Question
Easy
संत-साहित्य के संबंध में असंगत कथन छाँटिए :
1
सिद्धों के चर्यापदों में संतों के पदों का मूल स्रोत दृष्टिगोचर होता है।
2
संत काव्य रूपों में प्रयुक्त शब्द या सबद वस्तुतः गुरु के ज्ञान का प्रतीक है।
3
संतों के पदों में प्रधानतः शृंगार व करुण रस का परिपाक हुआ है।
4
रमैनियों की रचना दोहों तथा चौपाइयों में की गई है।
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 2
Chapter: आचार्य आचार्य रामचंद्र शुक्ल
Topic: हिंदी साहित्य का इतिहास
Correct Answer
Option C
Explanation
संत-साहित्य के संबंध में असंगत कथन छाँटने के लिए दिए गए विकल्पों में से विकल्प 3 सही उत्तर है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं: 1. विकल्प 3: संतों के पदों में प्रधानतः शृंगार व करुण रस का परिपाक हुआ है। - संत साहित्य का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति का प्रसार करना है। संतों के पदों में भक्ति रस, ज्ञान रस, और वैराग्य रस का प्रमुखता से वर्णन…Read More
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