Question
Easy

शान्तमिदमाश्रमपदं स्फुरति च बाहुः कुतः फलमिहास्य। अथवा भवितव्यानां द्वाराणि भवन्ति सर्वत्र।। - अत्र कोऽलङ्कारः ?

1
श्लेषः
2
उपमा
3
अतिशयोक्तिः
4
अर्थान्तरन्यासः
Question Details
Time to Solve: 12
Exam: HTET
Level/Paper: Level 2
Chapter: अलङ्काराः
Topic: अर्थान्तरन्यासः
Correct Answer
Option D
Explanation

निश्चित रूप से, दिए गए संस्कृत बहुविकल्पीय प्रश्न का विस्तृत और शुद्ध हिंदी में स्पष्टीकरण यहाँ प्रस्तुत है: प्रश्न का अर्थ: दिए गए संस्कृत श्लोकांश "शान्तमिदमाश्रमपदं स्फुरति च बाहुः कुतः फलमिहास्य। अथवा भवितव्यानां द्वाराणि भवन्ति सर्वत्र।।" का अर्थ है: "यह आश्रम शांत है, और मेरी भुजा फड़क रही है। यहाँ इसका क्या फल होगा? अथवा, होनी (भाग्य) के द्वार सब जगह होते हैं।" प्रश्न पूछा गया है कि इस पद्य…Read More

- HTET Level 2 | Clear Cutoff