HTET परीक्षा Level 2 TGT
Clear Cutoff के साथ HTET परीक्षा Level 2 TGT की तैयारी
सत्यापित उत्तर और व्याख्याएँ
Clear Cutoff द्वारा
20 में से 20 प्रश्न दिखाए जा रहे हैं
प्रश्न 221
किस विकल्प में 'संकेतार्थक' वाक्य है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 2 "यदि तुम आओ तो मैं चलूँ।" एक संकेतार्थक वाक्य है। संकेतार्थक वाक्य वे होते हैं जो किसी शर्त या स्थिति के आधार पर किसी कार्य या घटना के होने की संभावना को व्यक्त करते हैं। इस वाक्य में "यदि" शब्द का प्रयोग किया गया है, जो एक शर्त को दर्शाता है। इसका अर्थ है कि वक्ता तभी चलेगा जब दूसरा व्यक्ति आएगा। यह एक स्पष्ट संकेत देता है कि एक क्रिया (वक्ता का चलना) दूसरी क्रिया (दूसरे व्यक्ति का आना) पर निर्भर है।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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विकल्प 1 "प्रियतम मेरा मित्र है।" यह एक साधारण कथन है जो किसी व्यक्ति के मित्र होने की जानकारी देता है। इसमें कोई शर्त या संकेतार्थकता नहीं है।
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विकल्प 3 "हो सकता है कल मौसम ठीक हो जाए।" यह एक संभावनात्मक वाक्य है जो भविष्य की एक अनिश्चित घटना की संभावना को व्यक्त करता है। इसमें कोई शर्त नहीं है, इसलिए यह संकेतार्थक वाक्य नहीं है।
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विकल्प 4 "राजेश अपना कमरा साफ़ करो।" यह एक आज्ञार्थक वाक्य है जो राजेश को एक कार्य करने का निर्देश देता है। इसमें भी कोई शर्त या संकेतार्थकता नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 2 सही उत्तर है क्योंकि यह एक संकेतार्थक वाक्य है जो शर्त के आधार पर क्रिया के होने की संभावना को व्यक्त करता है।
प्रश्न 222
संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी।' संविधान के किस अनुच्छेद में वर्णित है ?
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उत्तर और व्याख्या
संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के अनुसार, "संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी।" यह अनुच्छेद स्पष्ट रूप से यह निर्धारित करता है कि भारत की संघीय सरकार की आधिकारिक भाषा हिन्दी होगी और इसे देवनागरी लिपि में लिखा जाएगा। यह प्रावधान भारतीय संविधान के भाग XVII में आता है, जो राजभाषा से संबंधित है।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं और समझते हैं कि वे क्यों गलत हैं:
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अनुच्छेद 342: यह अनुच्छेद अनुसूचित जनजातियों से संबंधित है। यह अनुच्छेद उन जनजातियों की सूची तैयार करने और उन्हें अनुसूचित जनजातियों के रूप में मान्यता देने के लिए प्रावधान करता है। यह राजभाषा से संबंधित नहीं है।
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अनुच्छेद 344: यह अनुच्छेद राजभाषा आयोग और संसदीय समिति के गठन से संबंधित है, जो राजभाषा के उपयोग और उसके विकास के लिए सिफारिशें देती है। हालांकि यह राजभाषा के विषय में है, लेकिन यह संघ की राजभाषा के निर्धारण से सीधे संबंधित नहीं है।
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अनुच्छेद 351: यह अनुच्छेद हिन्दी भाषा के विकास और उसके प्रसार के लिए निर्देश देता है ताकि वह भारत की समृद्ध भाषाई विविधता को समाहित कर सके। यह हिन्दी के विकास के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है, लेकिन यह संघ की राजभाषा के निर्धारण से संबंधित नहीं है।
इस प्रकार, अनुच्छेद 343 (1) ही वह अनुच्छेद है जो स्पष्ट रूप से संघ की राजभाषा के रूप में हिन्दी और देवनागरी लिपि को निर्धारित करता है। यही कारण है कि विकल्प 4 सही उत्तर है।
प्रश्न 223
निम्नलिखित में से अशुद्ध वाक्य है :
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 2: "उसने इन बात पर आपत्ति प्रकट की।" यह वाक्य अशुद्ध है क्योंकि इसमें "इन बात" का प्रयोग गलत है। सही प्रयोग "इन बातों पर" होना चाहिए। हिंदी व्याकरण के अनुसार, जब एक से अधिक बातों की चर्चा होती है, तो बहुवचन का प्रयोग किया जाता है। इसलिए, "बात" के स्थान पर "बातों" का प्रयोग होना चाहिए।
अब अन्य विकल्पों की शुद्धता की पुष्टि करते हैं:
विकल्प 1: "वह राम का नाम लेकर चल पड़ा।" यह वाक्य शुद्ध है। इसमें कोई व्याकरणिक त्रुटि नहीं है। वाक्य का अर्थ है कि वह व्यक्ति राम का नाम लेते हुए आगे बढ़ा।
विकल्प 3: "सुबह-शाम व्यायाम करना चाहिए।" यह वाक्य भी शुद्ध है। इसमें सुबह और शाम दोनों समय व्यायाम करने की सलाह दी गई है, जो व्याकरण और अर्थ दोनों दृष्टियों से सही है।
विकल्प 4: "वह बीस दिन तक अपने घर में ही कैद रहा।" यह वाक्य भी शुद्ध है। इसमें बताया गया है कि वह व्यक्ति बीस दिनों तक अपने घर में बंद रहा, और इसमें कोई व्याकरणिक त्रुटि नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 2 में व्याकरणिक त्रुटि है, इसलिए यह अशुद्ध वाक्य है।
प्रश्न 224
वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द है :
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उत्तर और व्याख्या
वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द "सौहार्द" है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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सौहार्द (Option 1): यह शब्द संस्कृत से लिया गया है और इसका अर्थ है मित्रता या सद्भावना। इस शब्द की वर्तनी शुद्ध है और यह सही रूप में लिखा गया है। इसलिए, यह विकल्प सही है।
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विभिषिका (Option 2): इस शब्द की वर्तनी में त्रुटि है। सही शब्द "विभीषिका" है, जिसका अर्थ है भयावह स्थिति या आपदा। इसलिए, यह विकल्प गलत है।
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सुश्रुशा (Option 3): इस शब्द की वर्तनी भी गलत है। सही शब्द "सश्रुषा" है, जिसका अर्थ है सेवा या देखभाल। इसलिए, यह विकल्प भी गलत है।
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शिष्ठ (Option 4): इस शब्द की वर्तनी में भी त्रुटि है। सही शब्द "शिष्ट" है, जिसका अर्थ है सभ्य या विनम्र। इसलिए, यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, वर्तनी की दृष्टि से सही शब्द "सौहार्द" है, और यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 225
निम्न में से कौन-सा शब्द 'अनु' उपसर्ग से निर्मित नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्न में से कौन-सा शब्द 'अनु' उपसर्ग से निर्मित नहीं है ?
सही उत्तर: विकल्प 2 (अनुदात्त)
व्याख्या:
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अनुदात्त: यह शब्द 'अनु' उपसर्ग से निर्मित नहीं है। 'अनुदात्त' संस्कृत भाषा का एक शब्द है जो स्वर के उच्चारण के संदर्भ में प्रयुक्त होता है। यह शब्द 'उदात्त' के विपरीत स्वर को दर्शाता है और इसमें 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग नहीं होता है। इसलिए, यह सही उत्तर है।
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आनुपातिक: यह शब्द 'अनु' उपसर्ग से निर्मित है। 'आनुपातिक' का अर्थ है 'अनुपात से संबंधित'। यहाँ 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग 'अनुपात' शब्द के निर्माण में हुआ है, जो किसी चीज़ के अनुपात या तुलना को दर्शाता है।
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अनूदित: यह शब्द भी 'अनु' उपसर्ग से निर्मित है। 'अनूदित' का अर्थ है 'अनुवादित' या 'अनुवाद किया हुआ'। यहाँ 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग 'अनुवाद' के संदर्भ में किया गया है, जो किसी भाषा से दूसरी भाषा में अर्थ को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
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अनुरंजक: यह शब्द 'अनु' उपसर्ग से निर्मित है। 'अनुरंजक' का अर्थ है 'मनोरंजक' या 'आकर्षक'। यहाँ 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग किसी चीज़ को आकर्षक या मनोरंजक बनाने के संदर्भ में किया गया है।
इस प्रकार, 'अनुदात्त' शब्द 'अनु' उपसर्ग से निर्मित नहीं है, जबकि अन्य सभी विकल्पों में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 2 है।
प्रश्न 226
निम्नलिखित में से किस शब्द में 'ब' उपसर्ग नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
निम्नलिखित प्रश्न में हमें यह पहचानना है कि किस शब्द में 'ब' उपसर्ग नहीं है। सही उत्तर विकल्प 4 है, अर्थात 'बपौती'। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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बनाम: इस शब्द में 'ब' उपसर्ग है। 'बनाम' का अर्थ होता है 'के विरुद्ध' या 'के मुकाबले'। यहाँ 'ब' उपसर्ग के रूप में प्रयुक्त होता है।
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बखैर: इस शब्द में भी 'ब' उपसर्ग है। 'बखैर' का अर्थ होता है 'सुरक्षित' या 'सही-सलामत'। यहाँ 'ब' उपसर्ग के रूप में प्रयुक्त होता है।
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बदस्तूर: इस शब्द में 'ब' उपसर्ग है। 'बदस्तूर' का अर्थ होता है 'जैसा का तैसा' या 'बिना किसी परिवर्तन के'। यहाँ 'ब' उपसर्ग के रूप में प्रयुक्त होता है।
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बपौती: इस शब्द में 'ब' उपसर्ग नहीं है। 'बपौती' का अर्थ होता है 'पैतृक संपत्ति' या 'वंशानुगत अधिकार'। यह शब्द 'बाप' से बना है, जिसमें 'ब' उपसर्ग के रूप में नहीं है, बल्कि यह शब्द का मूल हिस्सा है।
इस प्रकार, 'बपौती' में 'ब' उपसर्ग नहीं है, और इसलिए यह सही उत्तर है। अन्य सभी विकल्पों में 'ब' उपसर्ग के रूप में प्रयुक्त होता है।
प्रश्न 227
किस विकल्प के सभी शब्दों में 'पर' उपसर्ग नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 3 सही उत्तर है क्योंकि इसमें दिए गए शब्दों में 'पर' उपसर्ग नहीं है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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पराक्रम: यह शब्द 'पर' उपसर्ग से नहीं बना है। 'पराक्रम' का अर्थ होता है वीरता या साहस, और यह संस्कृत से लिया गया है। इसमें 'पर' का अर्थ 'ऊपर' या 'बाहर' नहीं है, बल्कि यह शब्द अपने आप में पूर्ण है।
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पराभूत: यह शब्द भी 'पर' उपसर्ग से नहीं बना है। 'पराभूत' का अर्थ होता है पराजित या हारा हुआ। इसमें 'पर' का अर्थ 'बाहर' या 'अलग' नहीं है, बल्कि यह शब्द भी अपने आप में पूर्ण है।
अब देखते हैं कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
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विकल्प 1: परोपकार, परजीवी - इन शब्दों में 'पर' उपसर्ग है। 'परोपकार' का अर्थ है दूसरों का भला करना, और 'परजीवी' का अर्थ है ऐसा जीव जो दूसरों पर निर्भर करता है।
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विकल्प 2: परदेश, परतंत्र - इन शब्दों में भी 'पर' उपसर्ग है। 'परदेश' का अर्थ है विदेशी भूमि, और 'परतंत्र' का अर्थ है पराधीन या गुलाम।
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विकल्प 4: परकीय, परसाल - इन शब्दों में भी 'पर' उपसर्ग है। 'परकीय' का अर्थ है पराया या विदेशी, और 'परसाल' का अर्थ है पिछले साल।
इस प्रकार, विकल्प 3 में दिए गए शब्दों में 'पर' उपसर्ग नहीं है, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 228
प्रत्यय की दृष्टि से किस शब्द की रचना अनुचित है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: प्रत्यय की दृष्टि से किस शब्द की रचना अनुचित है?
सही उत्तर: विकल्प 3 (विलीन - ईन)
व्याख्या:
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विलीन - ईन (विकल्प 3): "विलीन" शब्द में "ईन" प्रत्यय का प्रयोग अनुचित है। "विलीन" शब्द संस्कृत से लिया गया है और इसका अर्थ होता है "लुप्त" या "मिल जाना"। इस शब्द में "ईन" प्रत्यय का कोई विशेष योगदान नहीं है, क्योंकि यह शब्द पहले से ही पूर्ण और अर्थपूर्ण है। इसलिए, प्रत्यय की दृष्टि से "विलीन" शब्द की रचना अनुचित मानी जाती है।
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मुरेला - एला (विकल्प 1): "मुरेला" शब्द में "एला" प्रत्यय का प्रयोग उचित है। "एला" प्रत्यय का प्रयोग अक्सर विशेषण बनाने के लिए होता है, जैसे "मुरेला" का अर्थ होता है "मुलायम" या "नरम"। इस प्रकार, "एला" प्रत्यय का प्रयोग इस शब्द में सही है।
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कँटीला - ईला (विकल्प 2): "कँटीला" शब्द में "ईला" प्रत्यय का प्रयोग उचित है। "ईला" प्रत्यय का प्रयोग विशेषण बनाने के लिए होता है, जैसे "कँटीला" का अर्थ होता है "काँटों से भरा हुआ"। इस प्रकार, "ईला" प्रत्यय का प्रयोग इस शब्द में सही है।
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ससुराल - आल (विकल्प 4): "ससुराल" शब्द में "आल" प्रत्यय का प्रयोग उचित है। "आल" प्रत्यय का प्रयोग स्थान या संबंध को दर्शाने के लिए होता है, जैसे "ससुराल" का अर्थ होता है "ससुर का घर"। इस प्रकार, "आल" प्रत्यय का प्रयोग इस शब्द में सही है।
इस प्रकार, प्रत्यय की दृष्टि से "विलीन" शब्द की रचना अनुचित है, और इसलिए विकल्प 3 सही उत्तर है।
प्रश्न 229
निम्नलिखित में से किस शब्द में 'कृत' प्रत्यय नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्नलिखित में से किस शब्द में 'कृत' प्रत्यय नहीं है?
सही उत्तर: विकल्प 2 (पांडित्य)
व्याख्या:
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विकल्प 2: पांडित्य
'पांडित्य' शब्द में 'कृत' प्रत्यय नहीं है। 'पांडित्य' शब्द 'पंडित' से बना है, जिसमें 'इत्य' प्रत्यय का प्रयोग होता है। यह शब्द विद्वत्ता या ज्ञान की स्थिति को दर्शाता है और इसमें 'कृत' प्रत्यय का कोई योगदान नहीं है। -
विकल्प 1: चाल
'चाल' शब्द में 'कृत' प्रत्यय का प्रयोग होता है। यह 'चल' धातु से बना है और इसमें 'कृत' प्रत्यय का प्रयोग करके 'चाल' शब्द का निर्माण होता है, जो किसी व्यक्ति या वस्तु की गति या तरीके को दर्शाता है। -
विकल्प 3: पढ़ाई
'पढ़ाई' शब्द में 'कृत' प्रत्यय का प्रयोग होता है। यह 'पढ़' धातु से बना है और इसमें 'कृत' प्रत्यय का प्रयोग करके 'पढ़ाई' शब्द का निर्माण होता है, जो अध्ययन या सीखने की प्रक्रिया को दर्शाता है। -
विकल्प 4: झुकाव
'झुकाव' शब्द में 'कृत' प्रत्यय का प्रयोग होता है। यह 'झुक' धातु से बना है और इसमें 'कृत' प्रत्यय का प्रयोग करके 'झुकाव' शब्द का निर्माण होता है, जो किसी वस्तु या व्यक्ति के झुकने की स्थिति या प्रवृत्ति को दर्शाता है।
इस प्रकार, 'पांडित्य' शब्द में 'कृत' प्रत्यय का प्रयोग नहीं होता है, इसलिए विकल्प 2 सही उत्तर है।
प्रश्न 230
निम्नलिखित में से किस शब्द में 'इंदा' प्रत्यय नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: निम्नलिखित में से किस शब्द में 'इंदा' प्रत्यय नहीं है ?
सही उत्तर: विकल्प 1 (गोविन्दा)
व्याख्या:
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गोविन्दा: यह शब्द 'गोविन्द' से बना है, जो भगवान विष्णु का एक नाम है। इस शब्द में 'इंदा' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है। 'गोविन्दा' में 'इंदा' प्रत्यय का कोई योगदान नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण नाम है जो संस्कृत से लिया गया है।
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शर्मिन्दा: इस शब्द में 'इंदा' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'शर्म' (लज्जा) में 'इंदा' प्रत्यय जोड़कर 'शर्मिन्दा' बनाया गया है, जिसका अर्थ है लज्जित या शर्मसार।
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बाशिंदा: इस शब्द में भी 'इंदा' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'बाश' (रहने वाला) में 'इंदा' प्रत्यय जोड़कर 'बाशिंदा' बनाया गया है, जिसका अर्थ है निवासी या रहने वाला।
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परिंदा: इस शब्द में 'इंदा' प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। 'पर' (पंख) में 'इंदा' प्रत्यय जोड़कर 'परिंदा' बनाया गया है, जिसका अर्थ है पक्षी।
इस प्रकार, 'गोविन्दा' एक ऐसा शब्द है जिसमें 'इंदा' प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है, जबकि अन्य सभी विकल्पों में 'इंदा' प्रत्यय का प्रयोग स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 1 (गोविन्दा) है।
प्रश्न 231
पर्यायवाची शब्दों के संदर्भ में असंगत विकल्प चुनिए :
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उत्तर और व्याख्या
Option 4: कौआ - प्रियक, मधुदूत, अतिसौरभ
Explanation:
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Option 4 is the correct answer because the words listed as synonyms for "कौआ" (crow) are not actually its synonyms. The words "प्रियक," "मधुदूत," and "अतिसौरभ" do not relate to a crow. These words are not commonly recognized or used as synonyms for "कौआ" in Hindi. Therefore, this option is the odd one out in the context of पर्यायवाची शब्द (synonyms).
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Option 1: जीभ - वाचा, रसना, वाणी
- "जीभ" (tongue) has synonyms like "वाचा," "रसना," and "वाणी." These words are related to speech and the organ used for tasting and speaking, making them appropriate synonyms for "जीभ."
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Option 2: अहंकार – दंभ, दर्प, मद
- "अहंकार" (ego) is correctly associated with "दंभ," "दर्प," and "मद," which all convey a sense of pride or arrogance. These are valid synonyms for "अहंकार."
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Option 3: किरण - रश्मि, मयूख, प्रभा
- "किरण" (ray) has synonyms like "रश्मि," "मयूख," and "प्रभा," which all relate to light or radiance. These are appropriate synonyms for "किरण."
In conclusion, Option 4 is the correct choice because the words listed do not serve as synonyms for "कौआ," making it the inconsistent option in the context of पर्यायवाची शब्द.
प्रश्न 232
विलोम शब्द की दृष्टि से अनुचित युग्म पहचानिए :
अपना परिणाम और व्याख्या देखने के लिए एक उत्तर चुनें।
उत्तर और व्याख्या
विलोम शब्द का अर्थ होता है विपरीत अर्थ वाला शब्द। दिए गए विकल्पों में से हमें अनुचित युग्म पहचानना है, यानी ऐसा युग्म जो सही विलोम शब्द न हो।
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बद - नेक: 'बद' का अर्थ होता है बुरा या खराब, और 'नेक' का अर्थ होता है अच्छा या भला। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीत अर्थ रखते हैं, इसलिए यह युग्म सही है।
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दुश्चरित्र - निश्चरित्र: 'दुश्चरित्र' का अर्थ होता है बुरा चरित्र वाला, जबकि 'निश्चरित्र' का कोई मान्य अर्थ नहीं है। सही विलोम 'सुचरित्र' हो सकता है, जिसका अर्थ होता है अच्छा चरित्र वाला। इसलिए यह युग्म अनुचित है।
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विस्तृत - संक्षिप्त: 'विस्तृत' का अर्थ होता है फैला हुआ या विस्तारित, और 'संक्षिप्त' का अर्थ होता है छोटा या संक्षेप में। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीत अर्थ रखते हैं, इसलिए यह युग्म सही है।
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मधुर - कटु: 'मधुर' का अर्थ होता है मीठा या सुखद, और 'कटु' का अर्थ होता है कड़वा या तीखा। ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीत अर्थ रखते हैं, इसलिए यह युग्म सही है।
इस प्रकार, विकल्प 2 'दुश्चरित्र - निश्चरित्र' अनुचित युग्म है क्योंकि 'निश्चरित्र' का कोई मान्य अर्थ नहीं है और यह 'दुश्चरित्र' का सही विलोम नहीं है।
प्रश्न 233
निम्नलिखित में से कौन-सा विलोम-युग्म है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 2, "असीम-ससीम," सही उत्तर है क्योंकि यह एक विलोम-युग्म है। विलोम-युग्म का अर्थ होता है दो ऐसे शब्द जो एक-दूसरे के विपरीत अर्थ रखते हैं। यहाँ पर "असीम" का अर्थ है "जिसकी कोई सीमा न हो" और "ससीम" का अर्थ है "जिसकी सीमा हो।" इसलिए, ये दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीत अर्थ रखते हैं और इस प्रकार यह सही विलोम-युग्म बनाते हैं।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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ग्रह-अनुग्रह: "ग्रह" का अर्थ है "लेना" या "ग्रहण करना," जबकि "अनुग्रह" का अर्थ है "कृपा" या "दया।" ये दोनों शब्द अर्थ में विपरीत नहीं हैं, इसलिए यह विलोम-युग्म नहीं है।
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अज्ञ-अनभिज्ञ: "अज्ञ" का अर्थ है "जो नहीं जानता" और "अनभिज्ञ" का भी अर्थ है "जो नहीं जानता।" ये दोनों शब्द समानार्थी हैं, न कि विलोम। इसलिए यह विकल्प गलत है।
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सचेत-चेतन: "सचेत" का अर्थ है "सावधान" या "जागरूक," और "चेतन" का अर्थ है "सजीव" या "सचेतन।" ये दोनों शब्द अर्थ में समानता रखते हैं, न कि विपरीतता। इसलिए यह विलोम-युग्म नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 2 "असीम-ससीम" सही विलोम-युग्म है।
प्रश्न 234
किस विकल्प में कोई एक शब्द 'सूर्य' का पर्यायवाची नहीं है ?
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उत्तर और व्याख्या
विकल्प 4 सही उत्तर है क्योंकि इसमें 'अर्णव' शब्द 'सूर्य' का पर्यायवाची नहीं है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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मार्तंड, दिनकर: ये दोनों शब्द 'सूर्य' के पर्यायवाची हैं। 'मार्तंड' और 'दिनकर' दोनों ही सूर्य के विभिन्न नाम हैं, जो उसकी रोशनी और दिन के समय के साथ जुड़े हुए हैं।
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आदित्य, अर्क: 'आदित्य' और 'अर्क' भी 'सूर्य' के पर्यायवाची शब्द हैं। 'आदित्य' का अर्थ है सूर्य, जो अदिति के पुत्रों में से एक है, और 'अर्क' का अर्थ भी सूर्य है।
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सविता, दिवाकर: 'सविता' और 'दिवाकर' भी सूर्य के पर्यायवाची शब्द हैं। 'सविता' का अर्थ है सूर्य, जो जीवन का स्रोत है, और 'दिवाकर' का अर्थ है दिन का निर्माता, जो सूर्य को दर्शाता है।
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भास्कर, अर्णव: यहाँ 'भास्कर' तो सूर्य का पर्यायवाची है, लेकिन 'अर्णव' सूर्य का पर्यायवाची नहीं है। 'अर्णव' का अर्थ है समुद्र या सागर, जो सूर्य से संबंधित नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 4 में 'अर्णव' शब्द 'सूर्य' का पर्यायवाची नहीं है, इसलिए यह सही उत्तर है।
प्रश्न 235
‘अनुष्ठान करने वाला’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है :
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उत्तर और व्याख्या
‘अनुष्ठान करने वाला’ वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है 'अनुष्ठाता'। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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अनुष्ठाता (Option 3): 'अनुष्ठाता' शब्द का अर्थ होता है वह व्यक्ति जो अनुष्ठान करता है या अनुष्ठान का संचालन करता है। यह शब्द 'अनुष्ठान' से बना है और इसमें 'कर्ता' का भाव निहित है। इसलिए, 'अनुष्ठान करने वाला' के लिए 'अनुष्ठाता' सबसे उपयुक्त शब्द है।
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अनुष्ठित (Option 1): 'अनुष्ठित' का अर्थ होता है जो अनुष्ठान किया गया हो। यह एक क्रिया विशेषण है जो कार्य के पूर्ण होने को दर्शाता है, न कि कार्य करने वाले व्यक्ति को। इसलिए, यह विकल्प सही नहीं है।
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अनुसंधायक (Option 2): 'अनुसंधायक' का अर्थ होता है शोधकर्ता या वह व्यक्ति जो अनुसंधान करता है। यह शब्द 'अनुसंधान' से संबंधित है, न कि 'अनुष्ठान' से। इसलिए, यह विकल्प भी सही नहीं है।
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अनुसंधित्सु (Option 4): 'अनुसंधित्सु' का अर्थ होता है जो अनुसंधान करने की इच्छा रखता हो। यह शब्द भी 'अनुसंधान' से संबंधित है और 'अनुष्ठान' से कोई संबंध नहीं रखता। इसलिए, यह विकल्प भी सही नहीं है।
इस प्रकार, 'अनुष्ठान करने वाला' के लिए सही और सार्थक शब्द 'अनुष्ठाता' ही है, जो कि Option 3 है।
प्रश्न 236
आचार्य भरत के रस-निष्पत्ति संबंधी सूत्र के व्याख्याकारों में से किस विद्वान की व्याख्या 'भुक्तिवाद' कहलाती है ?
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उत्तर और व्याख्या
आचार्य भरत के रस-निष्पत्ति संबंधी सूत्र के व्याख्याकारों में भट्ट नायक की व्याख्या को 'भुक्तिवाद' कहा जाता है। भट्ट नायक ने रस सिद्धांत की व्याख्या करते हुए यह बताया कि रस का अनुभव एक प्रकार की भुक्ति या आनंद है, जो दर्शक को नाट्य प्रदर्शन के माध्यम से प्राप्त होता है। उनके अनुसार, रस का अनुभव एक मानसिक प्रक्रिया है जो दर्शक के भीतर होती है और यह एक प्रकार की भोगात्मक अनुभूति है।
अब हम अन्य विकल्पों पर विचार करते हैं और समझते हैं कि वे क्यों सही नहीं हैं:
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भट्ट लोल्लट: भट्ट लोल्लट ने रस सिद्धांत की व्याख्या 'अनुभाववाद' के रूप में की है। उनके अनुसार, रस का अनुभव नाटक के पात्रों के भावों और उनके अनुभवों के माध्यम से होता है। यह दृष्टिकोण भुक्तिवाद से भिन्न है क्योंकि यह पात्रों के अनुभवों पर अधिक केंद्रित है।
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अभिनव गुप्त: अभिनव गुप्त ने रस सिद्धांत की व्याख्या 'अभिव्यंजनावाद' के रूप में की है। उनके अनुसार, रस का अनुभव काव्य या नाटक के माध्यम से अभिव्यक्त होता है और यह दर्शक के भीतर एक विशेष प्रकार की अनुभूति उत्पन्न करता है। यह दृष्टिकोण भी भुक्तिवाद से अलग है।
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शंकुक: शंकुक ने रस सिद्धांत की व्याख्या 'अनुमितिवाद' के रूप में की है। उनके अनुसार, रस का अनुभव अनुमान के माध्यम से होता है, जहां दर्शक पात्रों के अनुभवों को अपने अनुभवों के साथ जोड़कर रस का अनुभव करता है। यह दृष्टिकोण भी भुक्तिवाद से भिन्न है।
इस प्रकार, भट्ट नायक की व्याख्या को 'भुक्तिवाद' कहा जाता है क्योंकि उन्होंने रस को एक भोगात्मक अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया है, जो दर्शक के भीतर आनंद की अनुभूति उत्पन्न करता है। यही कारण है कि विकल्प 1 सही उत्तर है।
प्रश्न 237
हरिगीतिका छन्द' का लक्षण नहीं है :
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उत्तर और व्याख्या
हरिगीतिका छन्द के लक्षणों के आधार पर, विकल्प 4 सही उत्तर है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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विकल्प 1: प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं।
- यह कथन सही है। हरिगीतिका छन्द में प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं। यह छन्द का एक प्रमुख लक्षण है।
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विकल्प 2: 16, 12 पर यति होती है।
- यह भी सही है। हरिगीतिका छन्द में यति का स्थान 16 और 12 मात्राओं पर होता है। यह छन्द की संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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विकल्प 3: अंत में लघु-गुरु (15) मात्रा होती है।
- यह कथन भी सही है। हरिगीतिका छन्द के अंत में लघु-गुरु (15) मात्रा होती है, जो इसकी विशेषता है।
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विकल्प 4: यह मात्रिक विषम छंद है।
- यह कथन गलत है। हरिगीतिका छन्द एक मात्रिक सम छन्द है, न कि विषम छन्द। इसीलिए विकल्प 4 सही उत्तर है क्योंकि यह हरिगीतिका छन्द का लक्षण नहीं है।
इस प्रकार, विकल्प 4 सही उत्तर है क्योंकि यह हरिगीतिका छन्द के लक्षणों के विपरीत है। अन्य सभी विकल्प हरिगीतिका छन्द के सही लक्षणों का वर्णन करते हैं।
प्रश्न 238
सुमेलित कीजिए :
(क) श्रुतिकटुत्व दोष – (i) प्रेम शक्ति से चिर निरस्त्र दोष हो जावेगी पाशवता।
(ख) क्लिष्टत्व दोष – (ii) कवि के कठिनतर कर्म की दोष संस्कृति दोष करते नहीं हम धृष्टता। पर क्या न विषयोत्कृष्टता करती विचारोत्कृष्टता।।
(ग) च्युत दोष – (iii) लचकती कैसी सुघर, मन हर रही यह कमर।
(घ) ग्राम्यत्व दोष – (iv) अहि-रिपु-पति-तिय सदन है मुख तेरो रमनीय।।
कूट :
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उत्तर और व्याख्या
सही उत्तर विकल्प 1 है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
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श्रुतिकटुत्व दोष (क) – (ii): श्रुतिकटुत्व दोष का अर्थ है वह दोष जो सुनने में कटु या अप्रिय लगता है। विकल्प (ii) "कवि के कठिनतर कर्म की दोष संस्कृति दोष करते नहीं हम धृष्टता। पर क्या न विषयोत्कृष्टता करती विचारोत्कृष्टता।" में शब्दों का संयोजन ऐसा है जो सुनने में कटु प्रतीत होता है, इसलिए यह श्रुतिकटुत्व दोष के अंतर्गत आता है।
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क्लिष्टत्व दोष (ख) – (iv): क्लिष्टत्व दोष का अर्थ है जटिलता या कठिनता। विकल्प (iv) "अहि-रिपु-पति-तिय सदन है मुख तेरो रमनीय।" में शब्दों का प्रयोग जटिल और कठिन है, जो क्लिष्टत्व दोष को दर्शाता है।
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च्युत दोष (ग) – (i): च्युत दोष का अर्थ है वह दोष जो किसी नियम या परंपरा से विचलन को दर्शाता है। विकल्प (i) "प्रेम शक्ति से चिर निरस्त्र दोष हो जावेगी पाशवता।" में यह दोष दिखाई देता है क्योंकि यह वाक्य संरचना में विचलन को दर्शाता है।
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ग्राम्यत्व दोष (घ) – (iii): ग्राम्यत्व दोष का अर्थ है अशिष्ट या ग्रामीण भाषा का प्रयोग। विकल्प (iii) "लचकती कैसी सुघर, मन हर रही यह कमर।" में भाषा का प्रयोग अशिष्टता की ओर इशारा करता है, जो ग्राम्यत्व दोष को दर्शाता है।
अब, अन्य विकल्पों के गलत होने का कारण:
- विकल्प 2: इसमें श्रुतिकटुत्व दोष और ग्राम्यत्व दोष के संयोजन गलत हैं।
- विकल्प 3: इसमें क्लिष्टत्व दोष और च्युत दोष के संयोजन गलत हैं।
- विकल्प 4: इसमें श्रुतिकटुत्व दोष और ग्राम्यत्व दोष के संयोजन गलत हैं।
इस प्रकार, विकल्प 1 सही है क्योंकि यह सभी दोषों को सही तरीके से मिलाता है।
प्रश्न 239
‘चंद्र ते लजात जलजात जग जानत है।
आज जलजात ते लजात चंद देखौ मैं।।’
प्रस्तुत पंक्तियों में अलंकार है :
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उत्तर और व्याख्या
प्रस्तुत पंक्तियों में अलंकार 'विभावना' है। विभावना अलंकार का प्रयोग तब होता है जब किसी वस्तु या स्थिति को उसके विपरीत रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यहाँ पर चंद्रमा और जलजात (कमल) के बीच एक विपरीत स्थिति को दर्शाया गया है। सामान्यतः चंद्रमा की शीतलता और प्रकाश से जलजात (कमल) खिलता है, लेकिन यहाँ पर यह कहा गया है कि जलजात के सामने चंद्रमा लज्जित हो रहा है। यह एक असंभव स्थिति है, जो विभावना अलंकार का उदाहरण है।
अब अन्य विकल्पों की चर्चा करते हैं:
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दीपक अलंकार: यह तब होता है जब किसी वस्तु की विशेषता को दूसरी वस्तु पर आरोपित किया जाता है। यहाँ ऐसा कोई आरोपण नहीं है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
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उत्प्रेक्षा अलंकार: यह तब होता है जब किसी वस्तु की तुलना किसी अन्य वस्तु से की जाती है और यह संभावना व्यक्त की जाती है कि दोनों वस्तुएं समान हो सकती हैं। यहाँ पर कोई तुलना या संभावना व्यक्त नहीं की गई है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
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वक्रोक्ति अलंकार: यह तब होता है जब किसी बात को घुमा-फिराकर कहा जाता है। यहाँ पर ऐसा कोई घुमावदार कथन नहीं है, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
इस प्रकार, प्रस्तुत पंक्तियों में विभावना अलंकार का प्रयोग किया गया है, जो विकल्प 2 को सही ठहराता है।
प्रश्न 240
जब प्रस्तुत (उपमेय) एवं अप्रस्तुत (उपमान) का एक धर्म कथन किया जाये, तो कौन-सा अलंकार होगा ?
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उत्तर और व्याख्या
प्रश्न: जब प्रस्तुत (उपमेय) एवं अप्रस्तुत (उपमान) का एक धर्म कथन किया जाये, तो कौन-सा अलंकार होगा?
सही उत्तर: विकल्प 3 (दीपक)
विस्तृत व्याख्या:
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दीपक अलंकार: दीपक अलंकार वह अलंकार है जिसमें एक ही धर्म (गुण या विशेषता) को प्रस्तुत (उपमेय) और अप्रस्तुत (उपमान) दोनों के लिए कहा जाता है। इस अलंकार में एक गुण का वर्णन किया जाता है जो दोनों वस्तुओं में समान रूप से पाया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि कहा जाए कि "चंद्रमा और मुख दोनों ही शीतलता से भरे हैं", तो यहाँ शीतलता का गुण दोनों के लिए समान रूप से लागू होता है। इस प्रकार, जब प्रस्तुत और अप्रस्तुत का एक ही धर्म कथन किया जाता है, तो वह दीपक अलंकार कहलाता है।
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अन्य विकल्पों की व्याख्या:
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रूपक: रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच इतनी समानता होती है कि उपमेय को उपमान के रूप में ही प्रस्तुत किया जाता है। उदाहरण के लिए, "तुम चंद्रमा हो" में व्यक्ति को चंद्रमा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यहाँ एक धर्म का कथन नहीं होता, बल्कि उपमेय को उपमान के रूप में ही देखा जाता है।
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उपमा: उपमा अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच तुलना की जाती है और 'जैसे', 'तैसे', 'समान' आदि शब्दों का प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए, "तुम चंद्रमा के समान सुंदर हो"। यहाँ स्पष्ट तुलना होती है, न कि एक धर्म का कथन।
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दृष्टांत: दृष्टांत अलंकार में किसी बात को स्पष्ट करने के लिए उदाहरण दिया जाता है। यह उपमेय और उपमान के बीच समानता दिखाने के लिए होता है, लेकिन यह एक धर्म का कथन नहीं होता।
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इस प्रकार, जब प्रस्तुत और अप्रस्तुत का एक धर्म कथन किया जाता है, तो वह दीपक अलंकार होता है, और इसलिए विकल्प 3 सही उत्तर है।