HTET परीक्षा - Level 1 PRT - व्याकरणिक कोटियाँ
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 1 PRT की तैयारी
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5 में से 5 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 21
किस विकल्प में एकवचन से बहुवचन बना युग्म असंगत है ?
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उत्तर और व्याख्या
The correct option is 2:
हिन्दी व्याकरण में वचन परिवर्तन के नियमों के अनुसार, जब 'उ' या 'ऊ' से समाप्त होने वाले पुल्लिंग शब्दों का प्रयोग बहुवचन बनाने के लिए किया जाता है, तो उनके मूल रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता, यदि वे कर्ता कारक (Nominative Case) में हों। हालांकि, जब इन शब्दों का प्रयोग किसी कारक चिह्न (Postposition), जैसे 'को', 'से', 'में', 'पर', 'का', 'के', 'की' आदि के साथ किया जाता है, यानी जब वे तिर्यक रूप (Oblique Form) में आते हैं, तो बहुवचन बनाते समय उनमें 'ओ' प्रत्यय जोड़ा जाता है और 'ऊ' की मात्रा 'उ' में बदल जाती है। 'साधु' एकवचन शब्द है, जो 'उ' से समाप्त होता है। इसका सही तिर्यक बहुवचन रूप 'साधुओं' होता है (न कि 'साधूओं')। चूँकि दिए गए विकल्प 'साधु - साधूओं' में 'साधूओं' में 'ऊ' की मात्रा को बनाए रखा गया है, जो व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है, इसलिए यह युग्म असंगत (Inconsistent) है।
The incorrect option is 1:
'डाकू - डाकुओं' एक संगत (Consistent) युग्म है। 'डाकू' शब्द 'ऊ' से समाप्त होने वाला पुल्लिंग संज्ञा है। जब यह शब्द कर्म, करण, या अन्य कारकों में प्रयुक्त होता है, तो इसका बहुवचन बनाने के लिए इसमें 'ओं' प्रत्यय जोड़ा जाता है। नियम के अनुसार, 'ऊ' की मात्रा को 'उ' में बदल दिया जाता है, जिससे शुद्ध रूप 'डाकुओं' बनता है। उदाहरण के लिए, "डाकुओं को पकड़ा गया" में इसका तिर्यक बहुवचन रूप सही है, इसलिए यह विकल्प असंगत नहीं है।
The incorrect option is 3:
'पत्नी - पत्नियों' एक संगत युग्म है। हिन्दी व्याकरण में स्त्रीलिंग संज्ञाएँ जो 'ई' (दीर्घ इ) से समाप्त होती हैं, उनका बहुवचन बनाते समय 'ई' को पहले 'इ' (ह्रस्व इ) में बदल दिया जाता है और फिर 'याँ' प्रत्यय जोड़ा जाता है। हालाँकि, जब बहुवचन को तिर्यक रूप में प्रयोग किया जाता है (कारक चिह्न के साथ), तो 'ई' को 'इ' में बदलकर 'यों' प्रत्यय जोड़ा जाता है। इस प्रकार, 'पत्नी' का बहुवचन तिर्यक रूप 'पत्नियों' (पत्न + इयों) होता है। यह वचन परिवर्तन का एक मानक नियम है और यह युग्म पूर्णतः शुद्ध है।
The incorrect option is 4:
'काग़ज़ - कागजात' भी एक संगत युग्म है, लेकिन यह हिंदी के देशी नियमों पर नहीं, बल्कि उर्दू/फ़ारसी प्रभाव पर आधारित है। हिन्दी में कई शब्द ऐसे हैं जो विदेशी भाषाओं से लिए गए हैं, और उनका बहुवचन उन्हीं भाषाओं के नियमों के अनुसार बन जाता है। 'काग़ज़' (पेपर) एक फ़ारसी मूल का शब्द है, और इसका बहुवचन बनाने के लिए 'कागजात' (Papers/Documents) शब्द का प्रयोग किया जाता है। चूंकि यह विदेशी शब्दों के बहुवचन बनाने की मान्य परंपरा का पालन करता है, यह युग्म असंगत नहीं माना जाता है।
प्रश्न 22
‘करणकारक’ युक्त वाक्य चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
‘करणकारक’ युक्त वाक्य है: कानों सुनी बात सत्य होती है।
व्याख्या:
- कानों सुनी बात सत्य होती है: इस वाक्य में 'कानों' शब्द 'सुनने' की क्रिया का साधन है। 'करण कारक' वह कारक होता है जो क्रिया के साधन या उपकरण को दर्शाता है। यहाँ, 'कानों' सुनने की क्रिया का साधन है, इसलिए यह करण कारक है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
- वे सिनेमा देखने गए हैं: इस वाक्य में 'सिनेमा' कर्म कारक है, क्योंकि यह क्रिया 'देखने' का उद्देश्य है। 'वे' कर्ता कारक है।
- ललिता गुरुजी से कत्थक सीखती है: इस वाक्य में 'गुरुजी से' अपादान कारक हो सकता है (सीखने के संदर्भ में अलग होने का भाव) या संबंध कारक (गुरुजी के साथ संबंध)। यह करण कारक नहीं है।
- इस साहसी छात्र ने एक बच्चे को नदी में डूबने से बचाया: इस वाक्य में 'छात्र' कर्ता कारक है और 'बच्चे को' कर्म कारक है। 'नदी में' अधिकरण कारक है (स्थान का बोध कराता है)। इसमें करण कारक नहीं है।
इसलिए, केवल विकल्प 1 में 'कानों' शब्द क्रिया के साधन के रूप में प्रयुक्त हुआ है, जो करण कारक को दर्शाता है।
प्रश्न 23
‘हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' वाक्य किस कारक का उदाहरण है ?
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उत्तर और व्याख्या
वाक्य 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' में 'हेमन्त को' संप्रदान कारक का उदाहरण है। संप्रदान कारक वह कारक होता है जो किसी क्रिया के फल का प्राप्तकर्ता होता है। इस वाक्य में 'खीर' के अच्छे लगने की क्रिया का फल 'हेमन्त' को प्राप्त हो रहा है, इसलिए यह संप्रदान कारक का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों की गलतियों को समझते हैं:
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कर्मकारक: कर्मकारक वह होता है जो क्रिया का सीधा प्रभाव ग्रहण करता है। उदाहरण के लिए, 'राम ने खाना खाया' में 'खाना' कर्मकारक है। 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' में 'खीर' का सीधा प्रभाव नहीं है, बल्कि यह 'हेमन्त' को अच्छा लगने की क्रिया का फल है।
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संबंध कारक: संबंध कारक का उपयोग संबंध दर्शाने के लिए होता है, जैसे 'राम का घर'। इस वाक्य में कोई संबंध दर्शाया नहीं जा रहा है, इसलिए यह संबंध कारक का उदाहरण नहीं है।
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अधिकरण कारक: अधिकरण कारक वह होता है जो क्रिया के स्थान, समय या साधन को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 'राम ने बगीचे में खेला' में 'बगीचे में' अधिकरण कारक है। 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' में ऐसा कोई स्थान, समय या साधन नहीं है जो अधिकरण कारक को दर्शाए।
इस प्रकार, 'हेमन्त को खीर अच्छी लगती है' वाक्य में 'हेमन्त को' संप्रदान कारक का सही उदाहरण है।
प्रश्न 24
अपादान कारकयुक्त वाक्य चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
अपादान कारक का प्रयोग उस वाक्य में होता है जहाँ से किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान का अलगाव या दूरी प्रकट होती है। अपादान कारक का चिह्न 'से' होता है।
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बच्चे बंदर से डरते हैं। - इस वाक्य में 'बंदर से' अपादान कारक है क्योंकि यहाँ 'बंदर' से बच्चों का डरना एक प्रकार का अलगाव या दूरी प्रकट करता है। बच्चे बंदर से दूर रहना चाहते हैं, इसलिए यह वाक्य अपादान कारकयुक्त है।
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मैं उसे अपने हाथों सजा दूँगा। - इस वाक्य में 'अपने हाथों' का प्रयोग साधन कारक के रूप में हुआ है, जो साधन या माध्यम को दर्शाता है। यहाँ कोई अलगाव या दूरी नहीं है, इसलिए यह अपादान कारकयुक्त वाक्य नहीं है।
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महिला आँखों से अंधी है। - इस वाक्य में 'आँखों से' का प्रयोग कारण कारक के रूप में हुआ है, जो कारण को दर्शाता है। यहाँ भी कोई अलगाव या दूरी नहीं है, इसलिए यह अपादान कारकयुक्त वाक्य नहीं है।
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वह सब ओर से सैनिकों द्वारा घेर लिया गया था। - इस वाक्य में 'सब ओर से' का प्रयोग स्थान कारक के रूप में हुआ है, जो स्थान को दर्शाता है। यहाँ भी कोई अलगाव या दूरी नहीं है, इसलिए यह अपादान कारकयुक्त वाक्य नहीं है।
इस प्रकार, केवल पहला विकल्प 'बच्चे बंदर से डरते हैं।' अपादान कारकयुक्त वाक्य है, क्योंकि इसमें 'बंदर से' का प्रयोग अलगाव या दूरी को दर्शाने के लिए किया गया है।
प्रश्न 25
के लिए' और 'को' किस कारक के चिह्न हैं ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: 'के लिए' और 'को' किस कारक के चिह्न हैं?
सही उत्तर: विकल्प 2 (सम्प्रदान)
विस्तृत व्याख्या:
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सम्प्रदान कारक:
- 'के लिए' और 'को' हिन्दी व्याकरण में सम्प्रदान कारक के चिह्न माने जाते हैं।
- सम्प्रदान कारक का उपयोग तब होता है जब किसी कार्य का फल किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु को समर्पित किया जाता है। उदाहरण के लिए, "राम ने सीता को पुस्तक दी।" यहाँ 'को' यह दर्शाता है कि पुस्तक देने की क्रिया का लाभार्थी सीता है।
- इसी प्रकार, "यह उपहार तुम्हारे लिए है।" यहाँ 'के लिए' यह दर्शाता है कि उपहार का उद्देश्य या लाभार्थी 'तुम' हो।
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अन्य विकल्पों की अस्वीकृति:
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संबंध (विकल्प 1):
- संबंध कारक का उपयोग संबंध दर्शाने के लिए होता है, जैसे "राम का घर।" यहाँ 'का' संबंध कारक है। 'के लिए' और 'को' संबंध कारक के चिह्न नहीं हैं।
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अपादान (विकल्प 3):
- अपादान कारक का उपयोग तब होता है जब किसी वस्तु या व्यक्ति से अलगाव या दूरी दर्शाई जाती है, जैसे "पेड़ से पत्ता गिरा।" यहाँ 'से' अपादान कारक है। 'के लिए' और 'को' इस प्रकार के अलगाव को नहीं दर्शाते।
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करण (विकल्प 4):
- करण कारक का उपयोग साधन या उपकरण को दर्शाने के लिए होता है, जैसे "कलम से लिखना।" यहाँ 'से' करण कारक है। 'के लिए' और 'को' साधन या उपकरण को नहीं दर्शाते।
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इस प्रकार, 'के लिए' और 'को' का सही उपयोग सम्प्रदान कारक के रूप में होता है, जो किसी कार्य के लाभार्थी या उद्देश्य को दर्शाता है। यही कारण है कि विकल्प 2 सही उत्तर है।