HTET परीक्षा - Level 1 PRT - वाक्य रचना
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 1 PRT की तैयारी
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20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 141
किस विकल्प में उनतावाचक तद्धित प्रत्यय है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1 "बहूटी" को उनतावाचक तद्धित प्रत्यय के रूप में सही उत्तर माना गया है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
- बहूटी: "बहूटी" शब्द में "बहू" से "बहूटी" बनने की प्रक्रिया में तद्धित प्रत्यय का प्रयोग होता है। यह शब्द किसी विशेषता या गुण को दर्शाता है जो "बहू" से संबंधित है। इस प्रकार, यह उनतावाचक तद्धित प्रत्यय का उदाहरण है, जो किसी विशेषता या गुण को व्यक्त करता है।
अब अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं:
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बहिनापा: "बहिनापा" में "बहिन" से "बहिनापा" बनने की प्रक्रिया में तद्धित प्रत्यय का प्रयोग होता है, लेकिन यह संबंध या स्थिति को दर्शाता है, न कि विशेषता को। इसलिए, यह उनतावाचक तद्धित प्रत्यय का उदाहरण नहीं है।
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दूधैल: "दूधैल" शब्द में "दूध" से "दूधैल" बनने की प्रक्रिया में तद्धित प्रत्यय का प्रयोग होता है, जो किसी विशेषता को दर्शाता है, लेकिन यह विशेषता दूध से संबंधित है और इसे उनतावाचक तद्धित प्रत्यय के रूप में नहीं देखा जाता।
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चुड़िहारा: "चुड़िहारा" में "चूड़ी" से "चुड़िहारा" बनने की प्रक्रिया में तद्धित प्रत्यय का प्रयोग होता है, जो किसी व्यक्ति के पेशे या कार्य को दर्शाता है। यह उनतावाचक तद्धित प्रत्यय का उदाहरण नहीं है क्योंकि यह विशेषता या गुण को नहीं दर्शाता।
इस प्रकार, "बहूटी" सही उत्तर है क्योंकि यह उनतावाचक तद्धित प्रत्यय का सही उदाहरण प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 142
निम्न में से किस विकल्प में अपत्यवाचक प्रत्यय
का प्रयोग हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न में पूछा गया है कि निम्न में से किस विकल्प में अपत्यवाचक प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। सही उत्तर विकल्प 3 "दाशरथि" है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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दाशरथि: यह शब्द "दशरथ" से बना है, जो भगवान राम के पिता का नाम है। "दाशरथि" का अर्थ है "दशरथ का पुत्र"। यहाँ "रथि" एक अपत्यवाचक प्रत्यय है, जो पुत्र या संतान का बोध कराता है। इसलिए, यह विकल्प अपत्यवाचक प्रत्यय का सही उदाहरण है।
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दाम्पत्य: यह शब्द "दम्पति" से बना है, जिसका अर्थ है पति-पत्नी का संबंध। इसमें अपत्यवाचक प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है, क्योंकि यह संतान या पुत्र का बोध नहीं कराता है।
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पाशविक: यह शब्द "पशु" से बना है, जिसका अर्थ है पशु से संबंधित या पशु जैसा। इसमें भी अपत्यवाचक प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है, क्योंकि यह संतान का बोध नहीं कराता है।
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आस्तिक: यह शब्द "अस्ति" से बना है, जिसका अर्थ है जो ईश्वर में विश्वास करता है। इसमें भी अपत्यवाचक प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है, क्योंकि यह संतान का बोध नहीं कराता है।
इस प्रकार, "दाशरथि" ही एकमात्र ऐसा विकल्प है जिसमें अपत्यवाचक प्रत्यय का प्रयोग हुआ है, और इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 143
ल' प्रत्यय का प्रयोग किस शब्द में सही रूप से हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
ल' प्रत्यय का प्रयोग हिंदी भाषा में विशेष रूप से उन शब्दों के अंत में होता है जो कोमलता, मृदुता या सौम्यता को दर्शाते हैं। इस संदर्भ में, आइए प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करें:
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आँचल: यह शब्द 'आँच' से बना है और इसका अर्थ है साड़ी का वह हिस्सा जो कंधे पर रखा जाता है। इसमें 'ल' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है। यह शब्द कोमलता या मृदुता को नहीं दर्शाता है, बल्कि यह एक वस्तु का नाम है।
-
मृदुल: यह शब्द 'मृदु' से बना है, जिसका अर्थ होता है कोमल या नरम। 'ल' प्रत्यय का प्रयोग यहाँ सही रूप से हुआ है क्योंकि यह शब्द कोमलता को दर्शाता है। इस प्रकार, 'मृदुल' में 'ल' प्रत्यय का प्रयोग सही है।
-
विमल: यह शब्द 'विम' से बना है, जिसका अर्थ होता है स्वच्छ या निर्मल। हालांकि इसमें 'ल' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है, लेकिन यह कोमलता या मृदुता को नहीं दर्शाता है, बल्कि यह स्वच्छता को दर्शाता है।
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वितल: यह शब्द सामान्य रूप से हिंदी में प्रयोग नहीं होता है और इसका कोई स्पष्ट अर्थ नहीं है। इसलिए इसमें 'ल' प्रत्यय का प्रयोग सही नहीं माना जा सकता।
इस प्रकार, 'मृदुल' शब्द में 'ल' प्रत्यय का प्रयोग सही रूप से हुआ है क्योंकि यह कोमलता को दर्शाता है। यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 144
कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय' वाला विकल्प नहीं है :
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उत्तर और व्याख्या
कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय का अर्थ होता है वह प्रत्यय जो किसी कार्य को करने वाले व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है। अब हम दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:
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प्रेरिका: यह शब्द 'प्रेरित करने वाली' के अर्थ में आता है। यहाँ 'प्रेरिका' में 'का' प्रत्यय जुड़ा है, जो कर्तृवाचक है क्योंकि यह प्रेरणा देने वाले व्यक्ति का बोध कराता है।
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उपभोक्त्री: यह शब्द 'उपभोग करने वाली' के अर्थ में आता है। 'उपभोक्त्री' में 'त्री' प्रत्यय जुड़ा है, जो कर्तृवाचक है क्योंकि यह उपभोग करने वाले व्यक्ति का बोध कराता है।
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बुद्धिमान्: यह शब्द 'बुद्धि वाला' के अर्थ में आता है। यहाँ 'मान्' प्रत्यय जुड़ा है, जो कर्तृवाचक नहीं है। यह व्यक्ति की विशेषता या गुण का बोध कराता है, न कि किसी कार्य को करने वाले का।
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रखवैया: यह शब्द 'रखवाली करने वाला' के अर्थ में आता है। 'रखवैया' में 'इया' प्रत्यय जुड़ा है, जो कर्तृवाचक है क्योंकि यह रखवाली करने वाले व्यक्ति का बोध कराता है।
इस प्रकार, 'बुद्धिमान्' शब्द में कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय नहीं है, जबकि अन्य विकल्पों में कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 3 'बुद्धिमान्' है।
प्रश्न 145
प्रत्यय की दृष्टि से कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: प्रत्यय की दृष्टि से कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है?
सही उत्तर: विकल्प 1
विस्तृत व्याख्या:
-
विकल्प 1: दाँत + एल = दंतैल
यह विकल्प सुमेलित नहीं है क्योंकि 'दाँत' शब्द में 'एल' प्रत्यय जोड़ने से 'दंतैल' शब्द नहीं बनता है। 'दंतैल' शब्द का निर्माण 'दंत' से होता है, जो 'दाँत' का संस्कृत रूप है, और इसमें 'एल' प्रत्यय का कोई योगदान नहीं है। इसलिए, यह विकल्प प्रत्यय की दृष्टि से सुमेलित नहीं है। -
विकल्प 2: पानी + ईला = पनीला
यह विकल्प सुमेलित है क्योंकि 'पानी' शब्द में 'ईला' प्रत्यय जोड़ने से 'पनीला' शब्द बनता है, जो सही है। 'पनीला' का अर्थ होता है पानी जैसा या पानी से भरा हुआ। -
विकल्प 3: कुशा + ल = कुशल
यह विकल्प सुमेलित है क्योंकि 'कुशा' शब्द में 'ल' प्रत्यय जोड़ने से 'कुशल' शब्द बनता है, जो सही है। 'कुशल' का अर्थ होता है दक्ष या निपुण। -
विकल्प 4: नानी + आल = ननिहाल
यह विकल्प सुमेलित है क्योंकि 'नानी' शब्द में 'आल' प्रत्यय जोड़ने से 'ननिहाल' शब्द बनता है, जो सही है। 'ननिहाल' का अर्थ होता है नानी का घर या नानी का स्थान।
इस प्रकार, प्रत्यय की दृष्टि से विकल्प 1 सुमेलित नहीं है, और यही कारण है कि यह सही उत्तर है।
प्रश्न 146
किस विकल्प में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 1 'शिक्षणेतर' में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है। इसका कारण यह है कि 'शिक्षणेतर' शब्द में 'तर' प्रत्यय का अर्थ 'अधिक' या 'बड़ा' नहीं है, बल्कि यह 'शिक्षण' से अलग या भिन्न का बोध कराता है। यहाँ 'तर' का प्रयोग 'इतर' के रूप में हुआ है, जो भिन्नता दर्शाता है।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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वृहत्तर: इस शब्द में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'वृहत्त' का अर्थ है बड़ा, और 'वृहत्तर' का अर्थ है उससे भी बड़ा। यहाँ 'तर' प्रत्यय का प्रयोग तुलना के लिए किया गया है।
-
महत्तर: इस शब्द में भी 'तर' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'महत्त' का अर्थ है महान, और 'महत्तर' का अर्थ है उससे भी महान। यहाँ 'तर' प्रत्यय का प्रयोग तुलना के लिए किया गया है।
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उच्चतर: इस शब्द में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'उच्च' का अर्थ है ऊँचा, और 'उच्चतर' का अर्थ है उससे भी ऊँचा। यहाँ 'तर' प्रत्यय का प्रयोग तुलना के लिए किया गया है।
इस प्रकार, 'शिक्षणेतर' में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है, जबकि अन्य सभी विकल्पों में 'तर' प्रत्यय का प्रयोग तुलना के लिए किया गया है। इसलिए विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 147
झुकाव, भुलावा और उड़ान शब्दों का प्रत्यय भेद इंगित कीजिए :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: झुकाव, भुलावा और उड़ान शब्दों का प्रत्यय भेद इंगित कीजिए :
सही उत्तर: विकल्प 1 (भाववाचक कृत् प्रत्यय)
व्याख्या:
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भाववाचक कृत् प्रत्यय (विकल्प 1):
- झुकाव, भुलावा और उड़ान शब्दों में 'आव', 'आवा' और 'आन' प्रत्यय जुड़े हुए हैं। ये प्रत्यय क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाते हैं। उदाहरण के लिए, 'झुक' से 'झुकाव', 'भुल' से 'भुलावा', और 'उड़' से 'उड़ान' बनते हैं। ये सभी शब्द किसी क्रिया के भाव या अवस्था को व्यक्त करते हैं, जो कि भाववाचक कृत् प्रत्यय का कार्य है। इसलिए, विकल्प 1 सही है।
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भाववाचक तद्धित प्रत्यय (विकल्प 2):
- तद्धित प्रत्यय का प्रयोग किसी मूल शब्द से नया शब्द बनाने के लिए होता है, जो उस मूल शब्द के अर्थ में परिवर्तन लाता है। यहाँ पर झुकाव, भुलावा और उड़ान में तद्धित प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है, बल्कि कृत् प्रत्यय का प्रयोग हुआ है जो क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाता है।
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करणवाचक कृत् प्रत्यय (विकल्प 3):
- करणवाचक कृत् प्रत्यय का प्रयोग उस साधन या उपकरण को व्यक्त करने के लिए होता है जिससे कोई कार्य किया जाता है। उदाहरण के लिए, 'लेखन' (लिखने का साधन) में 'न' करणवाचक कृत् प्रत्यय है। झुकाव, भुलावा और उड़ान में ऐसा कोई अर्थ नहीं है जो किसी साधन को व्यक्त करता हो।
-
कर्मवाचक कृत् प्रत्यय (विकल्प 4):
- कर्मवाचक कृत् प्रत्यय का प्रयोग उस कार्य को व्यक्त करने के लिए होता है जो किसी क्रिया के द्वारा किया जाता है। उदाहरण के लिए, 'पठन' (पढ़ने का कार्य) में 'न' कर्मवाचक कृत् प्रत्यय है। झुकाव, भुलावा और उड़ान में ऐसा कोई अर्थ नहीं है जो किसी कार्य को व्यक्त करता हो।
इस प्रकार, झुकाव, भुलावा और उड़ान शब्दों में भाववाचक कृत् प्रत्यय का प्रयोग हुआ है, जो विकल्प 1 को सही ठहराता है।
प्रश्न 148
किस विकल्प में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: किस विकल्प में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है ?
सही उत्तर: विकल्प 4
विस्तृत व्याख्या:
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विकल्प 4: पाणिनीय
'पाणिनीय' शब्द में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है। यह शब्द 'पाणिनि' से बना है, जो एक प्रसिद्ध संस्कृत व्याकरणाचार्य थे। 'पाणिनीय' का अर्थ है 'पाणिनि से संबंधित' या 'पाणिनि के द्वारा रचित'। इसमें 'अनीय' प्रत्यय का कोई योगदान नहीं है, बल्कि यह 'ईय' प्रत्यय से बना है जो संबंध सूचक है। -
विकल्प 1: शयनीय
'शयनीय' शब्द में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। यह 'शयन' से बना है और इसका अर्थ है 'सोने योग्य'। यहाँ 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग किसी क्रिया या अवस्था की योग्यता को दर्शाने के लिए किया गया है। -
विकल्प 2: सम्माननीय
'सम्माननीय' शब्द में भी 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। यह 'सम्मान' से बना है और इसका अर्थ है 'सम्मान के योग्य'। यहाँ 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग योग्यता या उपयुक्तता को दर्शाने के लिए किया गया है। -
विकल्प 3: आदरणीय
'आदरणीय' शब्द में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। यह 'आदर' से बना है और इसका अर्थ है 'आदर के योग्य'। यहाँ भी 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग योग्यता को दर्शाने के लिए किया गया है।
इस प्रकार, 'पाणिनीय' शब्द में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है, जबकि अन्य सभी विकल्पों में 'अनीय' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 4 है।
प्रश्न 149
प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
Option 3 is the correct answer because "भगिनी + य = भागिनेय" is the only option where the resulting word ("भागिनेय") doesn't directly represent the abstract quality or state derived from the base word ("भगिनी"). "भगिनी" means sister, and "भागिनेय" means sister's son (nephew). The addition of "य" doesn't create an abstract noun related to "sister" in the same way it does in the other options.
Here's why the other options are incorrect:
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Option 1: निपुण + य = नैपुण्य: "निपुण" means skilled or expert, and "नैपुण्य" means skill or expertise. The addition of "य" correctly transforms the adjective "निपुण" into the abstract noun "नैपुण्य," representing the quality of being skilled.
-
Option 2: ईश्वर + य = ऐश्वर्य: "ईश्वर" means God or Lord, and "ऐश्वर्य" means glory, wealth, or divine power. The addition of "य" correctly transforms "ईश्वर" into "ऐश्वर्य," representing the qualities or attributes associated with God.
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Option 4: विशिष्ट + य = वैशिष्ट्य: "विशिष्ट" means specific or special, and "वैशिष्ट्य" means specialty or uniqueness. The addition of "य" correctly transforms the adjective "विशिष्ट" into the abstract noun "वैशिष्ट्य," representing the quality of being specific or unique.
In summary, only in Option 3 does the addition of "य" not result in a word that represents the abstract quality or state of the original word. Instead, it creates a word with a different, concrete meaning (sister's son). Therefore, Option 3 is the असंगत (inconsistent) option.
प्रश्न 150
निम्न में से कौन-सा शब्द 'ल' प्रत्यय से युक्त नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्न में से कौन-सा शब्द 'ल' प्रत्यय से युक्त नहीं है?
सही उत्तर: विकल्प 4 (आँचल)
व्याख्या:
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आँचल: यह शब्द 'ल' प्रत्यय से युक्त नहीं है। 'आँचल' शब्द का निर्माण 'आँच' से हुआ है, जिसमें 'ल' प्रत्यय का कोई योगदान नहीं है। यह एक संज्ञा है जो वस्त्र के एक भाग को दर्शाता है, और इसमें 'ल' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है।
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श्यामल: यह शब्द 'ल' प्रत्यय से युक्त है। 'श्याम' का अर्थ होता है काला या गहरा रंग, और 'ल' प्रत्यय जोड़ने से यह विशेषण बन जाता है जो गहरे रंग का वर्णन करता है।
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कुशल: यह शब्द भी 'ल' प्रत्यय से युक्त है। 'कुश' का अर्थ होता है दक्षता या निपुणता, और 'ल' प्रत्यय जोड़ने से यह विशेषण बन जाता है जो किसी व्यक्ति की दक्षता या निपुणता को दर्शाता है।
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रोमल: यह शब्द 'ल' प्रत्यय से युक्त है। 'रोम' का अर्थ होता है बाल या केश, और 'ल' प्रत्यय जोड़ने से यह विशेषण बन जाता है जो बालों से संबंधित विशेषता को दर्शाता है।
इस प्रकार, 'आँचल' शब्द 'ल' प्रत्यय से युक्त नहीं है, जबकि अन्य सभी विकल्पों में 'ल' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 4 है।
प्रश्न 151
प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प बताइए :
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उत्तर और व्याख्या
प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प को पहचानने के लिए हमें यह समझना होगा कि प्रत्यय का सही प्रयोग कैसे होता है। दिए गए विकल्पों में प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, और हमें यह देखना है कि किस विकल्प में प्रत्यय का प्रयोग असंगत है।
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विचारण + ईय = विचारणीय: यहाँ पर 'ईय' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'विचारण' शब्द में 'ईय' प्रत्यय जोड़ने पर 'विचारणीय' बनता है, जो कि सही शब्द है। लेकिन यहाँ पर प्रत्यय का प्रयोग असंगत है क्योंकि 'विचारणीय' का अर्थ होता है 'विचार करने योग्य', जबकि 'विचारण' का अर्थ होता है 'विचार करने की क्रिया'। इस प्रकार, प्रत्यय का प्रयोग यहाँ सही नहीं बैठता।
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दृश् + तव्य = द्रष्टव्य: यहाँ पर 'तव्य' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'दृश्' में 'तव्य' जोड़ने पर 'द्रष्टव्य' बनता है, जिसका अर्थ होता है 'देखने योग्य'। यह प्रत्यय का सही प्रयोग है और शब्द का अर्थ भी सही है।
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वृष्णि + एय = वार्ष्णेय: यहाँ पर 'एय' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'वृष्णि' में 'एय' जोड़ने पर 'वार्ष्णेय' बनता है, जो कि वृष्णि वंश से संबंधित है। यह प्रत्यय का सही प्रयोग है।
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वल्मीक + इ = वाल्मीकि: यहाँ पर 'इ' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'वल्मीक' में 'इ' जोड़ने पर 'वाल्मीकि' बनता है, जो कि सही शब्द है और इसका अर्थ भी सही है।
इस प्रकार, प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प 'विचारण + ईय = विचारणीय' है, क्योंकि यहाँ प्रत्यय का प्रयोग सही अर्थ नहीं देता। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 1 है।
प्रश्न 152
धातु को छोड़कर अन्य पदों यथा - संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, अव्यय में प्रत्यय जोड़कर, जो क्रियारूप बनाए जाते हैं; उन्हें कहते हैं -
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उत्तर और व्याख्या
धातु को छोड़कर अन्य पदों यथा - संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, अव्यय में प्रत्यय जोड़कर, जो क्रियारूप बनाए जाते हैं; उन्हें "नामधातु क्रिया" कहते हैं।
विस्तृत व्याख्या:
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नामधातु क्रिया (Option 4):
- नामधातु क्रिया वह क्रिया होती है जो संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, या अव्यय में प्रत्यय जोड़कर बनाई जाती है। यह प्रक्रिया भाषा में नए क्रियारूपों के निर्माण के लिए होती है। उदाहरण के लिए, 'खेल' (संज्ञा) से 'खेलना' (क्रिया) बनाना। इस प्रकार के क्रियारूपों का निर्माण भाषा में अधिक अभिव्यक्ति और विविधता लाने के लिए किया जाता है।
-
अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
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प्रेरणार्थक क्रिया (Option 1):
- प्रेरणार्थक क्रिया वह होती है जो किसी अन्य व्यक्ति को क्रिया करने के लिए प्रेरित करती है। यह मुख्यतः क्रिया के प्रकार को दर्शाती है, न कि संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, या अव्यय से क्रियारूप बनाने की प्रक्रिया को।
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सहायक क्रिया (Option 2):
- सहायक क्रिया मुख्य क्रिया के साथ मिलकर वाक्य में समय, काल, या अन्य व्याकरणिक विशेषताओं को दर्शाती है। यह मुख्य क्रिया के साथ जुड़कर उसके अर्थ को स्पष्ट करती है, लेकिन यह नामधातु क्रिया के निर्माण से संबंधित नहीं है।
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संयोजी क्रिया (Option 3):
- संयोजी क्रिया का प्रयोग वाक्य में दो या अधिक क्रियाओं को जोड़ने के लिए किया जाता है। यह भी नामधातु क्रिया के निर्माण से संबंधित नहीं है, क्योंकि यह क्रिया के संयोजन से संबंधित है, न कि संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, या अव्यय से क्रियारूप बनाने से।
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इस प्रकार, दिए गए प्रश्न के संदर्भ में, "नामधातु क्रिया" (Option 4) सही उत्तर है क्योंकि यह संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, या अव्यय में प्रत्यय जोड़कर क्रियारूप बनाने की प्रक्रिया को सही रूप से परिभाषित करता है।
प्रश्न 153
किस विकल्प में 'भाववाचक कृत् प्रत्यय' का प्रयोग नहीं हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
'परोसैया' विकल्प में 'भाववाचक कृत् प्रत्यय' का प्रयोग नहीं हुआ है, क्योंकि यह शब्द 'परोसना' क्रिया से बना है, लेकिन यह भाव (abstract noun) को नहीं दर्शाता, बल्कि परोसने वाले व्यक्ति (agent noun) को दर्शाता है। 'परोसैया' एक जातिवाचक संज्ञा (common noun) है जो परोसने का काम करने वाले व्यक्ति को इंगित करती है। कृत् प्रत्यय क्रिया शब्दों के अंत में लगकर संज्ञा या विशेषण बनाते हैं। भाववाचक कृत् प्रत्यय ऐसे प्रत्यय होते हैं जो क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाते हैं।
अब अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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छिड़काव: यह शब्द 'छिड़कना' क्रिया से बना है और 'छिड़काव' क्रिया के भाव (action of sprinkling) को दर्शाता है। इसलिए, इसमें भाववाचक कृत् प्रत्यय का प्रयोग हुआ है।
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पछतावा: यह शब्द 'पछताना' क्रिया से बना है और 'पछतावा' एक भाव (feeling of regret) को दर्शाता है। इसलिए, इसमें भाववाचक कृत् प्रत्यय का प्रयोग हुआ है।
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गड़गड़ाहट: यह शब्द 'गड़गड़ाना' क्रिया से बना है और 'गड़गड़ाहट' एक ध्वनि के भाव (sound of rumbling) को दर्शाता है। इसलिए, इसमें भाववाचक कृत् प्रत्यय का प्रयोग हुआ है।
इसलिए, केवल 'परोसैया' ही ऐसा विकल्प है जो भाववाचक कृत् प्रत्यय का उदाहरण नहीं है, क्योंकि यह क्रिया करने वाले व्यक्ति को दर्शाता है, न कि किसी भाव को।
प्रश्न 154
‘आंजनेय’ शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है :
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उत्तर और व्याख्या
‘आंजनेय’ शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय 'एय' है। यह प्रत्यय संस्कृत भाषा में विशेष रूप से उपयोग किया जाता है और इसका अर्थ होता है 'से संबंधित' या 'का पुत्र'। 'आंजनेय' शब्द का अर्थ होता है 'अंजना का पुत्र', जो हनुमान जी का एक नाम है। यहाँ 'आंजना' शब्द में 'एय' प्रत्यय जोड़कर 'आंजनेय' शब्द बना है, जो यह दर्शाता है कि यह अंजना से संबंधित है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
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य: 'य' प्रत्यय का उपयोग इस संदर्भ में नहीं होता है। यह प्रत्यय शब्द के अंत में नहीं जुड़ता है और 'आंजनेय' शब्द में इसका कोई स्थान नहीं है।
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नेय: 'नेय' प्रत्यय का उपयोग भी इस संदर्भ में नहीं होता है। यह प्रत्यय 'आंजनेय' शब्द में नहीं जुड़ा है और इसका अर्थ भी इस शब्द के अर्थ से मेल नहीं खाता।
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ऐय: 'ऐय' प्रत्यय का उपयोग इस शब्द में नहीं होता है। यह प्रत्यय 'आंजनेय' शब्द के निर्माण में नहीं जुड़ा है और इसका अर्थ भी इस संदर्भ में सही नहीं है।
इस प्रकार, 'आंजनेय' शब्द में 'एय' प्रत्यय का सही उपयोग हुआ है, जो इसे अंजना से संबंधित बनाता है। इसलिए, विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 155
किस शब्द में ‘इन’ प्रत्यय का प्रयोग सही नहीं हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न में पूछा गया है कि किस शब्द में 'इन' प्रत्यय का प्रयोग सही नहीं हुआ है। सही उत्तर विकल्प 3 'नाइन' है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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कुँजड़िन: 'कुँजड़िन' शब्द में 'इन' प्रत्यय का प्रयोग सही है। 'कुँजड़ा' का अर्थ होता है सब्जी बेचने वाला व्यक्ति, और 'कुँजड़िन' का अर्थ होता है सब्जी बेचने वाली महिला। यहाँ 'इन' प्रत्यय का प्रयोग स्त्रीलिंग बनाने के लिए किया गया है, जो व्याकरणिक रूप से सही है।
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नागिन: 'नागिन' शब्द में 'इन' प्रत्यय का प्रयोग भी सही है। 'नाग' का अर्थ होता है सांप, और 'नागिन' का अर्थ होता है मादा सांप। यहाँ 'इन' प्रत्यय का प्रयोग स्त्रीलिंग बनाने के लिए किया गया है, जो व्याकरणिक रूप से सही है।
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नाइन: 'नाइन' शब्द में 'इन' प्रत्यय का प्रयोग सही नहीं है। 'नाई' का अर्थ होता है बाल काटने वाला व्यक्ति, और 'नाइन' का कोई मान्य अर्थ नहीं होता है। यहाँ 'इन' प्रत्यय का प्रयोग व्याकरणिक रूप से गलत है क्योंकि यह शब्द किसी स्त्रीलिंग रूप को नहीं दर्शाता है।
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ईसाइन: 'ईसाइन' शब्द में 'इन' प्रत्यय का प्रयोग सही है। 'ईसाई' का अर्थ होता है ईसाई धर्म का अनुयायी, और 'ईसाइन' का अर्थ होता है ईसाई धर्म की अनुयायी महिला। यहाँ 'इन' प्रत्यय का प्रयोग स्त्रीलिंग बनाने के लिए किया गया है, जो व्याकरणिक रूप से सही है।
इस प्रकार, 'नाइन' शब्द में 'इन' प्रत्यय का प्रयोग सही नहीं हुआ है, इसलिए विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 156
अक' प्रत्यय युक्त पद नहीं है :
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उत्तर और व्याख्या
अक' प्रत्यय युक्त पद नहीं है : लड़ाक
विस्तृत व्याख्या:
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लड़ाक: यह शब्द 'अक' प्रत्यय युक्त नहीं है। 'लड़ाक' शब्द में 'अक' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है। यह शब्द 'लड़' धातु से बना है और इसमें 'अक' प्रत्यय का कोई योगदान नहीं है। इसलिए, यह सही उत्तर है।
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विधायक: इस शब्द में 'अक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'विधि' से 'विधायक' बनता है, जिसमें 'अक' प्रत्यय का उपयोग होता है। यह शब्द किसी विधान को बनाने या लागू करने वाले व्यक्ति को संदर्भित करता है।
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प्रेरक: इस शब्द में भी 'अक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'प्रेरणा' से 'प्रेरक' बनता है, जिसमें 'अक' प्रत्यय का उपयोग होता है। यह शब्द किसी को प्रेरित करने वाले व्यक्ति या वस्तु को संदर्भित करता है।
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निंदक: इस शब्द में 'अक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'निंदा' से 'निंदक' बनता है, जिसमें 'अक' प्रत्यय का उपयोग होता है। यह शब्द किसी की आलोचना करने वाले व्यक्ति को संदर्भित करता है।
इस प्रकार, 'लड़ाक' शब्द में 'अक' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है, जबकि अन्य सभी विकल्पों में 'अक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 4 'लड़ाक' है।
प्रश्न 157
प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
सही उत्तर: विकल्प 1
विस्तृत व्याख्या:
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हथ + औड़ी = हथौड़ी: इस विकल्प में 'हथ' और 'औड़ी' का संयोजन किया गया है। यहाँ पर 'औड़ी' प्रत्यय का प्रयोग नहीं है। 'हथौड़ी' शब्द में 'हथ' का अर्थ हाथ से संबंधित है, लेकिन 'औड़ी' कोई प्रत्यय नहीं है जो 'हथ' के साथ मिलकर एक नया अर्थ प्रदान करता हो। इसलिए, यह संयोजन प्रत्यय की दृष्टि से असंगत है।
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अणु + इक = आणविक: इस विकल्प में 'इक' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'अणु' का अर्थ है सूक्ष्म कण और 'इक' प्रत्यय जोड़ने से 'आणविक' शब्द बनता है, जिसका अर्थ है अणु से संबंधित। यह प्रत्यय का सही प्रयोग है और इसलिए यह विकल्प संगत है।
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साँप + ओला = सँपोला: इस विकल्प में 'ओला' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'साँप' का अर्थ है सर्प और 'ओला' प्रत्यय जोड़ने से 'सँपोला' शब्द बनता है, जिसका अर्थ है साँप का बच्चा। यह प्रत्यय का सही प्रयोग है और इसलिए यह विकल्प संगत है।
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भाँग + एड़ी = भँगेड़ी: इस विकल्प में 'एड़ी' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है। 'भाँग' का अर्थ है एक प्रकार का पौधा और 'एड़ी' प्रत्यय जोड़ने से 'भँगेड़ी' शब्द बनता है, जिसका अर्थ है भाँग से संबंधित। यह प्रत्यय का सही प्रयोग है और इसलिए यह विकल्प संगत है।
इस प्रकार, प्रत्यय की दृष्टि से असंगत विकल्प 'हथ + औड़ी = हथौड़ी' है, क्योंकि इसमें प्रत्यय का सही प्रयोग नहीं किया गया है।
प्रश्न 158
इक' प्रत्यय से निर्मित शब्द नहीं है :
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: इक' प्रत्यय से निर्मित शब्द नहीं है :
सही उत्तर: विकल्प 2 (अधिकाधिक)
व्याख्या:
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विकल्प 2: अधिकाधिक
"अधिकाधिक" शब्द में 'इक' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है। यह शब्द 'अधिक' से बना है और इसका अर्थ है 'और अधिक' या 'बढ़ते हुए'। इसमें 'इक' प्रत्यय का कोई योगदान नहीं है, इसलिए यह सही उत्तर है। -
विकल्प 1: दैनिक
"दैनिक" शब्द में 'इक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'दिन' शब्द में 'इक' प्रत्यय जोड़ने से 'दैनिक' बनता है, जिसका अर्थ है 'प्रतिदिन' या 'रोजाना'। -
विकल्प 3: सामाजिक
"सामाजिक" शब्द में भी 'इक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'समाज' शब्द में 'इक' प्रत्यय जोड़ने से 'सामाजिक' बनता है, जिसका अर्थ है 'समाज से संबंधित'। -
विकल्प 4: धार्मिक
"धार्मिक" शब्द में 'इक' प्रत्यय का प्रयोग होता है। 'धर्म' शब्द में 'इक' प्रत्यय जोड़ने से 'धार्मिक' बनता है, जिसका अर्थ है 'धर्म से संबंधित'।
इस प्रकार, 'अधिकाधिक' शब्द में 'इक' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 159
बिछौना' में मूल शब्द एवं प्रत्यय है :
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उत्तर और व्याख्या
'बिछौना' शब्द में 'बिछाना' और 'औना' का मेल है। यहाँ पर 'बिछाना' मूल शब्द है और 'औना' प्रत्यय है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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मूल शब्द 'बिछाना': 'बिछाना' का अर्थ है किसी चीज़ को फैलाना या बिछाना। यह क्रिया का रूप है जो किसी वस्तु को व्यवस्थित रूप से फैलाने की क्रिया को दर्शाता है।
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प्रत्यय 'औना': 'औना' एक प्रत्यय है जो मूल शब्द के साथ जुड़कर नए शब्द का निर्माण करता है। यह प्रत्यय मूल शब्द के अर्थ में थोड़ा परिवर्तन या विस्तार करता है।
अब, आइए देखें कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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विकल्प 1: बिछाना + ओना - यहाँ 'ओना' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, जो सही नहीं है क्योंकि 'बिछौना' में 'औना' प्रत्यय का प्रयोग होता है।
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विकल्प 2: बिछ + ऊना - यहाँ 'बिछ' को मूल शब्द माना गया है, जो गलत है क्योंकि 'बिछ' अपने आप में पूर्ण अर्थ नहीं देता। साथ ही, 'ऊना' प्रत्यय का प्रयोग भी गलत है।
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विकल्प 4: बिछा + ओना - यहाँ 'बिछा' को मूल शब्द माना गया है, जो सही नहीं है क्योंकि 'बिछा' अधूरा शब्द है और 'ओना' प्रत्यय का प्रयोग भी गलत है।
इस प्रकार, 'बिछौना' में 'बिछाना' और 'औना' का सही मेल है, जो विकल्प 3 को सही उत्तर बनाता है।
प्रश्न 160
किस विकल्प में 'इल' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है ?
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उत्तर और व्याख्या
'मरियल' शब्द में 'इल' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है। इसका कारण यह है कि 'मरियल' शब्द 'मर' धातु से बना है और इसमें 'इयल' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है, न कि 'इल' का। 'मर' धातु का अर्थ है 'मरना' और 'इयल' प्रत्यय लगने से यह 'मरने वाला' या 'कमजोर' के अर्थ में प्रयुक्त होता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
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उर्मिल: 'उर्मिल' शब्द 'उर्मि' (लहर) में 'इल' प्रत्यय लगने से बना है। 'उर्मि' का अर्थ है लहर और 'इल' प्रत्यय लगने से 'लहरों से भरा हुआ' या 'लहरदार' का अर्थ निकलता है।
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फेनिल: 'फेनिल' शब्द 'फेन' (झाग) में 'इल' प्रत्यय लगने से बना है। 'फेन' का अर्थ है झाग और 'इल' प्रत्यय लगने से 'झाग से भरा हुआ' का अर्थ निकलता है।
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जटिल: 'जटिल' शब्द 'जटा' में 'इल' प्रत्यय लगने से बना है। 'जटा' का अर्थ है उलझे हुए बाल और 'इल' प्रत्यय लगने से 'उलझा हुआ' या 'कठिन' का अर्थ निकलता है।
इसलिए, केवल 'मरियल' शब्द में 'इल' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है, बल्कि 'इयल' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। अतः विकल्प 2 सही है।