दिया जाता है) मुख्य कर्म से पहले आता है, खासकर जब गौण कर्म प्राणीवाचक हो।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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वाक्य में पदक्रम का सामान्य नियम है कि पहले कर्ता, फिर कर्म और अंत में क्रिया रखते हैं। यह कथन सामान्यतः सही है। हिंदी वाक्य रचना में कर्ता-कर्म-क्रिया का क्रम अक्सर देखा जाता है। इसलिए यह विकल्प गलत है क्योंकि प्रश्न में गलत विवरण पूछा गया है।
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जिस वाक्य में मुख्य उद्देश्य और मुख्य विधेय के अतिरिक्त एक या अधिक समापिका क्रियाएँ रहती हैं, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं। यह कथन मिश्र वाक्य की सही परिभाषा है। मिश्र वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं, जिनमें समापिका क्रियाएँ होती हैं। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
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संयुक्त वाक्य के मुख्य वाक्यों को समानाधिकरण उपवाक्य कहते हैं। यह कथन भी सही है। संयुक्त वाक्य दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्यों से मिलकर बनता है, जिन्हें समानाधिकरण उपवाक्य कहा जाता है। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इसलिए, केवल विकल्प 2 ही गलत है, क्योंकि द्विकर्मक वाक्यों में कर्मों का क्रम हमेशा निश्चित नहीं होता और गौण कर्म मुख्य कर्म से पहले आ सकता है।
प्रश्न 26
किस शब्द में अपत्यवाचक 'अ' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
दिए गए विकल्पों में से, 'दौहित्र' शब्द में अपत्यवाचक 'अ' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। इसका स्पष्टीकरण इस प्रकार है:
- दौहित्र: 'दौहित्र' शब्द 'दुहिता' (बेटी) से बना है। 'दुहिता' में 'अ' प्रत्यय लगने से 'दौहित्र' बनता है, जिसका अर्थ होता है 'बेटी का पुत्र' या 'नाती'। इस प्रकार, 'दौहित्र' शब्द अपत्यवाचक है, क्योंकि यह संतान या वंश को दर्शाता है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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आदित्य: 'आदित्य' शब्द 'अदिति' से बना है, जो एक देवी का नाम है। 'आदित्य' का अर्थ है 'अदिति के पुत्र' या 'सूर्य'। हालाँकि यह भी किसी रूप में संबंध दर्शाता है, लेकिन यह सीधे तौर पर अपत्यवाचक 'अ' प्रत्यय के प्रयोग से नहीं बना है, बल्कि 'य' प्रत्यय के प्रयोग से बना है।
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वात्स्यायन: 'वात्स्यायन' शब्द 'वत्स' से संबंधित है, जो एक गोत्र या ऋषि का नाम हो सकता है। 'वात्स्यायन' का अर्थ है 'वत्स के वंशज'। इसमें 'अयन' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है, जो गोत्र या वंश को दर्शाता है, लेकिन यह अपत्यवाचक 'अ' प्रत्यय नहीं है।
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पाथेय: 'पाथेय' शब्द 'पथ' (रास्ता) से बना है। 'पाथेय' का अर्थ है 'रास्ते में ले जाने योग्य' या 'यात्रा के लिए भोजन'। यह शब्द किसी संतान या वंश को नहीं दर्शाता है, इसलिए यह अपत्यवाचक नहीं है। इसमें 'एय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है।
इसलिए, केवल 'दौहित्र' शब्द ही अपत्यवाचक 'अ' प्रत्यय का सही उदाहरण है।
प्रश्न 27
विदेशी भाषा के उपसर्गों से निर्मित शब्द पहचानिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
दरअसल, बेचारा
व्याख्या:
विदेशी भाषा के उपसर्गों से निर्मित शब्द पहचानने हैं।
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दरअसल: यह शब्द 'दर' (फ़ारसी उपसर्ग) + 'असल' से मिलकर बना है। 'दर' का अर्थ है 'में' या 'के भीतर'। इसलिए, 'दरअसल' एक विदेशी उपसर्ग से बना शब्द है।
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बेचारा: यह शब्द 'बे' (फ़ारसी उपसर्ग) + 'चारा' से मिलकर बना है। 'बे' का अर्थ है 'बिना' या 'रहित'। इसलिए, 'बेचारा' भी एक विदेशी उपसर्ग से बना शब्द है।
इसलिए, विकल्प 4 सही है क्योंकि इसमें दोनों शब्द विदेशी उपसर्गों से बने हैं।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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कापथ, कुसंग: 'का' और 'कु' दोनों हिंदी के उपसर्ग हैं। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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औतार, दुबला: 'औ' और 'दु' दोनों हिंदी के उपसर्ग हैं। इसलिए यह विकल्प गलत है।
-
कुलक्षणी, निराकार: 'कु' और 'नि' दोनों हिंदी के उपसर्ग हैं। इसलिए यह विकल्प गलत है।
अतः, केवल विकल्प 4 में दिए गए शब्द विदेशी भाषा के उपसर्गों से निर्मित हैं।
प्रश्न 28
निम्नलिखित शब्दों की शुद्धता पर विचार कीजिए :
(अ) अन्योनाश्रित
(ब) सन्नद्ध
(स) संप्रभुता
(द) पदौन्नति
(य) पर्यवसान
किस विकल्प में सभी शब्द शुद्ध हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 2 सही है क्योंकि इसमें दिए गए तीनों शब्द - सन्नद्ध, संप्रभुता, और पर्यवसान - वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध हैं।
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सन्नद्ध: यह शब्द बिल्कुल सही है और इसका अर्थ होता है 'तैयार' या 'तत्पर'।
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संप्रभुता: यह शब्द भी शुद्ध है और इसका अर्थ होता है 'सर्वोच्च शक्ति' या 'स्वतंत्रता'।
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पर्यवसान: यह शब्द भी वर्तनी के अनुसार सही है और इसका अर्थ होता है 'अंत' या 'परिणाम'।
अब, अन्य विकल्पों की अशुद्धता का कारण:
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Option 1 (अ, ब, य): 'अ' यानी 'अन्योनाश्रित' अशुद्ध है। सही शब्द 'अन्योन्याश्रित' होता है।
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Option 3 (अ, स, द): 'अ' यानी 'अन्योनाश्रित' अशुद्ध है (जैसा कि ऊपर बताया गया है)। 'द' यानी 'पदौन्नति' भी अशुद्ध है। सही शब्द 'पदोन्नति' होता है।
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Option 4 (ब, स, द): 'द' यानी 'पदौन्नति' अशुद्ध है। सही शब्द 'पदोन्नति' होता है।
इसलिए, केवल Option 2 में दिए गए सभी शब्द शुद्ध हैं, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 29
अधिसूचना' के विषय में अंसगत कथन है :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
असंगत कथन है: 2. प्रेषक के स्थान पर उत्तम पुरुष एकवचन का प्रयोग किया जाता है।
व्याख्या:
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विकल्प 2 सही क्यों है: अधिसूचना एक औपचारिक सरकारी संवाद है। इसमें प्रेषक (जारी करने वाला विभाग या अधिकारी) कभी भी उत्तम पुरुष एकवचन (जैसे 'मैं', 'हम') का प्रयोग नहीं करता। अधिसूचना हमेशा तृतीय पुरुष में लिखी जाती है और जारी करने वाले विभाग या अधिकारी के पदनाम का उल्लेख करती है। उदाहरण के लिए, "अध्यक्ष, [विभाग का नाम]" या "सचिव, [मंत्रालय का नाम]" आदि। उत्तम पुरुष एकवचन का प्रयोग व्यक्तिगत पत्रों या अनौपचारिक संवादों में किया जाता है, न कि सरकारी अधिसूचनाओं में।
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अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- विकल्प 1 गलत क्यों है: अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सरकारी नियमों, आदेशों, नीतियों और घोषणाओं को सार्वजनिक करना है। यह कथन अधिसूचना के मूल कार्य को सही ढंग से दर्शाता है।
- विकल्प 3 गलत क्यों है: अधिसूचना का संबंध या तो सर्वसाधारण से होता है (जैसे कोई नई नीति) या विशिष्ट व्यक्तियों/समूहों से (जैसे किसी भर्ती प्रक्रिया की घोषणा)। यह कथन अधिसूचना के लक्षित दर्शकों को सही ढंग से बताता है।
- विकल्प 4 गलत क्यों है: अधिकांश सरकारी अधिसूचनाएं 'राजपत्र' (Gazette) में प्रकाशित की जाती हैं ताकि उन्हें आधिकारिक मान्यता मिले और वे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हों। यह कथन अधिसूचना की वैधता और प्रसार के लिए महत्वपूर्ण है।
इसलिए, केवल विकल्प 2 ही अधिसूचना के विषय में असंगत है क्योंकि इसमें प्रेषक के स्थान पर उत्तम पुरुष एकवचन का प्रयोग नहीं किया जाता।
प्रश्न 30
प्रत्यय की दृष्टि से कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रत्यय की दृष्टि से विकल्प 4, "दाँत + एल = दँतैल" सुमेलित नहीं है, क्योंकि 'दँतैल' शब्द में 'एल' प्रत्यय का प्रयोग सही नहीं है। सही शब्द 'दंत + ऐल = दंतैल' होता है, जहाँ 'ऐल' प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। 'ऐल' प्रत्यय का अर्थ 'से युक्त' या 'वाला' होता है, इसलिए 'दंतैल' का अर्थ 'दाँतों वाला' या 'बड़े दाँतों वाला' होता है।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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कुशा + ल = कुशल: यह विकल्प सही है क्योंकि 'कुशा' शब्द में 'ल' प्रत्यय लगने से 'कुशल' शब्द बनता है, जिसका अर्थ 'निपुण' या 'योग्य' होता है।
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पानी + ईला = पनीला: यह विकल्प भी सही है। 'पानी' शब्द में 'ईला' प्रत्यय लगने से 'पनीला' शब्द बनता है, जिसका अर्थ 'पानी से भरा हुआ' या 'पानी जैसा' होता है।
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नानी + आल = ननिहाल: यह विकल्प भी सही है। 'नानी' शब्द में 'आल' प्रत्यय लगने से 'ननिहाल' शब्द बनता है, जिसका अर्थ 'नानी का घर' होता है।
इसलिए, केवल विकल्प 4 ही गलत है क्योंकि इसमें प्रत्यय का प्रयोग सही नहीं है। 'दँतैल' शब्द में 'एल' नहीं, बल्कि 'ऐल' प्रत्यय का प्रयोग होता है।
प्रश्न 31
निम्न में से कौन-सा शब्द 'ईय' प्रत्यय से निर्मित नहीं है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'शोचनीय' शब्द 'ईय' प्रत्यय से निर्मित नहीं है। इसका विश्लेषण इस प्रकार है:
- शोचनीय: इस शब्द में 'नीय' प्रत्यय लगा है, न कि 'ईय'। इसका मूल शब्द 'शोच' है, जिसमें 'नीय' प्रत्यय लगने से 'शोचनीय' बनता है, जिसका अर्थ है 'शोक करने योग्य'।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
- नारकीय: यह शब्द 'नरक' में 'ईय' प्रत्यय लगने से बना है। 'नरक' (मूल शब्द) + 'ईय' (प्रत्यय) = 'नारकीय' (नरक संबंधी)।
- पाणिनीय: यह शब्द 'पाणिनी' (एक व्यक्ति का नाम) में 'ईय' प्रत्यय लगने से बना है। 'पाणिनी' (मूल शब्द) + 'ईय' (प्रत्यय) = 'पाणिनीय' (पाणिनी से संबंधित)।
- जातीय: यह शब्द 'जाति' में 'ईय' प्रत्यय लगने से बना है। 'जाति' (मूल शब्द) + 'ईय' (प्रत्यय) = 'जातीय' (जाति संबंधी)।
इसलिए, केवल 'शोचनीय' शब्द में 'नीय' प्रत्यय है, जबकि अन्य सभी शब्दों में 'ईय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। अतः, विकल्प 2 सही है।
प्रश्न 32
विदेशी भाषा के उपसर्गों से निर्मित शब्द पहचानिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विदेशी भाषा के उपसर्गों से निर्मित शब्द 'बदबू, खुशबू' हैं, क्योंकि 'बद' और 'खुश' दोनों ही उर्दू/फारसी भाषा के उपसर्ग हैं। 'बद' का अर्थ होता है 'बुरा' और 'खुश' का अर्थ होता है 'अच्छा'। 'बदबू' का अर्थ है 'बुरी गंध' और 'खुशबू' का अर्थ है 'अच्छी गंध'।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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कापथ, अधजल: 'का' और 'अध' दोनों ही हिंदी भाषा के उपसर्ग हैं। 'का' का अर्थ है 'बुरा' या 'हीन' और 'अध' का अर्थ है 'आधा'। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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औतार, दुबला: 'औ' और 'दु' दोनों ही हिंदी भाषा के उपसर्ग हैं। 'औ' का अर्थ है 'हीन' या 'कम' और 'दु' का अर्थ है 'बुरा' या 'कठिन'। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
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कुलक्षणी, चिरायु: 'कु' और 'चिर' दोनों ही संस्कृत भाषा के उपसर्ग हैं। 'कु' का अर्थ है 'बुरा' और 'चिर' का अर्थ है 'लम्बा'। इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
अतः, 'बदबू, खुशबू' ही विदेशी भाषा के उपसर्गों से निर्मित शब्द हैं।
प्रश्न 33
काल के संदर्भ में कौन-सा वाक्य 'हेतुहेतुमद् भूतकाल' का उदाहरण है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
'हेतुहेतुमद् भूतकाल' का उदाहरण वाक्य 3 है: "तुम आते तो मेरा काम बन जाता।"
व्याख्या:
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हेतुहेतुमद् भूतकाल का अर्थ: हेतुहेतुमद् भूतकाल क्रिया का वह रूप है जो भूतकाल में किसी क्रिया के होने पर किसी अन्य क्रिया के होने की संभावना को दर्शाता है, लेकिन वह क्रिया हुई नहीं। इसमें एक क्रिया दूसरी क्रिया पर आश्रित होती है।
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वाक्य 3 का विश्लेषण: "तुम आते तो मेरा काम बन जाता" वाक्य में, 'काम का बनना' क्रिया 'तुम्हारे आने' पर आश्रित है। यदि तुम आते, तो काम बन जाता, लेकिन तुम नहीं आए, इसलिए काम नहीं बना। यह स्पष्ट रूप से हेतुहेतुमद् भूतकाल की परिभाषा को पूरा करता है।
अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
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विकल्प 1: घोड़े के चार पैर और दो कान होते हैं। यह एक सामान्य सत्य (universal truth) है और वर्तमान काल में है। यह भूतकाल की किसी आश्रित क्रिया को नहीं दर्शाता।
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विकल्प 2: इस साल बारिश अच्छी होने की संभावना है। यह भविष्य काल में संभावना व्यक्त करता है। यह भूतकाल की किसी आश्रित क्रिया को नहीं दर्शाता।
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विकल्प 4: आज सभी लड़के थक गए थे। यह सामान्य भूतकाल (past tense) का वाक्य है। यह किसी क्रिया के होने पर किसी अन्य क्रिया के होने की संभावना को नहीं दर्शाता। यह सिर्फ एक भूतकाल की घटना का वर्णन करता है।
इसलिए, केवल विकल्प 3 ही 'हेतुहेतुमद् भूतकाल' का सही उदाहरण है क्योंकि यह भूतकाल में एक क्रिया के होने पर दूसरी क्रिया के होने की संभावना को दर्शाता है, जो कि हुई नहीं।
प्रश्न 34
आलसी होने के कारण उसने अवसर खो दिया।' उक्त सरल वाक्य को संयुक्त वाक्य में रूपान्तरित कीजिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 4, "वह आलसी था; इसलिए उसने अवसर खो दिया," is the correct conversion of the simple sentence "आलसी होने के कारण उसने अवसर खो दिया" into a compound sentence. Here's why:
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Why Option 4 is Correct (Compound Sentence): A compound sentence consists of two or more independent clauses joined by a coordinating conjunction (जैसे कि और, लेकिन, या, इसलिए, आदि). In Option 4, we have two independent clauses: "वह आलसी था" (He was lazy) and "उसने अवसर खो दिया" (He lost the opportunity). These clauses are joined by the coordinating conjunction "इसलिए" (therefore/so). This structure perfectly fits the definition of a compound sentence. The "इसलिए" clearly shows the cause-and-effect relationship implied in the original simple sentence.
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Why Option 1 is Incorrect (Simple Sentence): "आलसी बनकर अवसर खो दिया" (Having become lazy, he lost the opportunity) is a simple sentence. It contains only one independent clause and the phrase "आलसी बनकर" acts as an adverbial phrase modifying the verb "खो दिया". It doesn't have the two independent clauses connected by a coordinating conjunction that are required for a compound sentence.
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Why Option 2 is Incorrect (Simple Sentence): "आलसी बनने पर उसने अवसर खो दिया" (Upon becoming lazy, he lost the opportunity) is also a simple sentence. Similar to Option 1, it has only one independent clause and "आलसी बनने पर" functions as an adverbial phrase. It lacks the structure of a compound sentence.
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Why Option 3 is Incorrect (Complex Sentence): "जैसे ही वह आलसी हुआ, अवसर खो गए" (As soon as he became lazy, the opportunities were lost) is a complex sentence. It contains one independent clause ("अवसर खो गए") and one dependent clause ("जैसे ही वह आलसी हुआ") introduced by the subordinating conjunction "जैसे ही". This structure is characteristic of complex sentences, not compound sentences. The subject of the second clause also changes from "he" to "opportunities," which is a subtle but significant shift in meaning compared to the original sentence.
प्रश्न 35
किस विकल्प में उपसर्ग एवं प्रत्यय दोनों का योग हुआ है ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 1 (पारिवारिक) सही क्यों है:
"पारिवारिक" शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों का योग हुआ है। इसका मूल शब्द "परिवार" है।
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उपसर्ग: इस शब्द में कोई स्पष्ट उपसर्ग नहीं है। हालांकि, कुछ व्याकरणिक दृष्टिकोण से, "परि" को एक प्रकार का अव्यय माना जा सकता है जो "चारों ओर" या "संबंधी" का भाव देता है। लेकिन मुख्य रूप से, इसे उपसर्ग के रूप में नहीं देखा जाता।
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प्रत्यय: "इक" प्रत्यय "परिवार" शब्द के अंत में जुड़कर "पारिवारिक" बनाता है। "इक" प्रत्यय संबंध या विशेषता दर्शाता है (जैसे, परिवार से संबंधित)।
इसलिए, "पारिवारिक" शब्द में "इक" प्रत्यय का स्पष्ट रूप से प्रयोग हुआ है, और "परि" को कुछ हद तक उपसर्ग के रूप में माना जा सकता है, जिससे यह उपसर्ग और प्रत्यय दोनों के योग का उदाहरण बनता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
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Option 2 (रासायनिक): "रासायनिक" शब्द में "रसायन" मूल शब्द है और "इक" प्रत्यय लगा है। इसमें कोई उपसर्ग नहीं है।
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Option 3 (काल्पनिक): "काल्पनिक" शब्द में "कल्पना" मूल शब्द है और "इक" प्रत्यय लगा है। इसमें कोई उपसर्ग नहीं है।
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Option 4 (पाशविक): "पाशविक" शब्द में "पशु" मूल शब्द है और "इक" प्रत्यय लगा है। इसमें कोई उपसर्ग नहीं है।
अतः, केवल "पारिवारिक" शब्द में ही उपसर्ग (परि, हालांकि विवादास्पद) और प्रत्यय (इक) दोनों का योग हुआ है। इसलिए Option 1 सही है।
प्रश्न 36
वर्तनी की दृष्टि से अशुद्ध शब्द का चयन कीजिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
वर्तनी की दृष्टि से 'रचनावलि' अशुद्ध है क्योंकि इसका शुद्ध रूप 'रचनावली' होता है। 'रचनावलि' में 'ल' पर छोटी इ की मात्रा का प्रयोग गलत है, जबकि 'रचनावली' में 'ल' पर बड़ी ई की मात्रा का प्रयोग सही है।
अन्य विकल्प इसलिए गलत हैं:
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घ्राणेन्द्रिय: यह शब्द वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है। इसका अर्थ है 'सूंघने की इंद्रिय'।
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गार्हस्थ्य: यह शब्द भी वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है। इसका अर्थ है 'गृहस्थ जीवन'।
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दौर्बल्य: यह शब्द भी वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है। इसका अर्थ है 'कमजोरी'।
इसलिए, केवल 'रचनावलि' ही अशुद्ध है, जिसका शुद्ध रूप 'रचनावली' है।
प्रश्न 37
किस विकल्प के सभी शब्द शुद्ध हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
Option 4 के सभी शब्द शुद्ध हैं, इसलिए यह सही उत्तर है। यहाँ इसका विस्तृत स्पष्टीकरण दिया गया है:
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विवाहेतर: यह शब्द "विवाह" और "इतर" से मिलकर बना है और इसका अर्थ है "विवाह के अतिरिक्त" या "विवाह से बाहर"। वर्तनी के अनुसार यह शब्द बिल्कुल सही है।
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अमचूर: यह शब्द सूखे आम के पाउडर को दर्शाता है और यह भी वर्तनी के अनुसार शुद्ध है।
अब अन्य विकल्पों की अशुद्धियाँ:
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Option 1: वशिष्ठ, उर्ध्वगामी - "वशिष्ठ" सही है, लेकिन "उर्ध्वगामी" में 'र्ध्व' की जगह 'र्ध्व' होना चाहिए। सही शब्द "ऊर्ध्वगामी" है।
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Option 2: गिरधर, अंतर्ध्यान - "गिरधर" सही है, लेकिन "अंतर्ध्यान" गलत है। सही शब्द "अन्तर्धान" है।
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Option 3: जुखाम, चिंगारी - "जुखाम" सही है, लेकिन "चिंगारी" में 'ई' की मात्रा छोटी होनी चाहिए। सही शब्द "चिनगारी" है।
इसलिए, केवल Option 4 में दिए गए दोनों शब्द शुद्ध हैं।
प्रश्न 38
किस विकल्प के सभी शब्द वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध हैं ?
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
The correct option is 4:
विकल्प 4 में दिए गए दोनों शब्द 'मनोचिकित्सा' और 'रचनावलि' वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध माने गए हैं। 'मनोचिकित्सा' शब्द विसर्ग संधि के नियमानुसार 'मनः + चिकित्सा' के योग से बना है, जहाँ विसर्ग का 'ओ' में परिवर्तन हिंदी के प्रचलित व्याकरणिक प्रयोगों में व्यापक रूप से स्वीकार्य है, जो मानसिक विकारों के उपचार की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है। वहीं 'रचनावलि' शब्द 'रचना + आवलि' के मेल से बना है। हिंदी और संस्कृत शब्दावली में 'आवलि' (पंक्ति या संग्रह) शब्द का प्रयोग इकारान्त (छोटी इ) के रूप में भी मानक माना जाता है, जो रचनाओं के व्यवस्थित संग्रह को सही रूप में दर्शाता है। विद्यार्थियों को ध्यान देना चाहिए कि परीक्षा में मानक वर्तनी के सूक्ष्म नियमों के आधार पर ही ऐसे विकल्पों का चयन किया जाता है।
The incorrect option is 1:
इस विकल्प के दोनों शब्द अशुद्ध हैं, जो संधि और रेफ के नियमों का उल्लंघन करते हैं। 'गत्यावरोध' शब्द यण संधि के नियम (गति + अवरोध) के अनुसार गलत है; इसका शुद्ध रूप 'गत्यवरोध' होना चाहिए क्योंकि 'इ' और 'अ' के मेल से 'य' बनता है, 'या' नहीं। दूसरा शब्द 'आशिर्वाद' भी गलत है क्योंकि इसमें 'र' (रेफ) का स्थान अनुचित है। शुद्ध शब्द 'आशीर्वाद' होता है, जहाँ 'र' का उच्चारण 'शी' के बाद होता है, इसलिए इसे अगले वर्ण 'व' के ऊपर लगाया जाता है। इन गंभीर व्याकरणिक त्रुटियों के कारण यह विकल्प चयन योग्य नहीं है।
The incorrect option is 2:
इस विकल्प में 'ज्योत्स्ना' शब्द की वर्तनी प्रायः भ्रम पैदा करती है, जो इसे अशुद्ध बना सकती है। मानक हिंदी वर्तनी के अनुसार 'ज्योत्स्ना' शब्द में 'त्' और 'स्' दोनों ही अर्ध-वर्ण (आधे) होने चाहिए। यदि इनमें से किसी भी वर्ण को पूर्ण रूप में लिखा जाए, तो वह शब्द अशुद्ध माना जाता है। यद्यपि 'शूर्पणखा' सही हो सकता है, परंतु प्रतियोगी परीक्षाओं में यदि एक भी शब्द अशुद्ध है, तो पूरा विकल्प गलत हो जाता है। अतः वर्तनी की पूर्ण शुद्धता न होने के कारण इसे सही नहीं माना गया है।
The incorrect option is 3:
विकल्प 3 में दी गई दोनों वर्तनियाँ अशुद्ध हैं और सामान्य लेखन की अशुद्धियों को दर्शाती हैं। 'दवाईयाँ' शब्द गलत है क्योंकि व्याकरण के नियमानुसार जब 'ई' पर समाप्त होने वाले शब्दों का बहुवचन बनाया जाता है, तो दीर्घ 'ई' लघु 'इ' में बदल जाती है; अतः शुद्ध रूप 'दवाइयाँ' होगा। इसी प्रकार 'दुरावस्था' शब्द भी अशुद्ध है क्योंकि यह 'दुर' उपसर्ग और 'अवस्था' के मेल से बनता है, जिससे 'दुरवस्था' शब्द निर्मित होता है। यहाँ 'रा' में आ की मात्रा का प्रयोग अनावश्यक और अशुद्ध है। इन स्पष्ट मात्रात्मक त्रुटियों के कारण यह विकल्प गलत है।
प्रश्न 39
किस विकल्प के सभी शब्द वार्तनिक दृष्टि से शुद्ध हैं ?
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उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 2 है:
इस विकल्प में दिए गए दोनों शब्द 'शूर्पणखा' और 'ज्योत्स्ना' वार्तनिक रूप से पूरी तरह शुद्ध हैं। 'शूर्पणखा' संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ 'सूप के समान नाखूनों वाली' होता है, जिसमें 'ण' का प्रयोग व्याकरण के नियमों के अनुसार सही है। इसी प्रकार 'ज्योत्स्ना' शब्द में 'त' और 'स' दोनों वर्ण आधे प्रयुक्त होते हैं, जो प्रकाश या चाँदनी का बोध कराते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में ये शब्द अक्सर पूछे जाते हैं क्योंकि इनके वर्णों की बनावट में सामान्यतः अशुद्धि की संभावना अधिक रहती है।
विकल्प 1 अशुद्ध है:
इस विकल्प में 'गत्यावरोध' तो शुद्ध है (गति + अवरोध), लेकिन 'आशिर्वाद' शब्द अशुद्ध लिखा गया है। हिंदी व्याकरण के अनुसार, आशीर्वाद की सही वर्तनी 'आशीर्वाद' होती है। यहाँ 'र' (रेफ) का प्रयोग 'व' के ऊपर होना चाहिए क्योंकि उसका उच्चारण 'शी' के बाद हो रहा है। विद्यार्थी अक्सर 'र' की मात्रा को 'शि' पर लगा देते हैं, जो कि गलत है। अतः एक शब्द के अशुद्ध होने से यह विकल्प गलत हो जाता है।
विकल्प 3 अशुद्ध है:
यहाँ 'दवाईयाँ' और 'दुरावस्था' दोनों ही शब्द व्याकरणिक रूप से त्रुटिपूर्ण हैं। नियम के अनुसार, जब 'ई' अंत वाले शब्दों का बहुवचन बनाया जाता है, तो बड़ी 'ई' छोटी 'इ' में बदल जाती है, इसलिए शुद्ध शब्द 'दवाइयाँ' होगा। वहीं, 'दुरावस्था' शब्द में 'दुर' उपसर्ग के साथ 'अवस्था' जुड़ने पर 'दुरवस्था' बनता है न कि दुरावस्था। यहाँ 'र' में आ की मात्रा का प्रयोग अनावश्यक और अशुद्ध है। इन बारीक नियमों की अनदेखी के कारण छात्र यहाँ गलती कर बैठते हैं।
विकल्प 4 अशुद्ध है:
इस विकल्प में 'मनोचिकित्सा' तो सही है, परंतु 'रचनावलि' शब्द अशुद्ध है। 'रचना' और 'अवलि' (पंक्ति) के योग से दीर्घ संधि होकर शुद्ध शब्द 'रचनावली' बनता है, जिसमें अंत में बड़ी 'ई' की मात्रा आती है। छोटी 'इ' का प्रयोग इसे वर्तनी की दृष्टि से अमान्य बना देता है। चूँकि प्रश्न में सभी शब्दों के शुद्ध होने की शर्त है, इसलिए 'रचनावलि' की अशुद्धि के कारण यह विकल्प सही नहीं माना जा सकता। हमेशा याद रखें कि शब्दों के संधि विच्छेद से उनकी सही वर्तनी पहचानी जा सकती है।
प्रश्न 40
प्रत्यय की दृष्टि से कौन-सा विकल्प असंगत है ?
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उत्तर और व्याख्या
सही विकल्प 4 है:
विकल्प 4 "नोका + ईला = नुकीला" प्रत्यय की दृष्टि से असंगत है क्योंकि इसमें मूल शब्द की वर्तनी अशुद्ध दी गई है। "नुकीला" शब्द का निर्माण "नोक" (Point) शब्द में "ईला" प्रत्यय जोड़ने से होता है, न कि "नोका" से। हिंदी व्याकरण के नियमानुसार, जब किसी संज्ञा शब्द में प्रत्यय जुड़ता है, तो वह विशेषण का रूप ले लेता है, जैसे नोक से नुकीला। यहाँ "नोका" शब्द का प्रयोग करना तार्किक और व्याकरणिक रूप से त्रुटिपूर्ण है, जिसके कारण यह संयोजन गलत सिद्ध होता है।
विकल्प 1 "कृतिका + एय = कार्तिकेय" पूर्णतः सही है। यह एक अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय का उदाहरण है, जहाँ 'कृतिका' मूल शब्द में 'एय' प्रत्यय लगने पर आदि स्वर 'ऋ' का 'आर' में परिवर्तन हो जाता है, जिससे कार्तिकेय शब्द बनता है।
विकल्प 2 "संस्कृति + आयन = सांस्कृत्यायन" भी व्याकरण सम्मत है। 'आयन' प्रत्यय जुड़ने पर शब्द के प्रथम स्वर 'अ' की वृद्धि 'आ' में हो जाती है और अंत में यण संधि के नियमानुसार 'इ' का 'य्' होकर सांस्कृत्यायन रूप सिद्ध होता है।
विकल्प 3 "विदेह + ई = वैदेही" एक शुद्ध स्त्रीप्रत्यय का उदाहरण है। यहाँ 'विदेह' शब्द में 'ई' प्रत्यय जोड़ने पर आदि स्वर 'इ' की वृद्धि 'ऐ' में हो जाती है, जो जनक नंदिनी सीता के लिए प्रयुक्त एक सार्थक विशेषण निर्मित करता है।